
कूड़े के ढेर उठाने की जगह जला रहे
फरीदाबाद में कूड़ा निस्तारण के लिए प्लांट न बनने के कारण कूड़े की समस्या बढ़ रही है। शहर में हर रोज 1,050 टन कूड़ा निकलता है, लेकिन निस्तारण की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है। इसके चलते लोग सड़क किनारे कूड़ा फेंक रहे हैं और आग लगाने की घटनाएं भी हो रही हैं।
फरीदाबाद, वरिष्ठ संवाददाता। शहर मेंकूड़ा निस्तारण के लिए प्लांट न बनने के कारण कूड़े की समस्या का निदान नहीं हो रहा है। कूड़े के ढेर न उठने पर लोगों द्वारा कूडे़ के ढेरों मेंआग लगाई जा रही है। इससे प्रदूषण भी बढ़ रहा है। शहर में हर रोज करीब 1,050 टन कूड़ा निकलता है। इसमें करीब 300 टन बल्लभगढ़, करीब 350 टन ओल्ड फरीदाबाद और करीब 400 टन एनआईटी इलाके से निकलता है। इस कूड़े को इकट्ठा करने के लिए बीपीटीपी, एतमादपुर, मुजेड़ी, सेक्टर-37, सेक्टर-21ए और डबुआ सब्जी मंडी के पास कूड़ा स्थानांतरण केंद्र बनाए हुए हैं। जबकि कूड़ा निस्तारण के लिए अभी शहर में पुख्ता व्यवस्था नहीं है।
इस वजह से कूड़े का काफी बड़ा हिस्सा गुरुग्राम के बंधवाड़ी कूड़ा प्लांट जा रहा है। जबकि कुछ हिस्सा प्रतापगढ़ और मुजेड़ी स्थित कूड़ा प्लांट जा रहा है। इस वजह से बंधवाड़ी कूड़ा प्लांट से कूड़े का पहाड़ खत्म नहीं हो रहा है। शहर में बड़े कूड़े प्लांट न बन पाने के कारण कूड़ा उठान की समस्या भी पैदा हो जाती है।इस वजह से सड़क किनारे कूड़ा पड़ा रहता है। कई बार अज्ञात लोग इन कूड़े के ढेरों में आग भी लगादेते हैं। रविवार को भी चंदावली पुल के पास अज्ञात लोगों ने आगरा नहर किनारे पड़े कूड़े के ढेर में आग लगाई हुई थी। इसी तरह बल्लभगढ़ की पंजाबी धर्मशाला के पास भी कूड़े का ढेर लगा हुआ था। शहर में समय पर कूड़ा न उठने से सफाई व्यवस्था चरमरा जाती है। कूड़ा निस्तारण प्लांट के लिए नहीं मिल रही जगह नगर निगम प्रशासन ने गत वर्ष एनटीपीसी के सहयोग से हर रोज 500 टन कूड़े के निस्तारण के लिए मोठूका गांव में चारकोल प्लांट लगाने की योजना तैयार की थी। तभी से ही ग्रामीण इस प्लांट का विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों के विरोध के बाद दो जनवरी को खाद्य एवं आपूर्ति राज्यमंत्री राजेश नागर ने इस प्लांट को रदद करने की घोषणा कर दी थी। इसके बाद नगर निगम को मोठूका में जमीन आवंटित कर दी गई। इस पर ग्रामीणों के विरोध थमने के बजाय बढ़ता चला गया। ग्रामीणों के विरोध के बीच नगर निगम प्रशासन और भी जगह तलाश कर रहा है, लेकिन अभी जमीन नहीं मिल सकी है। मिर्जापुर और नीमका गांव में भी प्लांट लगाने की योजना तैयार की गई, लेकिन यहां भी लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। निगम अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीणों को एक ही डर है कि यहां पर कूड़ा का पहाड़ खड़ा हो जाएगा, लेकिन इस प्लांट का मॉडल इस तरह का है कि इससे कूड़े का पहाड़ खड़ा नहीं हो सकेगा। योजनाएं कई बनीं पर सिरे नहीं चढ़ रहीं: कूड़ा निस्तारण के बड़े प्लांट के विरोध को देखते हुए निगम प्रशासन कूड़ा निस्तारण के लिए प्रत्येक वार्ड के कूड़े को उसी वार्ड में निस्तारण करने की संभावना पर भी विचार किया था। फिर भी कोई भी योजना सिरे नहीं चढ़ सकी है। नगर निगम प्रशासन ने सोतई गांव की जमीन में भी प्लांट लगाने की संभावनाएं तलाशनी शुरू की थीं। नगर निगम सदन की बैठक के लिए भीयह प्रस्ताव तैयार किया गया था, लेकिन सदन की बैठक ही नहीं हो सकी। इस वजह से यह प्रस्ताव भी सिरे नहीं चढ़ सका है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में निगम प्रशासन की कूड़ा निस्तारण की कवायद का सकारात्मक परिणाम निकल सकेगा। नहर किनारे ठिकाने लगाया जा रहा कूड़ा नहर किनारे लोग अपने कूड़े को ठिकाने लगा रहे हैं। इससे यहां गंदगी बढ़ रही है। कुछ फैक्टरियों के मालिक भी अपने कूड़े को यहां डाल रहे हैं। इसके बाद इसमें आग लगा दी जाती है। यहां पर यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है। फिर भी कोई समाधान नहीं निकल रहा है। आगरा नहर किनारे पूरे रोड पर यह समस्या बनी हुई है। नगर निगम प्रशासन यहां अपनी निगरानी नहीं बढ़ा सका है। निगम प्रशासन हर रोज कूड़ा उठवा रहा है। कुछ लोग निगम की गाड़ियों को कूड़ा न देकर खुले में कूड़ा डाल देते हैं। इससे कूड़े की समस्या पैदा हो रही है। - विशन सिंह तेवतिया, निरीक्षक, नगर निगम

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