अरावली में सौ से ज्यादा धार्मिक स्थलों पर तोडफ़ोड़ की तलवार लटकी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हरियाणा सरकार ने अरावली में अवैध निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की है। धार्मिक स्थलों को तोड़ने के लिए वन विभाग ने प्राचीन परसोन मंदिर को नोटिस जारी किया है। अरावली में 100 से अधिक धार्मिक स्थल बने हैं, जिनमें से कई अवैध निर्माण के अंतर्गत आते हैं।

फरीदाबाद, वरिष्ठ संवाददाता। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अरावली को अवैध निर्माण मुक्त करने के लिए हरियाणा सरकार चरणबद्ध कार्रवाई की रणनीति अपना रही है। फार्म हाऊसों को तोड़ने के बाद अब धार्मिक स्थलों को तोड़ने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। प्राचीन परसोन मंदिर को दिया गया वन विभाग का नोटिस इसकी तस्दीक करता है। जिसमें मंदिर को 15 दिन का समय दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक अरावली में 100 से ज्यादा धार्मिक स्थल बने हुए हैं। इतना ही नहीं इन धार्मिक स्थलों तक पानी बिजली जैसी मूलभूत सुविधा भी मिल रही है। सूरजकुंड-दिल्ली रोड, पाली-सूरजकुंड रोड, फरीदाबाद-गुरुग्राम रोड, पाली क्रेशर जोन रोड आदि जगह पर धार्मिक स्थलों की भरमार है।
अनेक धार्मिक स्थल ऐसे हैं, जो पांच एकड़ से लेकर 20 एकड़ तक मे बने हुए हैं। बड़ी-बड़ी इमारत यहां बनी हुई हैं। यहां सालभर बड़े-बड़े कार्यक्रम होते हैं। जिनमें शासन-प्रशासन में रसूख रखने के लिए वाले लोग भी हिस्सा लेते हैं। सूत्रों के मुताबिक अधिकांश धार्मिक स्थल ऐसे हैं, जो वन विभाग का नियम बनने के बाद बनाए गए। जिनपर पीएलपीए की धार 4 और 5 लागू होती है। अवैध निर्माण से पहले धार्मिक स्थलों को बना रहे ढाल सूत्रों का कहना है कि अरावली में फार्म हाउस, मैरिज गार्डन आदि बनाने के लिए पहले लोग धार्मिक स्थल का निर्माण करते हैं। ताकि उनकी आड़ में अपने अवैध निर्माण के मनसूबों को पूरा किया जा सके। क्योंकि ऐसे लोगों को लगता है कि धार्मिक स्थल पर अधिकारी तोड़फोड़ की कार्रवाई नहीं करेंगे। यही वजह रही कि लंबे समय से इस रणनीति के तहत लोगों को काफी हद तक कामयाबी भी मिली। हालांकि अलग बात है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हरियाणा सरकार के लिए कार्रवाई करना अनिवार्य हो गया है। खोरी की 100 एकड़ से ज्यादा जमीन को खाली करवाने के लिए हरियाणा सरकार को दस हजार से ज्यादा मकान तोड़ने पड़े थे। पिछले साल बड़ी कार्रवाई हुई थी गौरतलब है कि वन विभाग ने पिछले वर्ष जून जुलाई में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अरावली वन क्षेत्र में स्थित अवैध निर्माण के खिलाफ बुलडोजर अभियान चलाया था। करीब डेढ़ महीने तक चली कार्रवाई में लक्कड़पुर, अनंगपुर, अनखीर और मेवला महाराजपुर क्षेत्र में अवैध निर्माणों को हटाया था। वन विभाग की टीम ने 261.06 एकड़ में फैले क्षेत्र में 88 स्थानों पर फैले 241 अवैध निर्माण को तोड़ा था। वन विभाग को गांव अनंगपुर में तोड़फोड़ की कार्रवाई में काफी परेशानी आई थी। मामला सुप्रीम कोर्ट की गठित सीईसी के पास गया था। इसके बाद सीईसी ने मौका मुआयना करके अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की थी। सूत्रों के मुताबिक अरावली में 780.26 एकड़ जमीन पर अवैध निर्माण है। इसमें अनंगपुर में 286 एकड़ जमीन पर 5948 निर्माण, अनखीर में 250 एकड़ जमीन में 339, लक्कड़पुर में 197 एकड़ जमीन पर 313 और मेवला महाराजपुर में 46 एकड़ जमीन पर 193 अवैध निर्माण बने हुए हैं। इसमें मैरिज हॉल, बैंक्वेट हॉल, औद्योगिक इकाइयां और आवासीय भवन शामिल है। 26 फरवरी को जारी किया गया है नोटिस वन विभाग की ओर से 26 फरवरी को परसोन मंदिर को नोटिस जारी किया था। जिसमें लिखा है कि धार्मिक स्थलों में अवैध संरचना बनाई गई है, जो अरावली में पीएलपीए एक्ट का उल्लंघन करती है। अरावली केवल पौधे लगाने के लिए है, इसलिए किसी भी प्रकार का निर्माण यहां पर गैर-कानूनी है। इसलिए परिसर में बनाए गए ढांचों को हटाने के लिए 15 दिन का समय मंदिर में बने अवैध ढांचे को हटाने के लिए दिया जाता है। यह है नियम पीएलपीए एक पर्यावरण संरक्षण कानून है, जिसे पहाड़ी और वन क्षेत्रों में भूमि क्षरण, बाढ़ और प्राकृतिक संसाधनों की हानि रोकने के उद्देश्य से लागू किया गया था। हरियाणा और पंजाब में इसकी कुछ धाराएं आज भी प्रभावी हैं। इस कानून की धारा 4 के तहत राज्य सरकार किसी भी ऐसे क्षेत्र को अधिसूचना जारी कर संरक्षित घोषित कर सकती है, जहां मिट्टी के कटाव, जल बहाव या पर्यावरणीय नुकसान का खतरा हो। धारा 4 लागू होने के बाद उस क्षेत्र में पेड़ काटने, खनन, निर्माण या जमीन जोतने जैसी गतिविधियों पर रोक या नियंत्रण लगाया जा सकता है। इसके बाद धारा 5 के अंतर्गत सरकार संरक्षित क्षेत्र में किन-किन कार्यों पर प्रतिबंध रहेगा, यह स्पष्ट रूप से तय करती है। बिना अनुमति गतिविधि करने पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान भी है।
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