आईआईटी का सपना, 12वीं के अंकों पर भारी
फरीदाबाद, अभिषेक शर्मा। सीबीएसई द्वारा घोषित 12वीं कक्षा के परिणामों ने चिंता बढ़ा दी है। कई मेधावी छात्रों के अंक 85 प्रतिशत से कम रह गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का दबाव बोर्ड परीक्षा पर भारी पड़ रहा है। स्कूलों का पाठ्यक्रम भी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए केंद्रित हो गया है।

फरीदाबाद, अभिषेक शर्मा। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा हाल ही में घोषित 12वीं कक्षा के परिणामों ने शिक्षा विशेषज्ञों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। जिले के कई मेधावी छात्र, जिन्होंने 10वीं कक्षा में 94 से 95 प्रतिशत तक अंक हासिल किए थे, इस बार 12वीं में 85 प्रतिशत या उससे कम अंकों तक सिमट गए। विशेषज्ञों का मानना है कि आईआईटी, नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का बढ़ता दबाव अब बोर्ड परीक्षा परिणामों पर भारी पड़ने लगा है। विशेषज्ञों के अनुसार मेडिकल और नॉन मेडिकल दोनों वर्गों के विद्यार्थियों के कुल प्राप्तांकों में इस बार गिरावट दर्ज की गई है। हर वर्ष 12वीं कक्षा के परिणाम में मेडिकल और नॉन मेडिकल के छात्रों का दबदबा रहता था। इसका सबसे बड़ा कारण छात्रों का स्कूल पाठ्यक्रम की बजाय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर अधिक ध्यान देना माना जा रहा है। अच्छी आईआईटी और मेडिकल कॉलेजों में दाखिला पाने की होड़ में विद्यार्थी नियमित पाठ्यक्रम से दूर होते जा रहे हैं।
स्कूलों की प्राथमिकता भी बदल रही
शिक्षाविदों का कहना है कि केवल विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि निजी स्कूल प्रबंधन भी इसके लिए काफी हद तक जिम्मेदार हैं। कई निजी स्कूलों में 11वीं और 12वीं कक्षा के दौरान पढ़ाई का पूरा ढांचा जेईई और नीट परीक्षा केंद्रित हो गया है। स्कूलों में बोर्ड पाठ्यक्रम से ज्यादा समय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर दिया जा रहा है।छात्र सुबह स्कूल और शाम को कोचिंग संस्थानों में समय बिता रहे हैं। लगातार टेस्ट, मॉड्यूल और प्रतियोगी परीक्षा के पैटर्न पर आधारित पढ़ाई के कारण बोर्ड परीक्षा के विषयों की गहराई से तैयारी नहीं हो पा रही। इसका असर सीधे परिणामों में दिखाई दे रहा है।
ऑनलाइन कॉपी जांच पर भी उठे सवाल
इस बार बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच प्रक्रिया में बदलाव भी चर्चा का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार पहले उत्तर पुस्तिकाओं की जांच ऑफलाइन तरीके से होती थी, लेकिन इस बार कॉपियां ऑनलाइन जांची गईं। कई शिक्षकों और विशेषज्ञों ने ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि ऑनलाइन कॉपी जांच के दौरान कई बार उत्तरों का सही आकलन नहीं हो पाता। स्क्रीन पर लंबे उत्तर पढ़ने में कठिनाई होने और तकनीकी समस्याओं के कारण अंकन में त्रुटियां होने की आशंका बढ़ जाती है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भी विद्यार्थियों के अंकों पर असर पड़ा है।
विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षा दोनों के बीच संतुलन बनाकर चलने की आवश्यकता है। बोर्ड परीक्षा के अंक उच्च शिक्षा और भविष्य की कई संभावनाओं के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इसके अलावा जिले में डमी स्कूल कल्चर हो गया है। स्कूल प्रबंधन केवल बोर्ड परीक्षा के लिए छात्र का पंजीकरण करते हैं। इसके बाद छात्र का ध्यान सिर्फ जेईई व नीट पर रहता है।
-एसके दलाल, पूर्व प्रधानाचार्य
प्रतियोगी परीक्षाओं की भी तैयारी आवश्यक है, लेकिन उससे पूर्व स्कूली शिक्षा है। छात्रों एवं स्कूल प्रबंधन दोनों को प्राथमिकता तय करनी होगी। यदि केवल प्रतियोगी परीक्षाओं को महत्व देंगे, तो इससे परिणाम प्रभावित होना स्वाभाविक है।
-परेश गुप्ता, पूर्व प्रधानाचार्य
सामान्य प्रश्न
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