शहर के पुराने नाले जीपीआर तकनीक से खोजे जाएंगे

Newswrap हिन्दुस्तान, फरीदाबाद
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फरीदाबाद में जलभराव रोकने के लिए प्रशासन ने जीपीआर तकनीक का उपयोग करने का निर्णय लिया है। अधिकारियों ने शहर के नालों और ड्रेनों की स्थिति का निरीक्षण किया और मानसून से पहले सफाई और मरम्मत का कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। अतिरिक्त पंप लगाने की योजना भी बनाई गई है, ताकि भारी बारिश में जल निकासी सुचारू हो सके।

शहर के पुराने नाले जीपीआर तकनीक से खोजे जाएंगे

फरीदाबाद, सरसमल। शहर के नाले जीपीआर (ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार) तकनीक से खोजे जाएंगे। मंगलवार को जलभराव रोकने के लिए प्रशासन ने ग्राउंड पर निरीक्षण कर नई रणनीति बनाई है। मानसून से पहले सीवर और ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। इसको लेकर उपायुक्त आयुष सिन्हा ने अधिकारियों के साथ दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे का दौरा किया। जहां उन्होंने स्पष्ट किया गया कि अब पारंपरिक तरीकों के बजाय आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाएगा। जीपीआर यानी ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार तकनीक की मदद से जमीन के नीचे 6-7 मीटर गहराई तक दबी पुरानी सीवर लाइनों और मैनहोल की सटीक लोकेशन पता की जाएगी।

कई स्थानों पर यह समस्या सामने आई थी कि पुरानी लाइनें नक्शों में तो दर्ज हैं, लेकिन जमीन पर उनका पता नहीं चल पा रहा है। ऐसे में सफाई और मरम्मत का काम अटक जाता है। अब इस तकनीक से पहले लोकेशन चिन्हित की जाएगी, फिर उनकी सफाई और मरम्मत कराई जाएगी। इससे समय की बचत होगी और जल निकासी व्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। जल निकासी के लिए पंपिंग क्षमता बढ़ाने पर जोर निरीक्षण में यह भी सामने आया कि कई इलाकों में पानी का बहाव प्राकृतिक ढलान से नहीं हो पाता। ऐसे स्थानों पर अतिरिक्त पंप लगाने की योजना बनाई गई है। पहले से लगे पंपों के साथ अब अधिक क्षमता वाले पंप जोड़े जाएंगे, ताकि भारी बारिश के दौरान भी पानी जमा न हो। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जल निकासी के लिए केवल एक पंप पर निर्भर न रहें, बल्कि अलग-अलग निकासी बिंदु तैयार किए जाएं। साथ ही पंपिंग स्टेशनों की क्षमता का वैज्ञानिक तरीके से आकलन कर उसे बढ़ाने को कहा गया है। इससे शहर के संवेदनशील क्षेत्रों में जलभराव की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा। नालों और ड्रेनों की सफाई पर विशेष ध्यान शहर के विभिन्न इलाकों में नालों और ड्रेनों की स्थिति का भी बारीकी से निरीक्षण किया गया। कई जगह गंदगी और रुकावट के कारण पानी का प्रवाह बाधित पाया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि मानसून से पहले सभी नालों की सफाई का कार्य पूरा किया जाए। खुले मैनहोल और ड्रेनेज पॉइंट्स पर जालियां लगाने को भी कहा गया, ताकि कचरा अंदर न जाए। इसके अलावा जहां जरूरत हो, वहां नए निकासी मार्ग बनाए जाएं। इस काम में नगर निगम, लोक निर्माण विभाग और अन्य एजेंसियों को आपसी तालमेल के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं। सीवर और वर्षा जल को अलग रखने की योजना निरीक्षण के दौरान यह भी तय किया गया कि सीवर और वर्षा जल की लाइनों को अलग-अलग रखा जाए। कई स्थानों पर दोनों के मिल जाने से सिस्टम पर दबाव बढ़ जाता है और जलभराव की समस्या गंभीर हो जाती है। इसलिए इंटरनल गलियों की सीवर लाइनों को मुख्य ट्रंक लाइन से इस तरह जोड़ा जाएगा कि बारिश का पानी और गंदा पानी अलग-अलग निकले। साथ ही नए कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि मानसून से पहले सभी जरूरी कार्य पूरे कर शहर को जलभराव से राहत दिलाई जाए।

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