शादी विवाह वाले घरों में खुशी से ज्यादा सिलेंडर की चिंता
फरीदाबाद में शादी-विवाह के सीजन के दौरान गैस सिलेंडरों की कमी से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। व्यवसायिक और घरेलू दोनों प्रकार के सिलेंडरों की सप्लाई प्रभावित हुई है। कई परिवार अब रिश्तेदारों से सिलेंडर मांगने पर मजबूर हैं। खाद्य विभाग ने सहायता के लिए आवेदन करने की सलाह दी है।

फरीदाबाद, धनंजय चौहान। शहर में अगले सप्ताह से शुरू हो रहे शादी-विवाह का सीजन को लेकर जहां घरों में खुशियों की रौनक बढ़ जाती है, वहीं इस बार गैस सिलेंडरों की किल्लत ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। व्यवसायिक सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण शादी वाले परिवारों और कैटरिंग संचालकों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि घरेलू सिलेंडर भी आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, जिससे आयोजन की तैयारियां प्रभावित हो रही हैं। हालांकि खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने ऐसे लोगों को राहत देते हुए विभाग में आवेदन करने की बात कही है।
स्मार्ट सिटी में 15 अप्रैल से देव उठनी शुरू हो गए है। इस सीजन करीब 350 शादियां है।इन्हें लेकर होटल, रेस्तरां, सामुदायिक भवन, फार्म हाउस आदि बुक हो चुके है। लेकिन सिलेंडरों की समस्या ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।ऐसे में लोग सगे संबंधियों से सिलेंडर जुगाड़ करने में लगे हैं।बुकिंग के बाद भी तय समय पर नहीं मिल रहा सिलेंडरएजेंसियों पर पहुंचे लोगों ने बताया कि सिलेंडर की बुकिंग कराने के बावजूद समय पर डिलीवरी नहीं मिल रही। कई जगहों पर एजेंसियों के बाहर लोगों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। शनिवार को एनआईटी एक, ग्रेटर फरीदाबाद सेक्टर-86, दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे के सेक्टर-17 स्थित एजेंसी पर, ओल्ड फरीदाबाद स्थित गैस एजेंसी पर यही स्थिति देखने को मिली। ऐसे में खासतौर पर वह परिवार, जिनके यहां शादी या कोई बड़ा समारोह है, उन्हें अतिरिक्त सिलेंडरों की व्यवस्था करने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।व्यवसायिक सिलेंडर की सबसे ज्यादा किल्लतकैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों के मुताबिक इस समय सबसे ज्यादा दिक्कत व्यवसायिक सिलेंडरों की कमी को लेकर है। ग्रेटर फरीदाबाद में कैटरिंग का काम करने वाले एनके शर्मा ने बताया कि पहले जहां एक फोन करने पर सिलेंडर मिल जाता था, वहीं अब स्थिति बिल्कुल अलग है। शादी के सीजन में एक कार्यक्रम के लिए 6 से 10 सिलेंडर तक की जरूरत होती है, लेकिन अभी आधे भी नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में हमें लकड़ी की भट्टियों पर खाना पकाना पड़ रहा है, जिससे लागत बढ़ रही है। इसी तरह एनआईटी क्षेत्र के एक अन्य कैटरिंग संचालक राजीव अग्रवाल ने बताया कि है कि गैस की कमी के कारण कई बार कार्यक्रमों में देरी तक हो रही है। ग्राहकों के सामने हमारी छवि खराब होती है, जबकि गलती हमारी नहीं है।घरेलू सिलेंडर भी नहीं मिल रहे आसानी सेसिर्फ व्यवसायिक ही नहीं, घरेलू सिलेंडरों की सप्लाई भी प्रभावित बताई जा रही है। सेक्टर-21 की निवासी एक महिला ने बताया कि घर में अगले हफ्ते शादी है। उन्होंने समय से सिलेंडर बुक कराया था, लेकिन अब तक डिलीवरी नहीं मिली। हमें अतिरिक्त सिलेंडर की जरूरत है, लेकिन एजेंसी वाले साफ मना कर रहे हैं। अब रिश्तेदारों और पड़ोसियों से सिलेंडर मांगकर काम चलाना पड़ रहा है।लकड़ी की भट्टियां और तंदूर पर पकेगा खानागैस सिलेंडरों की किल्लत के चलते शादी-विवाह समारोहों में अब लकड़ी की भट्टियां और तंदूर का सहारा लिया जा रहा है। कैटरिंग संचालकों का कहना है कि मजबूरी में पारंपरिक तरीकों से खाना तैयार करना पड़ रहा है। हालांकि इससे समय और मेहनत दोनों बढ़ रहे हैं, साथ ही लागत भी प्रभावित हो रही है, लेकिन कार्यक्रम सुचारू रखने के लिए यही विकल्प बचा है।आपूर्ति प्रभावित होने के कारण बढ़ी समस्यागैस एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के अनुसार हाल के दिनों में आपूर्ति चेन प्रभावित होने और मांग बढ़ने के कारण यह स्थिति बनी है। शादी-विवाह के सीजन में अचानक खपत बढ़ जाती है, जबकि सप्लाई उसी अनुपात में नहीं बढ़ पाती। इसके अलावा ट्रांसपोर्टेशन और वितरण में भी कुछ दिक्कतें सामने आ रही हैं।शादी-विवाह में सिलेंडरों के लिए करें आवेदनजिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग नियंत्रक कविता परिहार ने बताया कि जिन घरों में शादी विवाह है। वे विभाग में सिलेंडरों की मांग अनुरूप आवेदन करें। साथ ही आवेदन पत्र में यह भी बताया जाए कि समारोह में कितने लोग शामिल होने की उम्मीद है। कितने सिलेंडरों की जरूरत हैं। आवेदन के बाद विभाग की टीम जांच करेगी। जांच के बाद एक से दो दिन में आवेदक को मांग अनुसार सिलेंडर उपलब्ध करवा दिए जाएंगे।--
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