ठंड बढ़ने से निर्माण कार्यों में जुटे मजदूरों का नहीं मिल रहा काम
फरीदाबाद में ठंड और कोहरे के कारण दिहाड़ी मजदूरों की स्थिति गंभीर हो गई है। निर्माण कार्य ठप होने से मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है, जिससे उनकी आमदनी प्रभावित हो रही है। सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से राहत की मांग की है, क्योंकि लंबे समय तक ऐसे हालात रहने पर उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो सकती है।

फरीदाबाद। शहर में लगातार बढ़ रही ठंड और कोहरे ने दिहाड़ी मजदूरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। तापमान में गिरावट के साथ ही अधिकांश लोगों ने निर्माण कार्यों को अस्थायी रूप से रोक दिया है, जिससे रोज कमाकर खाने वाले मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। हालात यह हैं कि सुबह से लेबर चौक पर खड़े मजदूरों को घंटों इंतजार के बाद भी काम नहीं मिल पा रहा है, जिससे वे काफी परेशान है। स्मार्ट सिटी में रोजाना सेक्टर-55 चौक, प्याली चौक, प्रेस कॉलोनी और ओल्ड फरीदाबाद सहित विभिन्न इलाकों में बड़ी संख्या में मजदूर सुबह काम की तलाश में पहुंचते हैं।
यही हाल गुरुवार को चौक-चौराहों पर देखने को मिली। सेक्टर-55, गौंछी, ओल्ड फरीदाबाद और बल्लभगढ़ में अंबेडकर चौक पर काफी संख्या में मजदूर खड़े थे। लेकिन ठंड के कारण मकान मालिक और ठेकेदार निर्माण कार्य शुरू करने से बच रहे हैं, जिससे घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें काम नहीं मिल रहा है। मजदूरों का कहना है कि सर्द मौसम में सीमेंट, ईंट और सरिया से जुड़े काम प्रभावित होते हैं, वहीं कोहरे की वजह से सुरक्षा को लेकर भी लोग आशंकित रहते हैं। ठंड और कोहरे में निर्माण की गुणवत्ता पर पड़ता असर ठेकेदार एसोसिएशन के प्रधान गिरीराज सिंह ने बताया कि ठंड और कोहरे की वजह से निर्माण की गुणवत्ता पर असर पड़ता है। सीमेंट ठीक से सेट नहीं हो पाता और मजदूरों के बीमार पड़ने का खतरा भी रहता है। इसी कारण कई लोग जनवरी के मध्य तक काम रोकने का निर्णय ले चुके हैं। इसका सीधा असर दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ रहा है, जिनकी आमदनी पूरी तरह रोज के काम पर निर्भर है। सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि ठंड के मौसम में दिहाड़ी मजदूरों के लिए सबसे कठिन समय होता है। काम कम होने के साथ-साथ खर्च बढ़ जाते हैं। गर्म कपड़े, दवाइयां और राशन की जरूरत बढ़ती है, लेकिन आमदनी घट जाती है। कुछ मजदूरों ने प्रशासन से मांग की है कि ठंड के मौसम में उनके लिए वैकल्पिक रोजगार या राहत की व्यवस्था की जाए। मजदूरी न मिलने से परेशानी हुई दोगुनी शहर में कई मजदूर झुग्गी-बस्तियों में रहते हैं, जहां ठंड से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। ऐसे में काम न मिलने पर उनकी परेशानियां दोगुनी हो जाती हैं। यदि ठंड का यह दौर लंबा चला, तो दिहाड़ी मजदूरों की आर्थिक स्थिति और कमजोर हो सकती है। फिलहाल मजदूरों की नजर मौसम के साफ होने पर टिकी है, ताकि निर्माण कार्य दोबारा शुरू हो सकें और उन्हें रोजाना की मजदूरी मिल सके। लेकिन जब तक ठंड और कोहरे का असर बना रहेगा, तब तक दिहाड़ी मजदूरों की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। मजदूरों से बातचीत बल्लभगढ़ अंबेडकर चौक पर मिले मजदूर रामकिशन (45) ने बताया कि मैं पिछले 15 साल से निर्माण मजदूरी कर रहा हूं। पहले सर्दियों में भी रोज काम मिल जाता था, लेकिन इस बार हालत खराब है। तीन-चार दिन से कोई काम नहीं मिला। घर में बच्चे हैं, किराया और राशन का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि ठंड में काम न मिलने से उनकी जमा पूंजी भी खत्म होने लगी है। इसी तरह सेक्टर-55 चौक पर खड़े मजदूर सुभाष (32) ने कहा कि सुबह छह बजे घर से निकल आते हैं। उम्मीद रहती है कि कहीं न कहीं काम मिल जाएगा, लेकिन दोपहर हो जाती है और कोई बुलाने नहीं आता। ठंड में खाली बैठना और इंतजार करना बहुत मुश्किल है। अगर ऐसे ही हाल रहे तो गांव वापस जाना पड़ेगा।
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