Faridabad News: शिक्षा और मेडिकल टूरिज्म से शहर को आर्थिक मजबूती मिल रही
Faridabad News: फरीदाबाद में शिक्षा और मेडिकल टूरिज्म अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं। छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए और मरीज उपचार के लिए आ रहे हैं। यह क्षेत्र 100 करोड़ की आर्थिक गतिविधियाँ पैदा कर रहा है। पीजी, होटल, परिवहन, और भोजन के व्यवसाय को इस से लाभ हो रहा है।

Faridabad News: फरीदाबाद, अभिषेक शर्मा। औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में शिक्षा और मेडिकल टूरिज्म अब अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाले प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हो गए हैं। शहर में देश के अलग-अलग राज्यों से छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा के लिए पहुंच रहे हैं, वहीं कॉरपोरेट अस्पतालों में उपचार कराने के लिए दूसरे राज्यों के साथ विदेशों से भी मरीज आ रहे हैं। इसके अलावा जिले के कई उच्च शिक्षण संस्थानों में विदेशी छात्र भी पढ़ाई के लिए पहुंचते हैं। इससे शहर में हर साल करीब 100 करोड़ रुपये की आर्थिक गतिविधियां होने का अनुमान है। इसका सीधा लाभ रियल एस्टेट, पीजी, होटल, परिवहन, भोजन, किराना और अन्य स्थानीय कारोबार को मिल रहा है। बता दें कि शहर में करीब 10 कॉरपोरेट अस्पतालों के साथ तकनीकी शिक्षण संस्थान और मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। गांव धौज, एनआईटी-3 और छांयसा क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज होने के कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थी यहां पहुंचते हैं। इनमें कई छात्र हॉस्टल के बजाय आसपास के क्षेत्रों में पीजी में रहना पसंद करते हैं। इससे किराये के मकानों और पीजी कारोबार को लगातार बढ़ावा मिल रहा है।
पीजी से लेकर भोजन और परिवहन तक बढ़ रहा कारोबार
मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या बढ़ने के साथ ही शहर में पीजी की मांग भी बढ़ी है। छात्रों से सामान्य तौर पर 13 से 15 हजार रुपये मासिक किराया लिया जाता है। इसमें दो समय का भोजन और कपड़े धुलाई भी शामिल है। इसके अलावा कई पीजी में केवल रहने की सुविधा उपलब्ध होती है, जबकि भोजन के लिए छात्रों को आसपास की मेस, ढाबों और राशन की दुकानों पर निर्भर रहना पड़ता है। भोजन पर एक छात्र का करीब चार से पांच हजार रुपये मासिक खर्च हो जाता है। वहीं कपड़े भी खुद धोने पड़ते हैं। इसके अलावा कॉलेज आने-जाने के लिए छात्र सार्वजनिक परिवहन और अन्य साधनों का इस्तेमाल करते हैं। इस पर भी हर महीने करीब चार से पांच हजार रुपये तक खर्च होने का अनुमान है। इस तरह एक छात्र के शहर में रहने के दौरान किराये, भोजन और परिवहन पर होने वाला खर्च स्थानीय अर्थव्यवस्था में लगातार पैसा पहुंचाता है।
होटल इंडस्ट्री को भी पहुंचता है लाभ
स्मार्ट सिटी के सभी 10 काॅरपोरेट अस्पतालों में श्रीलंका, बांग्लादेश के अलावा गल्फ देशों से मरीज उपचार के लिए आते हैं। मरीज के साथ आने वाले तीमारदारों को होटल में ठहराया जाता है। एक अस्पताल संचालक ने बताया कि फरीदाबाद में महीने में 200 से अधिक मरीज विभिन्न देशों से आते हैं। इसमें एक तीमारदार को कम से कम एक दिन का ढाई से तीन हजार रुपये खर्च करना पड़ता है। बता दें कि मरीज के यहां आने से पूर्व उनके इलाज के पैकेज में होटल का खर्च भी शामिल होता है। इसके अलावा कुछ मरीज केवल इलाज का ही पैकेज चुनते हैं, जबकि अस्पताल के आसपास घरों में पीजी में किराये पर रहते हैं। वहीं आगरा, मथुरा, अलीगढ़, राजस्थान के कुछ हिस्सों से मरीज उपचार के लिए आते हैं। इनके तीमारदारों को पीजी रेंट लेना पड़ता है।
पॉश सेक्टर से ग्रामीण क्षेत्रों तक फैला पीजी कारोबार
पीजी की बढ़ती मांग का असर केवल प्रमुख सेक्टरों तक सीमित नहीं है। शहर के पॉश सेक्टरों, एनआईटी, बल्लभगढ़ के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी पीजी की सुविधा उपलब्ध होने लगी है। मकान मालिकों और रियल एस्टेट कारोबारियों के लिए यह आय का नया जरिया बन गया है। कई इलाकों में मकानों को पीजी के रूप में संचालित किया जा रहा है, जिससे किराये के कारोबार को बढ़ावा मिला है।
बाहरी राज्यों से आने वाले कर्मचारी भी बढ़ा रहे मांग
फरीदाबाद एक प्रमुख औद्योगिक नगरी होने के कारण दूसरे राज्यों से बड़ी संख्या में नौकरीपेशा लोग भी यहां आते हैं। इनमें से कई कर्मचारी पीजी या किराये के मकानों में रहते हैं। रहने और खाने पर उनका मासिक खर्च करीब 14 से 15 हजार रुपये तक पहुंच जाता है। इसके अलावा स्थानीय परिवहन, खरीदारी और अन्य दैनिक जरूरतों पर होने वाला खर्च अलग है। इससे शहर के बाजारों और सेवा क्षेत्र को लगातार ग्राहक मिल रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए बाहर से आने वाली आबादी के कारण फरीदाबाद में आवास, भोजन, परिवहन और अन्य सेवाओं की मांग बढ़ रही है। इससे औद्योगिक गतिविधियों के साथ शिक्षा और मेडिकल टूरिज्म भी शहर की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण सहायक क्षेत्र बनते जा रहे हैं।


