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अमोनियम नाइट्रेट अन्य रसायन मिलने से बनता है विस्फोटक

अमोनियम नाइट्रेट अन्य रसायन मिलने से बनता है विस्फोटक

संक्षेप:

दिल्ली के लालकिला मेट्रो स्टेशन के पास 10 नवंबर को हुए बम धमाके में अमोनियम नाइट्रेट के इस्तेमाल की संभावना से विशेषज्ञ चिंतित हैं। इस धमाके में 13 लोगों की मौत हुई और 24 घायल हुए। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, फरीदाबाद में विस्फोटक सामग्री और संदिग्ध अमोनियम नाइट्रेट बरामद हुए हैं।

Nov 14, 2025 11:26 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, फरीदाबाद
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फरीदाबाद, वरिष्ठ संवाददाता। दिल्ली बम धमाके में अमोनिया नाइट्रेट के इस्तेमाल होने की संभावना से विशेषज्ञ हैरत में हैं। उन्होंने कहा कि अमोनियम नाइट्रेट स्वयं विस्फोटक नहीं, लेकिन इसमें अन्य रासायनिक तत्व मिलने से यह खतरनाक रूप ले सकता है। इसलिए इसका भंडारण और इस्तेमाल करने के लिए सख्त नियम बनाने चाहिए। दिल्ली के लालकिला मेट्रो स्टेशन के पास 10 नवंबर को एक कार में जोरदार धमाका हुआ था। इसमें करीब 13 लोगों की मौत हो गई है। वहीं, 24 लोग घायल हैं, जिनका अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है। धमाके की जांच कर रही सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, इस धमाके के कई तार फरीदाबाद से जुड़े हैं।

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धौज गांव में 9 नवंबर को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पुलवामा के रहने वाले डॉ. मुजम्मिल के घर छापा मारा। उसके कमरे से 360 किलो विस्फोटक और एक असॉल्ट राइफल मिली। यहां से करीब तीन किमी दूर फतेहपुर तगा गांव से एक मौलाना के घर से करीब 25 किलो संदिग्ध अमोनियम नाइट्रेट बरामद किया गया। सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, जिस तरह से धमाका हुआ है, इसकी वजह अमोनियम नाइट्रेट हो सकता है। राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित यूनिवर्सिटी के एक वरिष्ठ प्रोफेसर ने बताया कि अमोनियम नाइट्रेट कृषि क्षेत्र में उर्वरक के रूप में और औद्योगिक क्षेत्रों में नियंत्रित परिस्थितियों में कई वैध प्रक्रियाओं में इस्तेमाल होता है। लेकिन जिन परिस्थितियों में इसके तापमान, दबाव और शुद्धता का सही तरीके से नियंत्रण नहीं किया जाता, वहां यह खतरनाक रूप ले सकता है। उन्होंने बताया कि यह पदार्थ अपने आप विस्फोटक नहीं होता, लेकिन यदि यह अत्यधिक गर्मी, नमी, आग, या असंगत रसायनों के संपर्क में आए, तो खतरा बढ़ सकता है। फोरेंसिक जांच के बाद ही पुष्टि होगी वरिष्ठ प्रोफेसर ने बताया कि अमोनियम नाइट्रेट में धमाके से नाइट्रोजन ऑक्साइड और अमोनिया जैसी गैस निकलती हैं। हवा में मिलने के बाद नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड की वजह से धुआं नारंगी रंग का दिखता है। हालांकि, मौके पर लिए गए सैंपल की फोरेंसिक जांच के बाद ही इसकी पुष्टि हो सकेगी। प्रोफेसर ने कहा कि अमोनियम नाइट्रेट को हवादार, ठंडे और नमी रहित स्थान पर ही रखा जाना चाहिए। इसके आग बुझाने की आधुनिक व्यवस्था, तापमान निगरानी प्रणाली और आपातकालीन प्रतिक्रिया दल की स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए। इसके अलावा, जो संस्थान या उद्योग इसका उपयोग करते हैं, उन्हें रजिस्टर में हर आने-जाने का रिकॉर्ड रखना चाहिए ताकि किसी तरह की संदिग्ध गतिविधि को तुरंत चिन्हित किया जा सके। प्रोफेसर ने कहा कि इसके दुरुपयोग की आशंका को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों और रसायन विज्ञान से जुड़े संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है। कई देशों में इसके परिवहन के लिए पहले से ही कड़े प्रोटोकॉल लागू हैं जैसे सीमित मात्रा में ही परिवहन, सुरक्षित पैकेजिंग, सरकारी अनुमति और जीपीएस आधारित ट्रैकिंग। भारत में भी इन मानकों को और मजबूत करने की जरूरत है। ------------------------------- यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने सुरक्षा मानक नियमन और निगरानी को बताया बेहद जरूरी 360 किलो विस्फोटक और एक असॉल्ट राइफल डॉ. मुजम्मिल के घर से मिला था 25 किलो संदिग्ध अमोनियम नाइट्रेट फतेहपुर तगा में मौलाना के घर से मिला था