शस्त्र लाइसेंस के नाम पर फर्जीवाड़ा
तिगांव क्षेत्र में फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनवाने और महंगे हथियार दिलाने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता मनीष डागर ने आरोप लगाया कि आरोपी ओमबीर ने उन्हें फर्जी लाइसेंस देकर हथियार उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जिसमें बड़े नेटवर्क की संभावना जताई जा रही है।

बल्लभगढ़,अशोक जैन। तिगांव क्षेत्र में फर्जी तरीके से शस्त्र लाइसेंस बनवाने और महंगे हथियार दिलाने के नाम पर लाखों रुपये का फर्जीवाड़ा करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस को आशंका है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे फर्जी लाइसेंस तैयार करने वाला बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। शिकायतकर्ता मनीष डागर ने पुलिस को बताया कि उसका छोटा भाई कुलवंत डागर वर्ष 2015 से भारतीय सेना में कार्यरत है और वर्तमान में उसकी तैनाती पठानकोट, पंजाब में है। शिकायत के अनुसार उनके रिश्तेदार नवीन डागर के माध्यम से संपर्क ओमबीर निवासी फतेहपुर बिल्लौच से हुआ था। ओमबीर ने खुद को सेना से जुड़ा व्यक्ति बताते हुए भरोसा दिलाया कि वह अपने संपर्कों के माध्यम से आसानी से शस्त्र लाइसेंस बनवा सकता है। आरोपी ने दावा किया कि पंजाब से वैध लाइसेंस तैयार कराकर हथियार भी उपलब्ध करा देगा। भरोसे में आकर कुलवंत डागर ने आरोपी से बातचीत शुरू की और बाद में रकम ट्रांसफर की गई।
शिकायतकर्ता के अनुसार लाइसेंस बनवाने की एवज में आरोपी ओमबीर ने मोटी रकम की मांग की थी।
इसके बाद कुलवंत डागर ने आरोपी के खाते में ऑनलाइन भुगतान किया। शिकायत में बताया गया कि 4 नवंबर 2025 को पहली किश्त के रूप में 50 हजार रुपये भेजे गए, जबकि 3 मार्च 2026 को दूसरी किश्त के रूप में 45 हजार रुपये फोन-पे के माध्यम से ट्रांसफर किए गए।
आरोप है कि रकम लेने के बाद ओमबीर ने कुलवंत के दस्तावेज जुटाकर पंजाब से शस्त्र लाइसेंस बनवाया।
इसके बाद हथियार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि बाद में उन्हें जानकारी मिली कि पूरा लाइसेंस संदिग्ध और फर्जी तरीके से तैयार कराया गया था। आरोपियों ने भरोसा जीतने के लिए लाइसेंस और हथियार दोनों को पूरी तरह वैध बताया, लेकिन बाद में पूरे मामले पर संदेह गहराता चला गया।
जाब से ही पिस्तौल खरीदने का दबाव बनाया
शिकायतकर्ता मनीष डागर ने पुलिस को बताया कि आरोपी ओमबीर ने लाइसेंस बनने के बाद यह शर्त रखी थी कि हथियार भी उसी के बताए गए डीलर से खरीदना होगा। आरोप है कि ओमबीर ने न्यू पंजाब गन हाउस, फाजिल्का पंजाब से ही पिस्तौल खरीदने का दबाव बनाया। शिकायत में कहा गया है कि राजेश कुमार निवासी न्यू तहसील कॉम्प्लेक्स, फाजिल्का पंजाब के माध्यम से करीब 3 लाख 55 हजार रुपये की वेबली .30 बोर पिस्तौल दिलवाई गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ओमबीर और राजेश ने मिलकर पूरे खेल को अंजाम दिया और फर्जी तरीके से लाइसेंस तैयार कराकर हथियार उपलब्ध कराए। मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता की भी आशंका जताई गई है। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि आरोपियों के पास पहले से तैयार नेटवर्क था, जिसके जरिए लोगों को सेना और लाइसेंस प्रक्रिया का भरोसा दिलाकर मोटी रकम वसूली जा रही थी।
पचास से अधिक लोगों से रकम लेने का आरोप
शिकायतकर्ता ने पुलिस को दी शिकायत में दावा किया है कि आरोपियों ने इसी प्रकार पांच से छह अन्य व्यक्तियों के भी पंजाब से शस्त्र लाइसेंस बनवाकर हथियार उपलब्ध कराए हैं। इसके अलावा करीब 54 अन्य लोगों से भी लाइसेंस बनवाने के नाम पर रकम लेने की बात सामने आई है। ऐसे में पुलिस को आशंका है कि यह संगठित स्तर पर चल रहा फर्जी लाइसेंस और हथियार उपलब्ध कराने का बड़ा नेटवर्क हो सकता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए तिगांव थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब बैंक खातों, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन, लाइसेंस दस्तावेजों और हथियार खरीद प्रक्रिया की जांच कर रही है।
पुलिस प्रवक्ता यशपाल ने बताया कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पूरे नेटवर्क की गहनता से जांच की जा रही है और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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