मुख्यमंत्री से मुलाकत होने तक सोहना आईएमटी में निर्माण कार्य बंद रहेगा
सोहना आईएमटी में गुरुवार को किसानों की न्याय महापंचायत हुई, जिसमें संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने भाग लिया। पंचायत में किसानों ने मुख्यमंत्री से मिलने की मांग की और आईएमटी में सभी निर्माण कार्य रोकने का निर्णय लिया। किसानों की 11 प्रमुख मांगें हैं, जिनमें मुआवजे का भुगतान और भूमि अधिकार शामिल हैं।
नूंह। सोहना आईएमटी में गुरुवार को किसानों की न्याय महापंचायत हुई, जिसमें संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने हिस्सा लिया। पंचायत सुबह दस बजे से शाम छह बजे तक आठ घंटे तक चली। इस दौरान जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ किसानों की तीन चरणों मे बैठक हुई। इसमें फैसला लिया गया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से किसानों की मुलाकात करवाई जाएगी और तब तक आईएमटी में सरकार का निर्माण कार्य बंद रहेगा। किसानों का धरना जारी रहेगा। किसान न्याय महापंचायत में काफी गहमागहमी रही। किसान और पुलिस शाम तक अपने-अपने मोर्चे पर डटे रहे। फैसला होने तक संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने पंचायत जारी रखने का दबाव बनाया, जिसका असर दिखाई दिया।
एक घंटे के अल्टीमेटम के बाद प्रशासन के अधिकारी पंचायत में किसानों से बात करने के लिए पहुंचे। किसान संयुक्त मोर्चा के किसान नेता राकेश टिकैत, डॉक्टर दर्शन पाल, सुरेश कोथ, रणबीर मलिक सहित विभिन्न किसान संगठनों से जोगिंदर नैन, मास्टर बलबीर, इंदरजीत, रत्नमान, दलजीत सिंह, अभिमन्यु कोहाड़, मास्टर कवरजीत, सुखविंद्र, केरल से पूर्व पी कृष्णा प्रसाद आदि मुख्य रूप से शामिल थे। 1600 एकड़ में विकसित हो रही आईएमटी गौरतलब है कि वर्ष 2010 में आईएमटी सोहना के लिए गांव खेड़ली कंकर, मेहरोला, बडेलाकी, कंवरसीका, रोजकामेव, धीरदोका, रूपाहेड़ी, खोड (बहादरी) और रेवासन के किसानों की 1600 एकड़ अधिग्रहण की जमीन की गई थी। अभी यहां 100 एकड़ से ज्यादा रकबे में बैटरी बनाने वाला उद्योग लग चुका है। इसमें बैटरी बनाने का काम शुरू हो गया है। हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एचएसआईआईडीसी) विकसित कर रही है। सड़क, सीवर, पानी आदि आधारभूत ढांचा तैयार किया जा रहा है। बहरहाल, एचएसआईआईडीसी का काम बाद रहेगा। किसानों की प्रमुख मांगें आईएमटी के किसानों ने 11 प्रमुख मांगें हैं। इनमें अधिग्रहण समझौते जे लिए किसानों से अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाने के लिए जो शपथ पत्र किया गया था उसको रद्द किया जाय, 25 लाख रुपये प्रति एकड़ लंबित मुआवजे का ब्याज सहित भुगतान, मुकदमों का रद्दीकरण और पुनर्वास के तहत मुफ्त आवासीय प्लॉट शामिल हैं। इसके अलावा कब्रिस्तान, श्मशान घाट, ईदगाह, खेल मैदान और तालाब जैसी सामुदायिक सुविधाओं की जमीन सुरक्षित करने की मांगे हैं। किसानों ने सोहना आईएमटी की सभी इकाइयों में 33 फीसदी रोजगार आरक्षण की गारंटी मांगी। साथ ही शिक्षा व स्वास्थ्य संस्थान, नर्सिंग कॉलेज और गरीब परिवारों के लिए 100 गज के मुफ्त प्लॉट देने की बात कही। राजनीतिक दलों के नेता भी पंचायत में पहुंचे आईएमटी सोहना में किसानों की मैराथन न्याय महापंचायत हुई। सुबह दस बजे पंचायत शुरू हुई और करीब शाम छह बजे तक चली। किसान नेताओं के साथ विधायक आफताब अहमद, इनेलो नेता ताहिर हुसैन सहित अनेक राजनीतिक दलों के नेता भी शाम तक किसानों के साथ बैठे रहे। खासबात यह रही कि भूखे प्यासे बच्चों के साथ महिला भी पंचायत में डटी रही। आफताब अहमद सहित नेताओं ने कहा कि जमीन अधिग्रहण के वक्त किसानों से लिए गए शपथपत्र को सरकार रद्द करे ताकि किसानों को उनकी जमीन का बकाया मुआवजा मिल सके। सात सदस्यों की कमेटी ने अधिकारियों से मुलाकात की पंचायत काफी गर्म माहौल में शुरू हुई। किसानों ने बातचीत के लिए पंचायत में एक घंटे में पहुंचने का अल्टीमेटम दिया, जिसके चलते तय समय में एसएचओ स्तर के पुलिस अधिकारी बातचीत के लिए पहुंचे। किसानों ने उपायुक्त, एसपी स्तर के अधिकारी को पंचायत में आने के लिए कहा, लेकिन बाद में जिले के आला अधिकारियों ने फिर एसडीएम को भेजा, लेकिन उनके साथ भी बातचीत बेनतीजा रही। पंचायत ने सात सदस्यों की एक कमेटी बनाकर उपायुक्त से बातचीत के लिए लघु सचिवालय भेजा गया। जब तक कमेटी के सदस्य नहीं आए, तब तक संयुक्त किसान मोर्चा के किसान नेता धरना स्थल पर ही बैठे रहे। सरकार पर मेवात के किसानों के साथ भेदभाव का आरोप किसान नेता राकेश टिकैत, धर्मपाल मलिक, सुरेश कोथ आदि ने हरियाणा सरकार पर मेवात के किसानों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया। नेताओं ने कहा कि देश मे अनेक जगह आईएमटी के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहण की गई है, लेकिन किसी जगह किसानों से अदालत में जाकर जमीन का मुआवजा नहीं मांगने के लिए शपथ पत्र नहीं लिया गया, लेकिन देश सबसे ज्यादा पिछड़े जिले नूंह (मेवात) के किसानों से शपथ पर लेकर उनके साथ अन्याय किया गया। नेता सुरेश ने कहा कि जमीन अधिग्रहण अधिनियम की धारा 18 में किसानों को बढा मुआवजा लेने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने का अधिकार दिया गया है, शपथ पत्र लेकर सरकार ने मेवात के किसानों के साथ नाइंसाफी की गई है। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार किसानों से लिए शपथ पत्र को रद्द किया जाय। किसानों की जमीन पूंजीपतियों को दे रही सरकार: टिकैत किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि भाजपा सरकार किसान विरोधी है, यह किसानों से जमीन लेकर पूंजीपतियों को दे रही है। टिकैत ने कहा कि सरकार देश में खेती को घाटे का सौदा होने का संदेश देना चाहती है। ताकि किसानों का खेती से मोह भंग हो जाय। सरकार की रणनीति किसानों से खेती छुड़वाने की है। ऐसा करके सरकार पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाना चाहती है। बीस महीने में पंद्रह पंचायत हुई आईएमटी सोहना के किसान अपनी मांगों को लेकर करीब बीस महीने से धरने पर बैठे हैं। इस दौरान किसान संघर्ष समिति ने करीब 15 पंचायत हुई, लेकिन सभी बेनतीजा रही। किसान संघर्ष समिति के सदस्य अब्बास, मोहम्मद एसपी, सिराजूदीन आदि का कहना है कि आईएमटी में अनेक बार काम रुकवाया गया है। पुलिस ने मुकदमा भी दर्ज किए गए। महिलाओं को भी इस दौरान जेल भेजा जा चुका है, लेकिन जिला प्रशासन के अधिकारियों के हर बार आश्वासन दिया, जो पूरा नहीं हुआ। किसान नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री से बातचीत करवाने का वायदा भी जिले के अधिकारी पूरा नहीं कर पाए। कोट-- किसानों की कमेटी के साथ बातचीत शांतिपूर्ण रही। किसानों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात करवाने की मांग की है। इसके लिए मुख्यमंत्री से बातचीत की जाएगी। अखिल पिलानी, उपायुक्त

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