
ठंड का प्रभाव बढ़ने लगा, लेकिन सरकारी स्कूल के बच्चों को नहीं मिला वर्दी का पैसा
-सुबह के समय बच्चे ठिठुरते हुए स्कूल जाते हैं-------फरीदाबाद, वरिष्ठ संवाददाता। ठंड का प्रभाव दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है और सुबह-शाम अच्छी खासी ठंड रहने लगी है। सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों...
ठंड का प्रभाव दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है और सुबह-शाम अच्छी खासी ठंड रहने लगी है। सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को ठंड से बचाने के लिए के उचित इंतजाम नहीं किए गए हैं। सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों को वर्दी का पैसा उपलब्ध नहीं कराया गया है। सुबह के समय बच्चों को ठंड से ठिठुरते हुए स्कूल जाते देखा जा सकता है। प्रदेश सरकार की ओर से पहली से आठवीं कक्षा के छात्रों को मिडडे मील सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। सरकार की योजना के अनुसार नया सत्र शुरू होने के साथ ही छात्रों के बैंक खाते में वर्दी के पैसे डाल दिए जाने चाहिए।
अब आधे से अधिक सत्र बीत चुका है और छात्रोां को अभी भी वर्दी व वजीफे के पैसों का इंतजार है। पैसे नहीं आने से कई छात्र फटी पुरानी वर्दी पहनकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। इस फटी वर्दी में उनकी ठंड भी नहीं रुकती। सुबह के समय बच्चे सूरज निकलने से पूर्व स्कूल जाते देखे जाते हैं। तन पर गर्म कपड़ा नहीं होने पर ठिठुरते रहते हैं। बता दें कि पहली से आठवीं कक्षा के छात्रों को अनिवार्य शिक्षा के तहत एक हजार रुपये वर्दी के दिए जाते हैं। -------- पहले उपलब्ध कराई जाती थी वर्दी एमआईएस पोर्टल सिस्टम लागू होने से पूर्व स्कूल प्रबंधन छात्रों को वर्दी कराए जाते थे। इसके तहत वर्दी के पसै स्कूल के खाते आते थे और वहां से वर्दी खरीदकर बच्चों को उपलब्ध कराई जाती थी।एमआईएस पोर्टल लागू होने से छात्रों का दाखिला ऑनलाइन होने के साथ बैंक अकाउंट आवश्यक कर दिया गया। इसके तहत वर्दी, वजीफे के पैसे उनके खाते डाले जाने लगे। यहीं से छात्रों की परेशानी बढ़ने लगी।छात्रों को कभी भी समय से वर्दी का पैसा नहीं मिला है। कई छात्र ऐसे भी हैं, जिनके दो वर्षों वर्दी के पैसे बकाये हैं। ----- पहचान पत्र योजना भी ठंडे बस्ते में करीब दो वर्ष की सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की पहचान के लिए पहचान पत्र योजना शुरू की गई थी। इसके तहत पहचान पत्र पर बच्चे का नाम, स्कूल का नाम, उसके पिता का नाम का नाम, मोबाइल नंबर सहित तमाम जानकारियां होती है। शुरुआत में यह योजना अच्छे से चली। अब यह योजना भी ठंडे बस्ते में चली गई।इस बार छात्रों को नए पहचान पत्र उपलब्ध नहीं कराए गए। वहीं पुरानी कक्षा के पहचान पत्र से काम चला रहे हैं। ------ लेट लतीफी का यह कारण शिक्षा विभाग के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार बच्चों के अभिभावकों द्वारा छात्र संबंधी पूर्ण जानकारी उपलब्ध नहीं कराए जाने की वजह से परेशानी आती है। एमआईएस पोर्टल पर अधूरी जानकारी रहने की वजह से वर्दी व वजीफे से वंचित रहना पड़ रहा है।शिक्षा अधिकारियों का दावा है कि उन छात्रों के समय पर वर्दी व वजीफे के पैसे आ रहे हैं, जिनकी एमआईएस पोट्रल पर संपूर्ण जानकारी है। बता दें कि स्कूल 200 से अधिक स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा में डेढ़ लाख से अधिक बच्चे पढ़ाई करते हैं। ----- इससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है। शिक्षा निदेशालय छात्रों के खाते में पैसे भेजता है। छात्रों के दस्तावेज व संपूर्ण जानकारियां अपलोड नहीं होने की वजह से बैंक खाते में पैसे आने की दिक्कत आती है। -अंशुल सिंगला, जिला शिक्षा अधिकारी ----- अभिषेक शर्मा \B

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