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मथुरा में इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद को नम आंखों से दी अंतिम विदाई

मथुरा में इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद को नम आंखों से दी अंतिम विदाई

संक्षेप:

फरीदाबाद में अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले के दौरान झूला गिरने की घटना में हरियाणा पुलिस के इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद शहीद हो गए। उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव में किया गया, जहां पुलिस गारद ने उन्हें सलामी दी। परिवार में शोक का माहौल है, और उनके बेटे ने मुखाग्नि दी।

Feb 08, 2026 11:38 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, फरीदाबाद
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मथुरा/फरीदाबाद, हिन्दुस्तान संवाद फरीदाबाद में सूरज कुंड में चल रहे अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले में झूला गिरने की सूचना पर ड्यूटी के दौरान लोगों को बचाने के प्रयास में हरियाणा पुलिस विभाग में कार्यरत इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद शहीद हो गए। उनके पार्थिव शव को पैतृक गांव लाया गया। पुलिस पदक प्राप्त इंस्पेक्टर को हरियाणा पुलिस के आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में आई पुलिस गारद टुकड़ी ने जमुना पल्लीपार यमुना किनारे स्थित घाट पर सशस्त्र सलामी दी। उनके पुत्र ने गमगीन माहौल में मुखाग्नि दे अंतिम संस्कार किया। शनिवार देर शाम मेला में ड्यूटी के दौरान इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद सारस्वत शहीद हो गये थे।

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इसकी जानकारी होने पर परिवार में कोहराम मच गया था। देर रात शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद शव पैतृक गांव डैंगरा, जमुनापार लाया गया। सुबह उनके पार्थिव शव को श्रद्धांजलि-पुष्पांजलि देने वालों का तांता लगा गया। सुबह करीब शवयात्रा यमुना घाट पहुंची। वहां हरियाणा सरकार के आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में आयी गारद टुकड़ी ने शहीद हुए इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद सारस्वत को सशस्त्र सलामी और अधिकारियों ने पुष्पचक्र चढ़ा अंतिम विदाई दी। गमगीन माहौल में इकलौते बेटे गौरव ने मुखाग्नि दी। घर पर शोक संवेदना व्यक्त करने वालों का तांता लगा हुआ है। पांच भाइयों में सबसे बड़े थे जगदीश परिजनों ने बताया कि पांच भाईयों में जगदीश प्रसाद सारस्वत सबसे बड़े थे। इनके बाद चंद्रभान सारस्वत, सतीश सारस्वत, चुन्नी लाल सारस्वत, प्रदीप कुमार सारस्वत हैं। चुन्नी लाल की वर्ष-2001 में हादसे में मौत हो गयी थी। चार भाइयों में सभी नौकरी पेशा है। बेटे के शहीद होने पर वृद्ध मां कांती देवी और पिता सूरजमल गर्वित महसूस कर रहे हैं, लेकिन बेटे के जाने का गम दिल में टीस दे गया। अपनों के बीच रहने की तमन्ना रह गई अधूरी भाई ने बताया कि कुछ दिनों पहले ही फोन आया था। उन्होंने कहा कि अब बहुत घर से दूर रह लिया। भाई ऐसा है अब रिटायर होने के बाद गांव में अपने परिवार, परिजन व अपने लोगों के साथ ही रहूंगा। इसलिये मकान का नक्शा तैयार करायेंगे। तुम लोग किसी को मकान बनवाने के लिये ठेका दे दो। रिटायर होने के बाद पत्नी और वह परिजनों के साथ गांव में ही मकान बनाकर रहेंगे, लेकिन काल की क्रूर गति ने उनकी इस इच्छा को पूरा नहीं होने दिया।