दुर्लभ बीमारी से पीड़ित मासूम का सफल इलाज
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ने पहली बार विस्कॉट-ऑल्ड्रिच सिंड्रोम से पीड़ित तीन साल के बच्चे का सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया है। इस जटिल ऑपरेशन में डॉक्टरों ने विशेष मशीन से स्टेम सेल निकाले और बच्चे को आवश्यक उपचार दिया। बच्चे की स्थिति अब बेहतर हो रही है, और यह उपलब्धि शहर में चिकित्सा सेवाओं को नई पहचान देगी।

फरीदाबाद,धनंजय चौहान। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के डॉक्टरों ने पहली बार दुर्लभ बीमारी विस्कॉट-ऑल्ड्रिच सिंड्रोम से पीड़ित तीन साल के बच्चे का सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया है। यह उपलब्धि ईएसआईसी स्वास्थ्य प्रणाली में बच्चों की जटिल और दुर्लभ बीमारियों के इलाज की अहम कदम मानी जा रही है। इस जटिल ऑपरेशन को डॉ. सिल्की जैन, ब्रिगेडियर डॉ. तथागत चटर्जी, डॉ. सरोज राजपूत और बाल रोग विभाग की टीम की अहम भूमिका रही। डॉ. सिल्की जैन, ब्रिगेडियर डॉ. तथागत चटर्जी ने बताया कि विस्कॉट-ऑल्ड्रिच सिंड्रोम एक बेहद दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है, जो मुख्य रूप से छोटे बच्चों में पाई जाती है।
इस बीमारी में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर हो जाती है। मरीज को बार-बार संक्रमण होना, त्वचा पर चकत्ते पड़ना, प्लेटलेट्स की संख्या कम होना और शरीर से खून बहने जैसी गंभीर समस्याएं होने लगती हैं। कई मामलों में यह बीमारी आगे चलकर कैंसर और ऑटोइम्यून बीमारियों का कारण भी बन सकती है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी का स्थायी इलाज केवल बोन मैरो ट्रांसप्लांट ही माना जाता है। इसलिए परिवार की सहमति पर बच्चे के लिए उसके ही पूरी तरह मैच करने वाले भाई-बहन को डोनर बनाया गया। विशेष एफेरेसिस मशीन की मदद से डोनर के शरीर से स्टेम सेल सुरक्षित तरीके से निकाले गए। इसके बाद बच्चे को जरूरी उपचार और कंडीशनिंग प्रक्रिया देने के बाद ये स्टेम सेल उसके शरीर में डाले गए। इलाज के दौरान ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की भी अहम भूमिका रही। बच्चे को सुरक्षित और विशेष तरीके से तैयार किए गए रक्त व प्लेटलेट्स दिए गए ताकि संक्रमण और दूसरी जटिलताओं का खतरा कम किया जा सके। डॉक्टरों की निगरानी में पूरा ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक पूरा हुआ। अस्पताल के अनुसार अब बच्चे के शरीर में नई स्वस्थ रक्त कोशिकाएं बननी शुरू हो गई हैं, जिसे सफल एंग्राफ्टमेंट माना जाता है। बच्चे की हालत लगातार बेहतर हो रही है और वह डॉक्टरों की निगरानी में स्वस्थ हो रहा है। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. चव्हाण कालिदास दत्तात्रेय ने कहा कि ईएसआईसी अस्पताल अब अत्याधुनिक और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।उन्होंने कहा कि इस तरह की अत्याधुनिक ट्रांसप्लांट सुविधा उपलब्ध होने से ईएसआईसी बीमित कर्मचारियों और आम मरीजों को बड़े निजी अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। यह उपलब्धि शहर में चिकित्सा सुविधाओं को नई पहचान देने वाली साबित होगी।
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