सरकारी स्कूलों में अध्यापकों के तीस फीसदी पद रिक्त
फरीदाबाद, अभिषेक शर्मा। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा 10वीं और 12वीं कक्षा के परिणामों ने फरीदाबाद की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ परिणामों को प्रभावित कर रहा है। इस बार 10वीं कक्षा का परिणाम 85.05% और 12वीं का 76.94% रहा।

फरीदाबाद, अभिषेक शर्मा। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा घोषित 10वीं और 12वीं कक्षा के परिणामों ने स्मार्ट सिटी फरीदाबाद की शिक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन इस बार भी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया। कुछ दिनों में ही खराब परिणाम को लेकर मंथन भी शुरू होगा, लेकिन कभी उस दिशा में काम नहीं हुआ। शिक्षा जगह से विशेषज्ञों और शिक्षा से जुड़े लोगों का मानना है कि स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और अध्यापकों से लगातार गैर-शैक्षणिक कार्य करवाना खराब परिणामों का प्रमुख कारण है। बता दें कि पिछले वर्ष भी शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा की अगुवाई में खराब परिणाम को लेकर जिला शिक्षा अधिकारियों की बैठक हुई थी। उसमें अध्यापकों की कमी और उन्हें गैर शैक्षणिक कार्याें में व्यस्त रखना, दो बड़ी बातें निकलकर सामने आई थी। उस समय उन्होंने पत्र जारी कर अध्यापकों को गैर शैक्षणिक कार्य में नहीं लगाने के निर्देश दिए थे। उनके आदेश का कोई विशेष प्रभाव नहीं दिखा। आज भी अध्यापक गैर शैक्षणिक कार्यों में व्यस्त हैं। अधिकतर अध्यापकों की ड्यूटी जनगणना में लगी हुई है.
इस बार परिणाम रहा निराशाजनक
इस बार जारी बोर्ड परिणामों में फरीदाबाद का प्रदर्शन और नीचे खिसक गया है। 10वीं और 12वीं दोनों कक्षाओं के परिणामों में जिला 20वें स्थान से गिरकर 21वें स्थान पर पहुंच गया। 12वीं कक्षा का परिणाम 76.94 प्रतिशत जबकि 10वीं कक्षा का परिणाम 85.05 प्रतिशत दर्ज किया गया। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते शिक्षकों की कमी दूर नहीं की गई तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है.
सरकारी स्कूलों में 30 प्रतिशत पद खाली
जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी लंबे समय से बनी हुई है। जानकारी के अनुसार जिले में करीब 1200 अध्यापकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से लगभग 360 पद अभी भी खाली पड़े हैं। सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि गणित, विज्ञान, अंग्रेजी और कॉमर्स जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षकों की कमी बनी हुई है। इन विषयों में योग्य अध्यापकों की अनुपस्थिति का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और परीक्षा परिणामों पर पड़ रहा है.
पलवल और नूंह की स्थिति भी चिंताजनक
फरीदाबाद मंडल के अन्य जिलों की स्थिति भी ज्यादा बेहतर नहीं है। पलवल जिले में करीब 3200 शिक्षकों की आवश्यकता बताई जा रही है, जबकि वर्तमान में केवल 2500 शिक्षक ही कार्यरत हैं। वहां भी कई सरकारी स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। वहीं नूंह जिले की स्थिति सबसे अधिक गंभीर मानी जा रही है। जिले में 4200 अध्यापकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में विज्ञान और गणित विषय के अध्यापकों की कमी लंबे समय से बनी हुई है.
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता
केवल परिणाम घोषित करने से शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं आएगा। सरकार को स्कूलों में रिक्त पदों को शीघ्र भरने, विषय विशेषज्ञ अध्यापकों की नियुक्ति करने और शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से राहत देने की जरूरत है। इसके अलावा अध्यापकों की जिम्मेदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्हें गैर शैक्षणिक कार्याें से भी मुक्त रखना चाहिए.
-कैलाश शर्मा, महासचिव, अभिभावक एकता मंच
हमारी तरफ से लगातार अध्यापकों की मांग भेजी जाती है। इसके अलावा जिन स्कूलों में अध्यापकों की अधिक कमी है, वहां पर डेपुटेशन पर नियुक्ति की जाती है। परिणाम गिरने के कारणों को जानकर उन्हें दूर करने का प्रयास किया जाएगा.
-अंशु सिंगला, जिला शिक्षा अधिकारी
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