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यादें:::जान गंवाने वाले इंस्पेक्टर को मिला था पुलिस मेडल

यादें:::जान गंवाने वाले इंस्पेक्टर को मिला था पुलिस मेडल

संक्षेप:

फरीदाबाद में सूरजकुंड मेले के दौरान झूला गिरने पर लोगों की जान बचाते हुए इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद ने अपने प्राणों की आहुति दी। राष्ट्रपति से पुलिस मेडल प्राप्त करने वाले जगदीश ने अपनी ड्यूटी को हमेशा प्राथमिकता दी। उनके परिवार ने सरकार से सहायता की मांग की है।

Feb 08, 2026 11:40 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, फरीदाबाद
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फरीदाबाद, वरिष्ठ संवाददाता। सूरजकुंड मेले में झूला गिरने के दौरान लोगों की जान बचाने के दौरान अपने प्राणों का बलिदान करने वाले इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद को राष्ट्रपति की ओर से पुलिस मेडल भी मिला था। जहां भी उनकी तैनाती रही, उन्होंने कर्तव्य परायणता को प्राथमिकता दी। उन्होंने अपनी वर्दी पर दाग नहीं लगने दिया। मथुरा के डींगरा गांव निवासी करीब 58 वर्षीय जगदीश प्रसाद वर्ष 1989 में हरियाणा पुलिस में सिपाही भर्ती हुए थे। उनकी तैनाती हरियाणा आर्मड पुलिस में थी। इंस्पेक्टर बनने के बाद उन्हें जिला पुलिस में तैनाती मिली थी। इंस्पेक्टर बनने के बाद करीब डेढ़ वर्ष से सोनीपत में तैनात थे।

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गत वर्ष 25 नवंबर को पलवल पुलिस में स्थानांतरण हुआ था। उन्हें पलवल में चांदहट थाना एसएचओ भी लगाया गया था। 31 मार्च को उनकी सेवानिवृत्ति होनी थी। कुछ समय पहले उन्हें एसएचओ के पद से हटा दिया गया था। सूरजकुंड मेला शुरू होने पर उन्हें यहां ड्यूटी के लिए भेजा गया था। बीके अस्पताल में मौजूद उनके बेटे गौरव ने बताया कि करीब 25 वर्ष तक उनके पिता की तैनाती मधुबन पुलिस अकेडमी में रही थी। मधुबन के अलावा रोहतक, कैथल में भी उसके पिता ने ड्यूटी की। उसके पिता को बहादुरी के लिए राष्ट्रपति की ओर से पुलिस मेडल भी मिला था। उन्होंने बताया कि उसके परिवार में उसकी मां,पत्नी के अलावा दो बहनें हैं। दोनों छोटी बहन हैं। इनमें से एक बहन की शादी हो चुकी है। जबकि एक छोटी है। उसकी अभी शादी होनी है। उन्होंने बताया कि पुलिस मेडल की वजह से उनके पिता को करीब एक वर्ष की अतिरिक्त सेवा का अवसर मिला। इस वजह से एक वर्ष से ज्यादा की ड्यूटी बची हुई थी। सरकार से परिवार के लिए सहायता की उम्मीद बेटे ने सरकार से मांग की कि उसके पिता अपनी ड्यूटी को पूरी जिम्मेदारी से करते थे। उसके पिता शहीद हुए हैं। उम्मीद है कि सरकार शहीदों के परिवार के लिए भी कुछ न कुछ करेगी। उसके पिता ने लोगों की जान बचाने के लिए बहादुरी दिखाई थी। उसके पिता ने कभी भी अपनी वर्दी पर दाग नहीं लगने दिया था। -- झूले फिर से शुरू करने पर सवाल उठाए: शहीद पुलिस इंस्पेक्टर के छोटे भाई के दोस्त अवधेश पांडे ने बताया कि वर्षों पहले भी मेले में झूलों की वजह से हादसा हुआ था। मेला प्रशासन ने पता नहीं क्यों यहां फिर से झूले लगाने की अनुमति दे दी। झूले का ठेका तो दे दिया गया, लेकिन सावधानी नहीं बरती गई।