Faridabad News: सीवर लाइन के लिए खोदे गड्ढों में पानी भरा, हादसे का खतरा
Faridabad News: फरीदाबाद में सीवर लाइन डालने और नेटवर्क के विस्तार के लिए जारी खुदाई ने लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है। बारिश के बाद गड्ढों में पानी भरने से हादसों का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय निवासियों ने सड़कें सुधारने की मांग की है, साधारण दैनिक जीवन पर प्रभाव पड़ा है।

Faridabad News: फरीदाबाद, धनंजय चौहान। शहर में सीवर लाइन डालने और सीवर नेटवर्क के विस्तार के लिए की जा रही खुदाई अब लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। नगर निगम की ओर से कई इलाकों में सड़कें और गलियां खोदने के बाद गड्ढों को न तो ठीक से भरा गया और न ही सड़क को पहले जैसी स्थिति में बहाल किया गया। बारिश के कारण इन गड्ढों में पानी भर गया है, जिससे दोपहिया वाहन चालकों, स्कूली बच्चों और पैदल राहगीरों के लिए हादसे का खतरा बढ़ गया है। शहर के डबुआ, पर्वतीय कॉलोनी, सेक्टर-21डी, एनआईटी क्षेत्र और कई अन्य कॉलोनियों में स्थिति सबसे अधिक खराब बनी हुई है।
समस्या का समाधान
सेक्टर-21डी वासियों ने पिछले दिनों जिला कष्ट निवारण कमेटी की बैठक में इस मुद्दे को उठाया था, जिसके बाद स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को जल्द समाधान के आदेश दिए थे। दूसरी तरफ नंगला एंक्लेव पार्ट 2, राजीव कॉलोनी, गौंछी, सेक्टर-23, संजय कॉलोनी में कई गलियां छह माह से खुदी पड़ी हैं, जबकि कुछ स्थानों पर केवल मिट्टी डालकर काम पूरा होने का दावा कर दिया गया। बारिश के साथ यह मिट्टी बह गई और सड़क फिर से धंस गई। नतीजा यह है कि गहरे गड्ढे पानी से भर गए हैं और वाहन चालकों को उनकी गहराई का अंदाजा तक नहीं लग पाता।
स्थानीय लोगों की चिंताएं
स्थानीय लोगों का कहना है कि सीवर लाइन बिछाने के बाद सड़क को पहले जैसी स्थिति में बहाल करने का काम महीनों तक नहीं किया जाता। इससे धूल, कीचड़ और जलभराव की समस्या लगातार बनी रहती है। बारिश होने पर हालात और खराब हो जाते हैं। कई कॉलोनियों में एंबुलेंस और स्कूल बसों को भी आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
खतरा बढ़ता है
बारिश के दौरान पानी से भरे गड्ढे सबसे अधिक खतरनाक साबित हो रहे हैं। पानी के कारण गड्ढे दिखाई नहीं देते और वाहन चालक सीधे उनमें उतर जाते हैं। कई जगह दोपहिया वाहन फिसलने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चे साइकिल से स्कूल जाते समय अक्सर गिर जाते हैं, जबकि बुजुर्गों के लिए पैदल निकलना भी जोखिम भरा हो गया है। सबसे अधिक परेशानी रात के समय होती है। कई इलाकों में पर्याप्त स्ट्रीट लाइट नहीं होने से पानी से भरे गड्ढे दिखाई नहीं देते। ऐसे में दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
लोगों का प्रदर्शन
नगर निगम की कार्यशैली के खिलाफ अब लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई देने लगा है। हाल ही में डबुआ और पर्वतीय कॉलोनी के निवासियों ने सड़क जाम कर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कई बार शिकायत देने के बावजूद अधिकारी केवल आश्वासन देते रहे, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सड़कें ठीक नहीं हुईं तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
इसी तरह सेक्टर-21डी के निवासी अपनी शिकायत लेकर जिला ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में पहुंचे। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के समक्ष सीवर लाइन की खुदाई के बाद बदहाल सड़कों और जलभराव का मुद्दा उठाया। लोगों ने बताया कि कई महीनों से सड़कें टूटी हुई हैं, जिससे रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। मंत्री ने अधिकारियों से मामले की रिपोर्ट लेकर समाधान कराने के निर्देश भी दिए, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि अब तक जमीनी स्तर पर खास सुधार नहीं हुआ।
निर्माण एजेंसियों की लापरवाही
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि निर्माण एजेंसियां पाइपलाइन बिछाने के बाद साइट छोड़ देती हैं। सड़क की मरम्मत, मिट्टी का समतलीकरण और डामरीकरण समय पर नहीं किया जाता। कई जगह निर्माण सामग्री भी सड़क किनारे पड़ी रहती है, जिससे यातायात प्रभावित होता है। नगर निगम की निगरानी भी प्रभावी नहीं दिख रही है।
अधिकारियों को आदेश दिए गए है कि जिन भी इलाकों में विकास कार्य चल हैं उनका नियमित निरीक्षण करें। लापरवाही मिलने पर ठेका एजेंसी की जबावदेही तय करें, जिससे तय समय में काम पूरे किए जा सके।
- विवेक गिल, मुख्य अभियंता, नगर निगम
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