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10 जुलाई, 2020|11:45|IST

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काली पट्टी बांधकर पढ़ी ईद की नमाज

जुनैद हत्याकांड के चलते जिलेभर में ईद-उल-फितर का त्योहार सोमवार को सादगी से मनाया गया। रोजेदारों ने मस्जिद और ईदगाहों में ईद की नमाज पढ़ी और देश में सुख-शांति के लिए एक साथ दुआ की। जुनैद के गांव खंदावली में लोगों ने काली पट्टी बांधकर नमाज पढ़ी। मस्जिदों में ईद की नमाज में अमन की दुआ के लिए हजारों हाथ उठे। रेल हत्याकांड में मारे गए गांव खंदावली के हाफिज जुनैद की मौत के गम में लोगों ने काली पट्टी बांधकर ईद की नमाज अदा की। इसके बाद गांव में ईद नहीं मनाए जाने का ऐलान किया गया। ईदगाह में नमाज अदा करने के बाद सभी लोग सदमे के माहौल में वापस घर चले गए। लोगों का कहना है कि ईद की नमाज पढ़ना जरूरी है, लेकिन उस वक्त इसके बाद की ख़ुशी के कोई मायने नहीं रह जाते हैं, जब एक बच्चा और ऊपर से हाफिज की दर्दनाक हत्या कर दी जाती है। इस घटना से सभी लोग अभी सदमे में हैं। पीड़ित परिवार के सदस्यों ने भी नमाज अदा की। ईद की नमाज में दिया जुनैद को शहीद का दर्जा नमाज पढ़ाने के बाद मांगी गई दुआ में इमाम ने जुनैद को शहीद का दर्जा दिया। उन्होंने जुनैद को जन्नत में अव्वल मुकाम देने की खुदा से दुआ की। उन्होंने कहा कि जिस तरह हाफिज जुनैद की मजहब की पहचान पर हत्या हुई है, इससे उसने खुदा की नजरों में शहीद का दर्जा हासिल किया है। सरकार के खिलाफ बढ़ रहा गुस्सा हाफिज जुनैदकी हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने की वजह से इलाके में सरकार के खिलाफ गुस्सा बढ़ता जा रहा है। गांव के शाकिर का कहना है कि यह एक बहुत ही दर्दनाक हादसा है। धर्म की पहचान के नाम पर हुए हाफिज जुनैद की हत्या एक विचाधारा की हत्या है, जो भारत जैसे देश में बेहद चिंता की बात है। जुनैद के पिता जलालुद्दीन का कहना है कि सरकार की तरफ से आर्थिक मदद मिल रही है, लेकिन असल दुख इस बात का है कि पुलिस अभी तक हत्यारों को नहीं पकड पाई है। ईद की नमाज के वक्त पुलिस रही तैनात गांव खंदावली में किसी प्रकार की कोई वारदात न हो, इसको लेकर ईद की नमाज के वक्त गांव में पुलिस तैनात रही। पुलिस की एक जिप्सी गांव में गश्त करती नजर आई। बच्चों के लिए ईद पर नहीं लगे झूले वैसे तो जिले में ईद का पर्व सादगी से ही मनाया गया। लेकिन गांवों में ईद पर हर साल लगने वाला मेला इस बार नहीं लगा। जिसकी वजह से बच्चे झूला नहीं झूल पाए। खिलोनों की दुकान भी नहीं सजी। ईद के बहाने बाहर से आकर झूले, खिलौने के रूप में बिक्री करने रोजी रोटी कमाने वाले दुकानदारों ने भी इस बार दुकान नहीं लगाने का फैसला किया। मस्जिदों से दिया गया भाईचारे का संदेश जिले भर में ईद का त्योहार सादगी से मनाया गया। भाईचारा और धार्मिक सद्भावना का संदेश देते हुए लोगों ने एक दूसरे को गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी। एक महीने तक रोजे रखकर सोमवार को लोगों ने मस्जिद और ईदगाह में ईद-उल-फितर की विशेष नमाज अदा की। सुबह स्नान करने के बाद नए कपड़े कुर्ता-पायजामा-टोपी पहनकर और इत्र लागकर मस्जि़द और ईदगाह पहुंचे। मस्जिदों से मौलानाओं ने ईद की विशेष नमाज अदा करवाई। जिले की मस्जिद और ईदगाहों में नमाज का समय अलग-अलग तय किया गया था। कई इलाकों में मस्जिद व ईदगाह में भीड़ अधिक होने के चलते मस्जिद के बाहर सड़क पर भी विशेष नमाज अदा की। इसके चलते यातायात पुलिस को यातयात दूसरे मार्गों से व्यवस्थित करना पड़ा। नमाज के बाद एक दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी। लोगों ने मीठी सेवईं खाई, गले मिले और ईद की मुबारकबाद दी। बच्चों में ईदी लेने की धूम रही। मौलाना जमालुद्दीन ने कहा कि ईद के त्योहार पर कुरीतियों को समाप्त करने और शिक्षित होने का संकल्प लेना चाहिए। साथ ही सभी को अमन-चैन और भाईचारा मजबूत करने के लिए काम करना चाहिए।

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  • Web Title:Due to the Junaid massacre, the festival of Eid-ul-Fitr was celebrated with simplicity on Monday throughout the district.