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नौकरी का झांसा देकर लोगों को ठगने वाले गिरोह का पर्दाफाश

नौकरी का झांसा देकर लोगों को ठगने वाले गिरोह का पर्दाफाश

संक्षेप:

फरीदाबाद में साइबर अपराध सेंट्रल थाना पुलिस ने नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं से धोखाधड़ी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। गिरोह ने 50 से अधिक युवाओं के साथ ठगी की। आरोपियों को गिरफ्तार कर चार दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है। मामले में गहराई से पूछताछ की जा रही है।

Jan 17, 2026 09:03 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, फरीदाबाद
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फरीदाबाद। साइबर अपराध सेंट्रल थाना पुलिस ने प्लेसमेंट एजेंसी चलाकर नौकरी की तलाश में जुटे युवाओं के साथ धोखाधड़ी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह ने दिल्ली, फरीदाबाद-गुरुग्राम के अलावा कुछ अन्य महानगरों में 50 से ज्यादा युवाओं के साथ ठगी है। तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार हुए आरोपियों की पहचान दयाल नगर फरीदाबाद निवासी विशाल, दिल्ली के बलजीत नगर निवासी हर्ष कुमार और दिल्ली के ही उत्तम नगर निवासी योगेश कुमार के रूप में हुई है। पुलिस ने शनिवार को आरोपियों को अदालत में पेशकर चार दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है।

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पुलिस आरोपियों से गहराई से पूछताछ करने में जुटी हुई है। साइबर अपराध सेंट्रल थाना एसएचओ विमल कुमार ने बताया कि पल्ला थाना क्षेत्र निवासी एक युवती ने गत वर्ष 12 नवंबर को शिकायत दर्ज करवाई गई थी कि उसे निजी एयरलाइंस कंपनी में नौकरी लगवाने का झांसा देकर 43, 800 रुपये की ठगी की गई है। आरोपियों ने उसका साक्षात्कार लेकर नियुक्ति पत्र भी जारी किया था। बाद में पता चला कि यह नियुक्ति पत्र फर्जी था। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। फर्जी नियुक्ति पत्र करते थे जारी जांच के दौरान पुलिस को पता चला था कि यह गिरोह शहर के अलग-अलग हिस्सों में चल रहा है। पुलिस ने मामले की जांच के दौरान उपरोक्त आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार करने के बाद पूछताछ के दौरान पता चला कि आरोपी पहले नौकरी लगवाने वाली एक वेबसाइट पर अपनी फर्म का विज्ञापन देते थे। विज्ञापन देने के बाद नौकरी के इच्छुक लोग आवेदन करते थे। होटल में कमरा लेकर आवेदनकर्ताओं को साक्षात्कार भी लिया जाता था। इस दौरान उनसे वर्दी, ट्रेनिंग, कैंटीन कार्ड और अन्य तरह के शुल्क के नाम पर उनसे 30 से 50 हज़ार रुपये तक ले लिए जाते थे। रुपये लेने के बाद उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र जारी कर दिए जाते थे। जब आवेदक कंपनी पहुंचता तो उसे फर्जीवाड़े का पता चलता था, तब तक आरोपी होटल से फरार हो चुके होते थे। दिल्ली से लेकर बेंगलुरू के बेरोजगारों को ठगा अरोपी दिल्ली स्थित एक फर्जी कंसल्टेंसी फर्म में नौकरी करते थे। इस फर्म के संचालक भी बेरोजगार युवाओं के साथ ठगी करते थे। आरोपियों ने वहां से नौकरी छोड़कर अपनी खुद की फर्जी कंपनी बनाकर लोगों के साथ ठगी शुरू कर दी थी। आरोपियों ने गुरुग्राम, दिल्ली, मुंबई, पुणे, अहमदाबाद आदि शहरों में बेरोगजार युवक और युवतियोंके साथ ठगी की थी। केस दर्ज कराने में करनी पड़ी थी जद्दोजहद पीड़िता का कहना है कि छोटी रकम होने के कारण मामला दर्ज करने में आना-कानी करती है। इस मामले में शिकायतकर्ता युवती को भी धक्के खाने पड़े थे। पुलिस द्वारा मामला दर्ज न करने का यह गिरोह फायदा उठा रहा था और बेरोजगार लोगों के साथ ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहा था।