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नौकरी वाले खुश उद्यमी मायूस

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अंतरिम बजट से नौकरीपेशा लोगों के चेहरे खिल गए हैं। लंबे समय से आयकर छूट को बढ़ाने की चली आ रही मांग के पूरा होने से कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले हो गई है। मगर, उद्योग जगत को इस बजट से मायूसी मिली है। जिले के उद्योगों को इस बजट से कोई फायदा होने नहीं जा रहा है। इससे उद्यमियों में कोई उत्साह नजर नहीं आया। इसके अलावा फरीदाबाद और पलवल को सीधे तौर पर कुछ नहीं मिला है। जबकि फरीदाबाद से केंद्रीय राज्य मंत्री होने के नाते लोगों को केंद्रीय विश्वविधालय, ट्रामा सेंटर, नई ट्रेन चलाने आदि की उम्मीदें थी। नतीजतन विकास की दृष्टि से आम लोगों को ज्यादा खुशी नहीं हुई। कर्मचारियों की बल्ले बल्लेफरीदाबाद और पलवल में 30 हजार से ज्यादा औद्योगिक इकाइयां हैं। इनमें सात-आठ लोग नौकरी करते हैं। वहीं कई व्यावसायिक संस्थान भी हैं। नौकरीपेशा लोगों के लिए आयकर की छूट बढ़ने के साथ-साथ गे्रज्युटी की सीमा भी 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गई है। पांच लाख रुपये की आयकर छूट पर डेढ़ लाख रुपये की बचत करने पर भी छूट मिलेगी। इससे नौकरीपेशा लोग खासे फायदे में रहे। वहीं असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए तीन हजार रुपये की पेंशन की घोषणा से औद्योगिक नगरी के मजदूरों को फायदा होगा। हालांकि संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए एक हजार पेंशन को नहीं बढ़ाने से उन्हें निराशा हाथ लगी । हालांकि फरीदाबाद की पहचान उद्योगों से है। यहां पर 20 हजार से ज्यादा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग हैं। जिससे इन उद्योगों के लिए सरकार की ओर से बड़ी घोषणा नहीं हुई। स्टार्टअप की राह आसान करने के लिए कोई ऐसा कदम नहीं उठाया गया। उद्यमियों का कहना है कि उद्योग जगत के लिए इस बजट में कुछ नया नहीं है। यह गांव, गरीब, किसान, मजदूर, नौकरीपेशा का बजट है। ---किसानों की झोली भरी किसानों के खाते में सीधे छह हजार रुपये जमा होने से किसानों के लिए राहत भरी बात रही है। किसान इसी बात से खुश हैं कि चलो सरकार ने कुछ तो किया। हालांकि किसानों को स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने की घोषणा होने की उम्मीद थी। मगर, बजट में ऐसा कुछ नहीं हुआ। न नई ट्रेन न ट्रेक: मोदी सरकार का यह अंतिम बजट था। रेलवे यात्रियों को उम्मीद थी कि लोकल गाड़ियों के फेरे बढ़ेंगे। जिससे उन्हें तकलीफदेह यात्रा से मुक्ति मिलेगी। मगर, बजट में ऐसी कोई घोषणा नहीं हुई। जिससे पलवल और फरीदाबाद के रेल यात्रियों को निराशा हाथ लगी। न तो नया रेलवे ट्रेक बिछाने की घोषणा हुई न ही कोई नई रेलगाड़ी चलाने की।25 हजार किसान हैं जिले में, 45 हजार हेक्टेयर कृषि योग्य जमीन 30 हजार से ज्यादा औद्योगिक इकाइयां फरीदाबाद और पलवल में

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