DA Image
हिंदी न्यूज़ › NCR › फरीदाबाद › सर्द रातों में जमीन पर सो रहे दिव्यांग मस्ताना
फरीदाबाद

सर्द रातों में जमीन पर सो रहे दिव्यांग मस्ताना

हिन्दुस्तान टीम,फरीदाबादPublished By: Newswrap
Mon, 25 Jan 2021 11:40 PM
सर्द रातों में जमीन पर सो रहे दिव्यांग मस्ताना

हक की लड़ाई के लिए हौसलों का बुलंद होना जरूरी है। मायने नहीं रखता कि सामने वाला कितना ताकतवर है। दोनों पैरों से अक्षम दिव्यांग बुजुर्ग किसान राधेश्याम मस्ताना ऐसी ही पक्तियों के साथ अटोंहा में किसान के आंदोलन को मजबूत कर रहे हैं। मस्ताना की यह हिम्मत अन्य किसानों का भी हौसला बढ़ा रही है। सुबह से शाम तक धरन की व्यवस्था का हिस्सा रहने वाले मस्ताना तीन दिसंबर से ही यहां अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं। जिसको लेकर हर कोई उनकी तारीफ कर रहा है।

जमीन पर सोते हैं मस्ताना

दोनो पैरों से दिव्यांग राधे श्याम मस्ताना सर्द रातों में जमीन पर सो रहे हैं। ट्रैक्टर ट्राली में चढ़ने में असमर्थ मस्ताना खेती कानूनी को रद्द करवाने तक धरना स्थल पर ही रहने संकल्प लेकर घर से आए हैं। 62 वर्ष के मस्ताना का कहना है कि उनके पास पांच एकड़ जमीन है, जो उसके परिवार की रोजी रोटी का माध्यम है। उनको आशंका है कि खेती कानून लागू होने से उनके परिवार के सामने रोजगार के साधन खत्म हो जाएंगे, इससे ना केवल उनके परिवार के सामने परेशानी आ जाएगी बल्कि आने वाली पीढ़ी को भी संघर्ष करना पड़ेगा।

अपने दो पहिया वाहन से पहुंचे अंटोहा

एक हादसे में दोनों पैरों से लाचार हुए मस्ताना ने दूसरों पर निर्भरता का रास्ता नही अपनाया। खुद को मजबूत रखने के लिए मस्ताना ने अपने वाहन को तैयार किया। जिसके जरिए वो आवाजाही करते है। इतना ही नही उन्होंने ट्रेक्टरों को ठीक करने के लिए एक वर्कशॉप भी खोली हुई है। ताकि रोजी रोटी के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहना ना पड़े।

काम छोड़कर धरने पर डटे

मस्ताना का कहना है कि जब से किसान आंदोलन शुरू हुआ है तभी से उन्होंने इस आंदोलन का हिस्सा बनने का फैसला लिया और कानून होने तक आंदोलन करने का संकल्प लिया है। उनका मानना है कि यह लड़ाई केवल उनकी अपनी नही है और ना ही सिर्फ किसानों तक सीमित है बल्कि हर भरतीय के लिए वह लड़ाई लड़ रहे है। उनका कहना है कि खेती में कॉरपोरेट के दाखिल होने के बाद निजी स्कूल, निजी अस्पताल की तरह खाद्य पदार्थ भी लोगों को महंगी दरों पर खरीदने पड़ेंगे। इससे हर भारतीय के सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो जाएगी। लोगों की कमाई का एक बड़ा हिस्सा रोजी जुटाने पर खर्च करना पड़ेगा।

पांच एकड़ जमीन के मालिक है मस्ताना

मस्ताना का कहना है कि कानपुर के रसूलाबाद

में उनके पास पांच एकड़ जमीन है। जिसमें वह अपनी मर्जी से फसल की बुआई करते है। इनमें मुख्य रूप से आलू, पेठा की खेती है। जिसको बेचकर वो अपने परिवार का गुजारा करते है। मस्ताना का मानना है कि नए कानून लागू होने से उनकी फसल बोन की आजदी खत्म हो जाएगी। जिसका सीधा असर उनकेपरिवार की अर्थ व्यवस्था पर पड़ेगा। बड़ी कंपनी की शर्तों पर खेती करनी होगी।

मौसम और उम्र की परवाह नहीं

मस्ताना का हौसला इतना बुलंद है कि उन्हें सड़क पर खुले आसमान के नीचे सर्द राते गुजारने का कोई डर नहीं है। उनका कहना है कि इस मौसम में खेती करने की आदत ने मन और शरीर को काफी मजबूत कर दिया है। उन्होंने बताया कि पैरों की वजह आए यहां किसी ट्रेक्टर की ट्राली में चढ़ा ओर उतरा नही जाता है। जिसके चलते जमीन पर ही बिस्तर लगा लिया है।

संबंधित खबरें