Faridabad News: वायु प्रदूषण रोकने के लिए निर्माण स्थलों की निगरानी होगी
Faridabad News: फरीदाबाद, संवाददाता। फरीदाबाद में सर्दियों में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए

Faridabad News: फरीदाबाद, धनंजय। फरीदाबाद में सर्दियों में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निर्माण स्थलों पर निगरानी सख्त की जाएगी। 500 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट में मकान समेत अन्य निर्माण और ध्वस्तीकरण की जानकारी ऑनलाइन देनी होगी। निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के इंतजाम भी अनिवार्य होंगे। हरियाणा सरकार ने यह कदम उठाया है। 500 वर्ग मीटर से बड़े निर्माण की ऑनलाइन निगरानी
धूल प्रदूषण नियंत्रण के लिए स्व-मूल्यांकन वेब पोर्टल
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने धूल प्रदूषण नियंत्रण के लिए स्व-मूल्यांकन वेब पोर्टल तैयार किया है। 500 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट में चलने वाले सभी निर्माण और ध्वस्तीकरण परियोजनाओं का इस पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य होगा। मकान निर्माण करने वाले व्यक्ति या परियोजना प्रबंधक को भी निर्माण स्थल और काम से जुड़ी पूरी जानकारी ऑनलाइन देनी होगी।
निर्माण कार्य की जानकारी
निर्माण कार्य पूरा होने और स्थल का पूरा विवरण भी पोर्टल पर दर्ज करना होगा। स्व-मूल्यांकन पत्रक और लेखा परीक्षा रिपोर्ट हर पखवाड़े पोर्टल पर जमा करनी होगी। इससे विभाग को निर्माण स्थलों पर प्रदूषण रोकने के इंतजामों की ऑनलाइन जानकारी मिल सकेगी। नियमों की अनदेखी मिलने पर कार्रवाई का आधार भी तैयार होगा।
निर्माण स्थल पर पानी का छिड़काव
धूल रोकने के लिए पानी का छिड़काव जरूरी
निर्माण स्थल पर लगातार पानी का छिड़काव करना होगा। निर्माण सामग्री और मलबे को ढककर रखना होगा, ताकि हवा चलने पर धूल आसपास न फैले। सामग्री लाने-ले जाने के दौरान भी धूल रोकने के इंतजाम करने होंगे। सड़कों पर जमा मिट्टी और निर्माण सामग्री को हटाकर रास्तों को साफ रखना होगा।
अवैध कॉलोनियों में निगरानी
फरीदाबाद की अवैध कॉलोनियों में लगातार निर्माण होने से वहां धूल प्रदूषण रोकना चुनौती बना हुआ है। सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने पर सरकार चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्ययोजना लागू करती है, लेकिन निर्माण स्थलों और वाहनों से निकलने वाला धुआं परेशानी बढ़ाता है। ऐसे में निर्माण शुरू होने के समय से ही निगरानी रखने और नियमों का पालन नहीं करने वालों पर समय रहते कार्रवाई की जरूरत है। इससे प्रदूषण बढ़ने के बाद आपात उपाय करने के बजाय पहले ही धूल पर नियंत्रण किया जा सकेगा।


