एसटीपी के शोधित पानी से अरावली के तालाब भरे जाएंगे
फरीदाबाद में भूजल स्तर को सुधारने के लिए योजना बनाई गई है। एसटीपी के शोधित पानी को अरावली के तालाबों में छोड़ा जाएगा। इससे जल संकट से निपटने में मदद मिलेगी। बड़खल झील में प्रयोग सफल रहा है, जिससे भूजल स्तर में सुधार हुआ है। नई तकनीक से पानी को शोधित किया जाएगा।

फरीदाबाद, धनंजय चौहान। शहर में गिरते भूजल स्तर को सुधारने के लिए फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण और संचाई विभाग के साथ मिल कर योजना तैयार की है। योजना के तहत एसटीपी के शोधित पानी को अरावली के तालाबों में छोड़ा जाएगा है। इसे लेकर एक प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही योजना पर कार्य शुरू किया जाएगा। शहर और आसपास के अरावली क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों से जल संकट गहराता जा रहा है। बरसात कम होने, प्राकृतिक जल स्रोतों के खत्म होने और तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण अनेक तालाब पूरी तरह सूख चुके हैं। इसका असर भूजल स्तर पर भी साफ दिखाई दे रहा है, कई इलाकों में भूजल स्तर 300 से 400 फुट तक नीचे पहुंच गया था, जिससे लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा था। एफएमडीए अधिकारियों ने बताया कि
शहर के विभिन्न एसटीपी प्लांटों से पानी की निकासी
शहर के विभिन्न एसटीपी प्लांटों से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में शोधित पानी निकलता है। वर्तमान में इस पानी का सिंचाई और सड़कों पर पानी का छिड़काव में उपयोग हो रहा है। अब इसी पानी को पाइपलाइन के जरिए अरावली के सूखे तालाबों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। तालाबों में नियमित रूप से पानी पहुंचने से वहां जल संचयन बढ़ेगा और जमीन के भीतर पानी रिचार्ज होने लगेगा।
बड़खल झील में योजना के सकारात्मक परिणाम मिले
अधिकारियों ने बताया कि बड़खल झील में किए गए प्रयोग से योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। कुछ वर्ष पहले तक बड़खल क्षेत्र में भूजल स्तर 350 से 400 फुट तक पहुंच गया था, लेकिन शोधित पानी और जल संरक्षण उपायों के बाद अब कई क्षेत्रों में यह स्तर सुधरकर करीब 100 फुट तक आ गया है। इसी मॉडल को अब अरावली क्षेत्र के अन्य तालाबों पर लागू करने की तैयारी की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अरावली के तालाब केवल जल स्रोत ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संतुलन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। तालाबों में पानी रहने से हरियाली बढ़ेगी, वन्य जीवों को राहत मिलेगी और गर्मी के मौसम में तापमान नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। साथ ही, बारिश के पानी का संरक्षण बेहतर तरीके से हो सकेगा।
नई तकनीक से होगा पानी शोधन
एफएमडीए अरावली के तालाबों में छोड़े जाने वाले पानी को नई तकनीक से शोधित करेगा। पानी को कई स्तरों पर फिल्टर कर हानिकारक तत्वों और दुर्गंध को हटाया जाएगा। इससे तालाबों के आसपास रहने वाले जीव-जंतु, पक्षी और वनस्पतियां सुरक्षित रहेंगी और पर्यावरण संतुलन पर भी कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए योजनाएं
शहर में भूजल स्तर बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाओं पर काम शुरू करने की तैयारी है। सिंचाई विभाग के साथ मिलकर अरावली के खाली तलाबाें को भरने की योजना है। फिलहाल ये योजना सरकार के पास विचाराधीन है।
-विशाल बंसल, मुख्य अभियंता, एफएमडीए
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