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अपनी पसंद से चुनें शोध के लिए विषय : डॉ. ज्योति राणा

पीएचडी के लिए विषय पर अच्छी पकड़ होना सबसे जरूरी है। इससे आगे के सभी काम आसान हो जाते हैं। ये बात फाउंडेशन ऑफ मैनेजमेंट रिसर्च एंड ट्रेनिंग की फाउंडर चेयरमैन डॉ. ज्योति राणा ने सेक्टर- 21 स्थित एक होटल में बुधवार को हुई रिसर्च कार्यशाला के दौरान बताई।

दरअलस फाउंडेशन की ओर से शोधार्थियों, प्राध्यापकों और रिसर्च में रूचि रखने वाले छात्रों की जानकारी बढ़ाने के लिए रिसर्च सीरिज शुरू की गई है। इसके तहत 15 से 20 दिन के अंतराल पर कुल छह कार्यशाला कराई जाएंगी। हर बार शोध से जुड़े अलग विषय पर चर्चा होगी। इसके तहत पहली कार्यशाला हो चुकी है। पहली कार्यशाला में विभिन्न शिक्षण संस्थानों से करीब 35 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

रूचि के हिसाब से चुने शोध का विषय

डॉ. ज्योति राणा ने बताया कि शोध के लिए जरूरी है कि विषय अपनी पसंद के मुताबिक चुना जाए। इसके बाद विषय से संबंधित लिटरेचर और पुराने शोध पत्रों को पढ़ें। अपने विषय के संबंध में शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों के साथ चर्चा करें। अपनी टारगेट ऑडियंस के साथ बात करें। इन सबके बाद ही आप खुद अपने विषय के साथ न्याय कर सकेंगे।

शोध पेपर लिखना है एक कला

प्रो हर्ष वर्मा ने बताया कि शोध पेपर पीएचडी का एक महत्वपूर्ण अंग है। इसे लिखने की एक कला होती है। अगर पेपर बेहतर तरीके से लिखा जाए तो इसके सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। जो पीएचडी के लिए बेहद जरूरी है। इसके साथ ही प्रतिभागियों को शोध पेपर प्रकाशित करने के लिए आवश्यक बिंदुओं की भी जानकारी दी गई।

शोध के बारे में सटीक जानकारी देना मकसद

कार्यशाला के अंतिम चरण में फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज नई दिल्ली से प्रो. हर्ष वर्मा ने रिसर्च के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं केजे सोमैया इंस्टीट्यूट से अंजलि चोपड़ा ने हाइपोथिसिस विषय पर विचार रखे। प्रो. ज्योति राणा ने बताया कि कार्यशालाओं के जरिए शोध के हर बिंदु से जुड़ी सटीक जानकारी देना ही मकसद है। इसके लिए विभिन्न पीएचडी धारकों के साथ काम करेंगे।

इन विषयों पर होगी कार्यशालाएं

- शोध लिटरेचर समीक्षा

- युवा रचनात्मकता और योग्यता

- तथ्य एकत्रिकरण और तुलनात्मक अध्ययन

- एकेडमिक लीडरशिप

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