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1 दिसंबर, 2020|11:21|IST

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मेवात की बदतर स्थिति को सुधारने के लिए फेसबुक पर अभियान चलाया

मेवात की बदतर स्थिति को सुधारने के लिए फेसबुक पर अभियान चलाया

मेवात के बदहाल हालात पर फेसबुक पोस्ट डालकर इसको बदलने के लिए लोग चर्चा कर रहे हैं। इस पोस्ट के माध्यम से बताया गया है कि मेवात के लोगों के पास तन ढंकने के लिए कपड़े पहनने के लिए भी संसाधन नहीं हैं। इन हालात को बदलने की जरूरत है। जलीश अहमद द्वारा डाली गई इस पोस्ट पर लोग कमेंट कर रहे हैं तो कुछ इसे शेयर भी कर रहे हैं। इस पोस्ट में यूजर जलीश अहमद ने लिखा है कि अभी कुछ महीनों रोज पहले की बात है, मैं मेवात के एक चौराहे पर खड़ा था, सोच रहा था किधर के लिए बैठू, चारों तरफ नज़र घुमाई, मेरे भाइयों के पास किसी के पास बदन को ढंकने के लिए कपड़े नहीं थे, पैरों में चप्पल नहीं थी, कमीज में बटन नहीं थे और अगर चप्पल-जूते भी थे तो वो मात्र दिखावटी थे। हालत ऐसी थे के टूट-टूट कि एड़ियां घिसी हुई थीं बाकी सब चप्पलों में थे, कुछ लोगों ने तो लुंगी की जगह घरवाली का दुपट्टा लपेटा हुआ था, औरतों के हाथों चुड़ियां भी कम ही थीं। इन सब मार्मिक तस्वीरों ने अंदर से सोचने पर मजबूर कर दिया। इन सभी तस्वीरों हालातों न अंदर से हिला दिया, ये कैसा तमाशा है? हमारे पूर्वज इन हालातों में अपनी जिंदगी गुजारी और आज हम गुजारने पर मजबूर। अब मैं सोच रहा हूं कि ये भ्रमण मैंने आपको भी करवा ही दिया वैसे भी रोज-मर्रा की दिनचर्या ये सब देखते ही हैं। बहुत तंग आ चुका हूं ये हालत अब देखे नहीं जाते, छोटे छोटे मासूम बच्चे आज कहां जा रहे हैं, न तालीम न रोजगार, हम पिछड़ रहे हैं और पिछड़ते जा रहे हैं............!

यूजर वसीम कासिम ने इस पोस्ट पर कमेंट किया है कि बट सर ऐसे हालातों से निपटने के लिए यूथ को आगे आना होगा। यूजर तौफिक अहमद ने कमेंट किया है कि हकीकत तो ये है कि हमारी कौम बच्चों की तालीम पर पैसे खर्च ही नहीं करना चाहती है। कोई झगड़ा होने दो, फिर जो कहता है कि मैं गरीब हूं वो भी उस झगड़े में दूसरी पार्टी के लोगों को मुकदमा करवाने के लिए थानेदार को पैसे दे देगा, चाहे किसी की गर्दन काटकर लाए। सलीम खान मेव ने लिखा है मार्मिक चित्रण हालात-ए-मेवात। यूजर राहिल हुसैन लिखते हैं कि और ये हालात मेवात के लोग सुधर भी नहीं सकते, इन्होंने ऐसे हालात खुद बनाए हैं। नजमू समीर ने लिखा है कि अफसोस ये कोई आगे नहीं आता यूजर पंकज कुमार ने कमेंट किया है कि कुछ बच्चे कम करने की भी बोल दीजिए, तब और भी हालात सुधर सकते हैं। तौफिक खान ने कमेंट किया है कि मैं कई बार अचंभित होता हूं कि यहां मेवात में 90 प्रतिशत आबादी मुस्लिमों की है। जबकि 90 प्रतिशत कारोबार गैर मुस्लिमों के हाथों में है।

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  • Web Title:Campaigned on Facebook to rectify the worsening situation in Mewat