उत्पादन की खातिर उद्योगों में डीए गैस का प्रयोग शुरू
फरीदाबाद। केशव भारद्वाज औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में गैस आपूर्ति की कमी ने उद्योगों की

फरीदाबाद। केशव भारद्वाज औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में गैस आपूर्ति की कमी ने उद्योगों की रफ्तार पर असर डालना शुरू कर दिया है। उत्पादन को बरकरार रखने के लिए अब उद्यमी महंगी डीए (डिसोल्वड एसटिलिन) गैस का सहारा लेने लगे हैं। हालांकि, डीए गैस का सिलेंडर एलपीजी के मुकाबले महंगा होता है। इससे उत्पादन लागत बढ़ गई है।फरीदाबाद में करीब 30 हजार छोटे-बड़े उद्योग संचालित हो रहे हैं, जिनमें ऑटोमोबाइल, कपड़ा, अर्थमूवर, क्रेन, ट्रैक्टर, फर्नीचर, दवा और मेडिकल उपकरण जैसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इनमें सबसे ज्यादा असर कपड़ा उद्योग पर देखने को मिल रहा है। इसकी मुख्य वजह एलपीजी की कमी और पीएनजी गैस की सीमित खपत के नियम ने परेशानी बढ़ाई हुई है।
ज्यादा पीएनजी खपतकरने पर पीएनजी के लिए ज्यादा भुगतान करनापड़ रहा है। मौजूदा समय में व्यवसायिक एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता और पीएनजी खपत के नियमों से उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। इससे उद्योगों के सामने उत्पादन जारी रखना बड़ी चुनौती बन गया है। इस स्थिति से निपटने के लिए कई कंपनियों ने डीए गैस का प्रयोग बढ़ा दिया है। इस गैस का उपयोग मुख्य रूप से कटिंग, वेल्डिंग, मेटल कटिंग और हीटिंग जैसे कार्यों में किया जाता है। एसीई क्रेन लिमिटेड के महाप्रबंधक धर्मवीर वशिष्ठ बताते हैं कि व्यवसायिक सिलेंडरों की आपूर्ति में लगातार दिक्कत आ रही है। ऐसे में उत्पादन को प्रभावित होने से बचाने के लिए डीए गैस का उपयोग बढ़ाना पड़ा है। हालांकि, यह एलपीजी की तुलना में महंगी है, जिससे उत्पादन लागत में बढ़ोतरी हो रही है। हालांकि, इससे मोटी धातु को भी आसानी से काटा जा सकता है। छोटे उद्योगों के लिए यह काफी महंगी होती है। इससे उत्पादन लागत बढ़ती है। फिरभी कुछ उद्योगों में तो पहले से ही डीए गैस का प्रयोग होता आ रहा है। उन्होंने बताया कि पीएनजी की आपूर्ति भी हो रही है। इससे जेनरेटर चलाए जा रहे हैं। अभी तक किसी न किसी तरह उत्पादन बरकरार है और उद्योग अपने ऑर्डर पूरे करने में लगे हुए हैं।------ज्यादा पीएनजी खपत पर ज्यादा भुगतान:वर्तमान में उद्योगों को उनकी कुल जरूरत के मुकाबले लगभग 60 प्रतिशत ही पीएनजी मिल पा रही है। इससे अधिक खपत करने पर डेढ़ गुना शुल्क देना पड़ता है, जो उद्यमियों के लिए आर्थिक रूप से भारी पड़ रहा है। ऐसे में कई उद्योग सीमित उत्पादन या वैकल्पिक गैस पर निर्भर होने को मजबूर हैं। सिर्फ गैस ही नहीं, बल्कि कच्चे माल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने भी उद्योगों की कमर तोड़ दी है। कपड़ा, ऑटोमोबाइल, प्लास्टिक, मेडिकल उपकरण और दवा उद्योग—सभी क्षेत्रों में कच्चा माल महंगा हो चुका है। इसका सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ रहा है, जिससे मुनाफा घटता जा रहा है।उद्यमियों का मानना है कि यदि आने वाले एक महीने में गैस आपूर्ति की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो उद्योगों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। खासतौर पर छोटे उद्योगों के लिए यह स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि वे महंगी डीए गैस का लंबे समय तक उपयोग नहीं कर सकते। ऑल इंडिया फोरम ऑफ एमएसएमई के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्याम सुंदर कपूर बताते हैं कि फिलहाल, उद्योग किसी तरह उत्पादन बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। लघु उद्योगों पर लागत बढ़ने और मुनाफा घटने से कारोबार पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। उम्मीदहै कि आने वाले दिनों में युद्ध बंद होने से हालातों में सुधार होगा और गैस आपूर्ति में सुधार होगा।इससे उद्योगों में पहले की तरह ही उत्पादन हो सकेगा।------------
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