
तीन दिन बच्चा स्कूल नहीं आया तो अध्यापक घर पहुंचेंगे
हरियाणा विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की ट्रैकिंग करने का निर्णय लिया है। यदि कोई बच्चा तीन दिनों तक स्कूल नहीं जाता है, तो अध्यापक उसके घर जाकर कारण जानेंगे। इससे ड्रॉप आउट की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।
फरीदाबाद, वरिष्ठ संवाददाता। हरियाणा विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की ट्रैकिंग करने का फैसला किया है।इसके तहत यदि कोई बच्चा तीन दिनों तक स्कूल नहीं जाता तो उसके घर अध्यापक पहुंचेंगे और उसके अभिभावकों से स्कूल नहीं आने के कारणों को जानेंगे। इसे सख्ती से लागू करने के लिए कहा गया है। शिक्षा निदेशालय का मानना है कि इससे छात्रों के ड्रॉप आउट में गिरावट आएगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के सामने सरकारी स्कूलों में बच्चों का ड्रॉप आउट है। इसे बढ़ाने के तमाम तरह के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन छात्र संख्या पहले जैसी नहीं हो पा रही है।

हर वर्ष 1800 से दो हजार के बीच बच्चे ड्रॉप आउट हो रहे हैं। इसे शून्य पर लाने के लिए हर वर्ष प्रवेश उत्सव के दौरान अध्यापक छात्रों के घर जाते हैं और उनके अभिभावकों को दाखिले के लिए प्रोत्साहित करते हैं। इसके बाद भी ड्रॉप आउट नहीं हो रहा है। अब शिक्षा निदेशालय ने नई योजना तैयार की है। इसके तहत अब हर बच्चे की ट्रैकिंग होगी। यदि कोई बच्चा तीन या उससे अधिक दिनों तक स्कूल नहीं आता है, तो संबंधित स्कूल के अध्यापक बच्चे के घर जाएंगे और न आने का कारण पूछेंगे। यदि कोई छात्र किन्हीं कारणों से अन्य क्षेत्र में रहने लगा है, तो अध्यापक छात्र का संबंधित क्षेत्र के सरकारी स्कूल में दाखिला दिलाएंगे। शिक्षा निदेशालय का मानना है कि इस कार्य से ड्रॉप आउट में गिरावट आएगी। ---- यह कारण हैं ड्रॉप आउट के फरीदाबाद एक औद्योगिक नगरी है। इसके अलावा यहां पर विभिन्न जगहों पर विकास कार्य एवं सोसाइटी विकसित हो रही है। इन कार्यों करने के लिए अन्य राज्यों से लोग आकर रहते हैं। यह उस स्थान के आसपास ही रहते हैं, जहां काम चल रहा होता है और इनके बच्चे समीप के ही सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं। काम समाप्त होने के बाद यह लोग काम तलाश में जाते हैं और वहां अपने लिए नया आशियाना बना लेते हैं। यह एक बड़ा कारण है कि फरीदाबाद में ड्रॉप आउट अधिक रहता है। इसके अलावा यदि कोई मजदूर अपने गृह राज्य चला जाता है तो वह महीनों में वापस आता है। इसके चलते भी ड्रॉप आउट अधिक दर्ज किया जाता है। -------- दो दिन फोन पर लेंगे जानकारी योजना के अनुसार अध्यापक पहले दो दिन फोन पर अभिभावक से बातचीत करेंगे। यदि बच्चा बीमारी या अन्य कारण से स्कूल नहीं आता तो उसे अवकाश का प्रार्थना पत्र देना होगा। इसके अलावा यदि किसी बच्चे के अभिभावक संपर्क नहीं होता और वह तीन से स्कूल नहीं आ रहा तो उसे घर जाएंगे और बच्चे के पड़ोसियों से उसके अन्य परिजनों के नंबर लेकर संपर्क करेंगे और स्कूल न आने की तह तक पहुंचेंगे। -------- सवा लाख से अधिक बच्चे करते हैं पढ़ाई स्मार्ट सिटी में 378 सरकारी स्कूल है। इनमें प्राथमिक, मिडल, हाई और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। इनमें से करीब 20 प्रतिशत विद्यालय दो शिफ्ट में चलाए जाते हैं। इन विद्यालयों में 1.25 लाख से अधिक विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ------------- ड्रॉप आउट को कम करने के लिए बच्चों की ट्रैकिंग बहुत ही आवश्यक है। अभिभावकों से संपर्क करके बच्चे के स्कूल नहीं आने का कारण पूछा जाएगा। इसके अलावा यदि कोई बच्चा अपने अभिभावक के साथ दूसरे क्षेत्र में चला गया है, तो उसका दाखिला संबंधित विद्यालय में कराया जाएगा। -डॉ. मनोज मित्तल, उप जिला शिक्षा अधिकारी

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