अनियमित औद्योगिक इलाके में केमिकल युक्त पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं

Feb 12, 2026 11:20 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, फरीदाबाद
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फरीदाबाद के अनियमित औद्योगिक इलाकों में केमिकल युक्त पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं है। इससे भूजल प्रदूषित हो रहा है और आसपास के पशु-पक्षियों के लिए खतरा बढ़ गया है। सेक्टर-58 और 59 में स्थिति अधिक गंभीर है, जहां गंदा पानी सड़कों पर जमा रहता है। अधिकारियों ने समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

अनियमित औद्योगिक इलाके में केमिकल युक्त पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं

फरीदाबाद, वरिष्ठ संवाददाता। शहर के अनियमित औद्योगिक इलाके में केमिकल युक्त पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं है।उद्योगों का कंपनी खुले मैदानों में छोड़ा जा रहा है, जिससे एक ओर जहां भूजल प्रदूषित हो रहा है। वहीं आसपास के पशु-पक्षियों के लिए खतरा बढ़ गया है। दो दिन पहले सेक्टर-59 में गंदा पानी पीने से 10 पशुओं की मौत हो चुकी है। बावजूद इसके नगर निगम और एचएसवीपी की ओर से पानी निकासी व्यवस्था पर कोई संज्ञान नहीं लिया। औद्योगिक नगरी में 28 हजार से अधिक छोटे-बड़े उद्योग है। इनमें डीएलएफ, सेक्टर-24, सेक्टर-25 और आईएमटी स्थायी औद्योगिक क्षेत्र हैं। वहीं 15 औद्योगिक अनियमित रूप से बसे हुए है।

इन क्षेत्रों में करीब 15 हजार से अधिक छोटे-बड़े उद्योग लगे है। अनियमित होने के कारण इनमें सीवर, पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी वर्षों से अभाव बना हुआ है, जिससे यहां लगे उद्योगों से निकलने वाला रासायनिक पानी खुले नालों, सड़कों और खाली प्लॉटों में बह रहा है। इससे जहां दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है, वहीं भूजल भी तेजी से दूषित हो रहा है। नगर निगम भले ही समस्या के समाधान के लिए योजना बनाने का दावा कर रहा हो, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं। सेक्टर-58 और 59 हालत ज्यादा खराब सेक्टर-58 और 59 में जहरीले पानी से हालात काफी खराब है। सेक्टर-58 में जहां रोजाना खुले मैदान में टैंकरों से कंपनियों का पानी छोड़ा जा रहा है।वहीं सेक्टर-59 में हाइवे किनारे नाले का पानी जमा है। उद्यमी नरेश अरोड़ा ने बताया कि सेक्टर-59 को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने करीब 20 वर्ष पहले बसाया था। सेक्टर में सीवर निकासी के लिए पाइप लाइन बिछाई गई। लेकिन, लाइन का जुड़ाव कहीं ठीक से नहीं किया गया। जिससे सेक्टर बसने के बाद सीवर ओवरफ्लो की समस्या शुरू हो गई। सीवर का गंदा पानी आये दिन सड़कों पर जमा रहता है। पिछले वर्ष उद्यमियों ने यह मामला जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में मुख्यमंत्री के समक्ष रखा था। जिसमें सीएम अधिकारियों को जल्द समाधान के आदेश दिए थे। अधिकारियों ने आनन फानन में कंपनियों के बाहर पंप सेट लगाकर सीवर का पानी खुले मैदान में छोड़ना शुरू कर दिया है, जिससे भू-जल प्रदूषित हो रहा है। इस समस्या को लेकर उद्यमी कई बार एचएसवीपी और जिला उपायुक्त को ज्ञापन भी सौंप चुके हैं लेकिन अधिकारियों की ओर से जल्द समाधान का आश्वासन देकर उन्हें लौटा दिया जाता है। इसी प्रकार सेक्टर-58 में सीवर की कोई खास व्यवस्था नहीं है। ऐसे में कंपनी संचालकों द्वारा कंपनियों से निकलने वाले केमिकल पानी का खुले में गड्ढा बनाकर छोड़ दिया जाता है। बरसात के दिनों में समस्या और बढ़ जाती है। इस दौरान केमिकल युक्त पानी सड़कों पर फैल जाता है, जिससे दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों के फिसलने का खतरा बना रहता है। कई बार लोगों की आंखों में जलन, त्वचा पर एलर्जी और सांस संबंधी परेशानियां भी सामने आ चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों में न तो समुचित ड्रेनेज सिस्टम और सीईटीपी उद्योग संचालकों का कहना है कि अधिकांश अनियमित औद्योगिक क्षेत्रों में न तो समुचित ड्रेनेज सिस्टम है और न ही कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की सुविधा। छोटे उद्योग अपने स्तर पर ट्रीटमेंट की व्यवस्था नहीं कर पाते, जिसके चलते अपशिष्ट जल सीधे नालों या जमीन में छोड़ दिया जाता है। इससे न केवल आसपास के इलाके प्रभावित होते हैं, बल्कि भूमिगत जल स्रोत भी धीरे-धीरे प्रदूषित हो रहे हैं। केमिकल युक्त पानी बढ़ा सकता है परेशानी पर्यावरण विशेषज्ञ सुनील हर्षना ने कहा कि केमिकल युक्त पानी में भारी धातुएं, रंग, तेल-ग्रीस और अन्य हानिकारक तत्व मौजूद होते हैं, जो मिट्टी और पानी में मिलकर लंबे समय तक असर छोड़ते हैं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में पीने योग्य पानी का संकट और गंभीर हो सकता है। विशेषज्ञों ने नियमित मॉनिटरिंग, अपशिष्ट जल शोधन और सुरक्षित निकासी की व्यवस्था को अनिवार्य बनाने की मांग की है। उद्यमियों ने बताया कि समस्या को लेकर कई बार एचएसआईआईडीसी, नगर निगम, एचएसवीपी अधिकारियों को शिकायतें दी गई। इसके बावजूद केवल अस्थायी उपाय किए जाते हैं। कहीं नाले की सफाई कर दी जाती है, तो कहीं मिट्टी डालकर गड्ढे भर दिए जाते हैं, लेकिन केमिकल युक्त पानी के स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। उन्हाेंने कहा कि अनियमित औद्योगिक क्षेत्रों को नियमित करने के साथ-साथ वहां बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। औद्योगिक सेक्टरों में सीवर की समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए काम किया जा रहा है। सेक्टर 58 और 59 सेक्टर-25 में हाल ही में बने नए एसटीपी तक पाइप लाइन बिछाई गई है। इसे जल्द चालू किया जाएगा। इससे उद्यमियों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। - संदीप दहिया, अधीक्षण अभियंता, एफएमडीए

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