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ई-नीलामी प्रकरण में एचएसवीपी को आवंटी को मुआवजा देने के आदेश

ई-नीलामी प्रकरण में एचएसवीपी को आवंटी को मुआवजा देने के आदेश

संक्षेप:

फरीदाबाद में ई-नीलामी से जुड़े मामले में हरियाणा राइट टू सर्विस आयोग ने विकास कार्य अधूरे रहने पर प्राधिकरण की जिम्मेदारी तय की। आयोग ने आवंटी को 5,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। इसके अलावा, आयोग ने सभी प्लॉट्स के विकास कार्य पूर्ण होने की अनिवार्यता पर भी जोर दिया।

Jan 15, 2026 11:12 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, फरीदाबाद
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चंडीगढ़/फरीदाबाद। फरीदाबाद में प्लॉट की ई-नीलामी से जुड़े एक मामले में हरियाणा राइट टू सर्विस आयोग ने अहम आदेश दिया है। आयोग ने विकास कार्य अधूरे रहने पर प्राधिकरण की जिम्मेदारी तय की। आवंटी को मुआवजा देने के निर्देश जारी किए गए। प्रवक्ता के मुताबिक हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने फरीदाबाद में ई-नीलामी से जुड़े एक प्रकरण में यह स्पष्ट किया है कि किसी भी प्लॉट को नीलामी में शामिल करने से पहले वहां सभी जरूरी विकास कार्य पूरे होने चाहिए। आयोग ने कहा कि अधूरे विकास कार्यों के साथ प्लॉट का आवंटन करने से आवंटियों को परेशानी होती है, जो स्वीकार्य नहीं है।

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आयोग के अनुसार, ई-नीलामी में शामिल प्लॉट्स पर सड़क, सीवर, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं का उपलब्ध होना जरूरी है, ताकि आवंटी समय पर निर्माण कार्य शुरू कर सकें। विकास कार्यों के बिना कब्जा दिया मामले की जांच में सामने आया कि 24 नवंबर 2023 को जारी आवंटन पत्र में कब्जा प्रस्तावित किया गया, जबकि साइट पर कुछ विकास कार्य अभी पूरे नहीं हुए थे। आयोग ने यह भी उल्लेख किया कि आवंटन पत्र की शर्त संख्या-5 के तहत यदि 30 दिनों के भीतर कब्जा नहीं दिया जाता है तो संबंधित प्राधिकरण को ब्याज देना होता है। ऐसे मामलों में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण से यह अपेक्षा की गई कि वह एक सार्वजनिक संस्था के रूप में नियमों के अनुसार स्वतः और समयबद्ध तरीके से ब्याज भुगतान की प्रक्रिया अपनाए, ताकि आवंटियों को अलग-अलग मंचों पर शिकायत दर्ज कराने की जरूरत न पड़े। आयोग ने अपने आदेश में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की 16 अक्तूबर 2025 की टिप्पणी का भी हवाला दिया, जिसमें वैधानिक उद्देश्यों के अनुरूप पारदर्शी और जवाबदेह कार्यप्रणाली अपनाने पर जोर दिया गया है। आयोग ने कहा कि इससे पहले भी इसी तरह के मामलों में प्रभावित आवंटियों को नियमों के तहत लाभ देने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं। वर्तमान मामले में आयोग ने हरियाणा सेवा अधिकार अधिनियम, 2014 के प्रावधानों के अनुसार अधिकतम 5,000 रुपये तक मुआवजा दिए जाने का प्रावधान लागू किया। इसी आधार पर शिकायतकर्ता को 5,000 रुपये मुआवजा देने के निर्देश एचएसवीपी को दिए गए हैं। यह राशि 15 दिनों के भीतर अदा करनी होगी। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि मुआवजे की राशि पहले प्राधिकरण द्वारा दी जाएगी और बाद में नियमानुसार जिम्मेदारी तय कर आगे की कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही यह छूट दी गई है कि आवंटी चाहें तो अधिक मुआवजे के लिए उपभोक्ता फोरम, उच्च न्यायालय या अन्य सक्षम प्राधिकरण का रुख कर सकते हैं। भविष्य के लिए आयोग ने सख्त निर्देश दिए हैं कि विकास कार्यों की स्थिति सुनिश्चित किए बिना किसी भी प्लॉट को नीलामी प्रक्रिया में शामिल न किया जाए। मामले की विस्तृत समीक्षा के लिए मुख्य प्रशासक, एचएसवीपी से संबंधित फाइलों की मूल नोटिंग शीट और एस्टेट ऑफिसर, फरीदाबाद से नीलामी व विकास कार्यों से जुड़े अधिकारियों का विवरण भी मांगा गया है।