खुलासा:::कैग की रिपोर्ट के बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी

Feb 21, 2026 07:53 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, फरीदाबाद
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हरियाणा के सरकारी विभागों में वित्तीय अनियमितताओं की कैग की रिपोर्ट में 2022-23 के दौरान 529 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का खुलासा हुआ है। निगरानी की कमी और लापरवाही के कारण कई स्मार्ट सिटी परियोजनाएं समय पर शुरू नहीं हो पाईं। रिपोर्ट में कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

खुलासा:::कैग की रिपोर्ट के बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी

धनंजय चौहान, फरीदाबाद/चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की ताजा रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान लापरवाही, निगरानी की कमी और नियमों की अनदेखी के कारण सरकार को लगभग 529 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व नुकसान हुआ। शुक्रवार को यह रिपोर्ट विधानसभा के पटल पर रखी गई। कैग ने कहा कि यदि समय पर निगरानी और जवाबदेही तय की जाती तो इस नुकसान को रोका जा सकता था, जिसमें फरीदाबाद स्मार्ट सिटी की कई परियोजनाओं के समय पर शुरू न होने से बजट बढ़ने की बात सामने आई है।

हरियाणा का विधानसभा सत्र में शुक्रवार को कैग की रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट के मुताबिक 2,516 मामलों में करीब 260.24 करोड़ रुपये का कर कम वसूला गया। विभागों ने खुद भी 79.04 करोड़ रुपये की गड़बड़ी स्वीकार की है। बिक्री कर और वैट मामलों में बिना दस्तावेज जांचे रियायत देने से लगभग 1.97 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि 5.90 करोड़ रुपये की पेनाल्टी भी नहीं वसूली गई। वहीं स्टांप शुल्क मामलों में जमीन का गलत वर्गीकरण बड़ी वजह बना। 218 मामलों में रिहायशी और व्यावसायिक जमीन को कृषि भूमि दिखाकर कम शुल्क लिया गया, जिससे करीब 17.82 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। -- स्मार्ट सिटी परियोजनाओं पर उठे सवाल कैग रिपोर्ट में शहरी निकायों में निगरानी की कमी को गंभीर बताया गया है, जिसका असर फरीदाबाद की स्मार्ट सिटी परियोजनाओं पर भी पड़ा है। फरीदाबाद स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने स्मार्ट सिटी मिशन के तहत सेक्टर 19, 20, 20ए, 21बी और 21डी सहित 1,267 एकड़ क्षेत्र को एरिया-बेस्ड डेवलपमेंट (एबीडी) के रूप में विकसित करने की योजना बनाई थी। इस योजना का उद्देश्य क्षेत्र को समावेशी, टिकाऊ और आर्थिक रूप से विकसित शहरी मॉडल में बदलना था। स्मार्ट सिटी प्रस्ताव के तहत 2,601.01 करोड़ रुपये की लागत वाली 46 परियोजनाएं लागू की जानी थीं। इनमें 2,108 करोड़ रुपये की 37 परियोजनाएं एरिया-बेस्ड डेवलपमेंट क्षेत्र में और 469.47 करोड़ रुपये की नौ पैन-सिटी परियोजनाएं शामिल थीं। इन योजनाओं के लिए सरकारी अनुदान, पीपीपी मॉडल, भूमि मुद्रीकरण और ऋण के माध्यम से फंड जुटाने की व्यवस्था की गई थी। -- ये काम आज भी अधूरे इसके तहत सेक्टर में स्मार्ट सड़के, जिनमें वाईफाई, सीसीटीवी कैमरे, यात्रियों के आराम के लिए कुर्सियों आदि लगाई जानी थी। इसी प्रकार सेक्टर-21बी स्थित विवेकानंद पार्क और एक अन्य पार्क को स्मार्ट पार्क के रूप में विकसित करना था। समय पर काम शुरू न होने से यह पार्क आज भी बंजर हालत में है। वहीं ओल्ड फरीदाबाद स्थित बराही तालाब को विकसित करने की योजना तैयार की गई थी। लेकिन स्मार्ट सिटी की ओर से इसमें आधा-अधूरा काम करके छोड़ दिया गया। हालांकि, रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि कई परियोजनाओं में समयसीमा का पालन नहीं हुआ, लागत बढ़ी और निगरानी तंत्र कमजोर रहा। शहर में स्मार्ट रोड, सीवर नेटवर्क, इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर और ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़ी योजनाएं अब भी पूरी तरह लागू नहीं हो सकी हैं। -- सार्वजनिक उपक्रमों में भी ढिलाई रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि रजिस्ट्री अधिकारियों ने दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम को गलत तरीके से स्टांप शुल्क से छूट दे दी, जिससे 1.36 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। वहीं सार्वजनिक क्षेत्र की 11 कंपनियों को कुल 51 करोड़ रुपये से अधिक का घाटा हुआ। -- कार्रवाई की तैयारी सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार ने रिपोर्ट के आधार पर विभागों से जवाब तलब करना शुरू कर दिया है। जहां लापरवाही स्पष्ट पाई गई है, वहां जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। कैग ने सिफारिश की है कि डिजिटल निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही तंत्र मजबूत किया जाए, जिससे भविष्य में सरकारी खजाने को इस तरह के नुकसान से बचाया जा सके।

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