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विरासत संरक्षण: होडल में काशीराम की हवेली और कचहरी के आसपास नहीं होगा निर्माण कार्य

विरासत संरक्षण: होडल में काशीराम की हवेली और कचहरी के आसपास नहीं होगा निर्माण कार्य

संक्षेप:

जिला पलवल के होडल शहर में काशीराम की हवेली और कचहरी के 15 मीटर के दायरे में निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गई है। 30 मीटर के दायरे में निर्माण करने वालों को नक्शा पास कराना होगा। यह ऐतिहासिक स्थल सरकार...

Sun, 11 May 2025 10:07 PMNewswrap हिन्दुस्तान, फरीदाबाद
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पलवल,संवाददाता। जिला पलवल के होडल शहर स्थित प्राचीन व ऐतिहासिक महत्व के स्मारक काशीराम की हवेली और कचहरी के 15 मीटर के दायरे में निर्माण कार्य पर रोक लगेगी। वहीं 30 मीटर के दायरे में निर्माण करने वाले लोगों को विभाग से नक्शा पास कराना होगा। होडल में काशी राम और कचहरी का पुराना इतिहास है। यूं तो होडल शहर में बहुत से ऐतिहासिक स्थल बने हुए है जिनमें से काशी राम की हवेली और कचहरी अपना महत्व रखती हैं। जिले में तीन विधानसभाओं में से होडल ही एक ऐसी विधान सभा है जहां सबसे ज्यादा ऐतिहासिक स्थल है। ऐसा शायद इसलिए है कि होडल का ज्यादातर इलाका बृज क्षेत्र का है।

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काशी राम की हवेली और कचहरी का इतिहास- चौधरी काशी राम सोरोत 18वीं शताब्दी के प्रारंभ में होडल के शासक और सोरोत जाटों के प्रमुख थे। डीग के राजा बदन सिंह सिनसिनवार ने अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए अपने पुत्र सूरजमल का विवाह काशी राम की पुत्री से कर दिया। यह विवाह सौरोतों और सिनसिनवारों दोनों के लिए लाभदायक सिद्ध हुआ। चौधरी काशीराम का विवाह मानपुर की रावत (चोंकर वंश की एक शाखा) जाट महिला जसकौर से हुआ था। ऐसा कहा जाता है कि काशीराम की मृत्यु भरतपुर में हुई थी और उनकी पत्नी जसकौर होडल में सती हुई थीं। होडल में उनके सम्मान में सती तालाब और सती मंदिर बनाया गया था। काशीराम के उत्तराधिकारी बलराम सिंह सौरोत भरतपुर की सेना के सेनापति थे। होडल और उसके आसपास कई पुरानी इमारतें और ऐतिहासिक महत्व के स्थान हैं। सबसे उल्लेखनीय हैं चौधरी काशी राम की हवेली और उससे सटे कोर्ट हाउस के खंडहर, जिसे इजलास खास के नाम से जाना जाता है, जिसे उन्होंने सन 1750 के आसपास बनवाया था। इनके अलावा, नई बस्ती के बीच में एक बढ़िया बावली के खंडहर हैं। ये जीर्ण-शीर्ण इमारतें अंदुआ पट्टी में एक ऊंचे स्थान पर स्थित हैं, जहां से काशी राम ताल्लुक रखते थे। चौधरी काशी राम की पुरानी हवेली में बची हुई आंतरिक दीवारों, चिनाई वाले स्तंभों और ऊंचे अग्रभाग पर बेहतरीन पत्थर की नक्काशी है। ये सभी पत्थरों के भारी ब्लॉकों से बने हैं। विरासत व पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव कला रामचंद्रन के अनुसार होडल स्थित संरक्षित स्मारकों के 15 मीटर के दायरे में निर्माण कार्य प्रतिबंधित होंगे और अगर 30 मीटर के दायरे में कोई निर्माण कार्य करता है तो उससे संबंधित विभाग से नक्शा पास करवाना होगा। इन हिदायतों का मतलब ये है कि 15 मीटर के दायरे में ना तो कोई निर्माण होगा और ना ही किसी तरह का कोई भी खनन कर सकेगा। होडल में काशीराम की हवेली और कचहरी ऐतिहासिक धरोहर हैं । यह सरकार की अच्छी पहल है कि उनको संरक्षित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। इससे असामाजिक तत्व ऐतिहासिक धरोहरों पर कब्जा नहीं कर सकेंगे और उनको हानि भी नहीं पहुंचा सकेंगे। सरकार को इनके संरक्षण के लिए जल्द कदम उठाना चाहिए अरुण जेलदार, अध्यक्ष 52 पाल