खेल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में मुक्केबाज अंशुल ने स्वर्ण पदक जीता

खेल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में मुक्केबाज अंशुल ने स्वर्ण पदक जीता

संक्षेप:

फरीदाबाद के अंशुल सरोहा ने राजस्थान के भरतपुर में खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने 48-51 किलो भार वर्ग में भाग लिया और अपने पिता मुकेश कुमार का धन्यवाद किया। अंशुल अब कॉमनवेल्थ गेम्स में भाग लेने का सपना देख रहे हैं और इसके लिए रोजाना कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

Dec 09, 2025 11:21 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, फरीदाबाद
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फरीदाबाद, वरिष्ठ संवाददाता। राजस्थान के भरतपुर में संपन्न हुई खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में स्मार्ट सिटी के युवा मुक्केबाज अंशुल सरोहा ने स्वर्ण पर पंच लगाया। उनके परिवार में खुशी का माहौल है। पिता मुकेश कुमार ने अंशुल को बधाई दी है। उन्होंने प्रतियोगिता में 48-51 किलो भार वर्ग में हिस्सा लिया था। प्रतियोगिता पांच से आठ दिसंबर तक आयोजित की गई। पर्वतीय कॉलोनी में रहने वाले अंशुल गुरुकाशी यूनिवर्सिटी बठिंडा पंजाब से शारीरिक शिक्षा में स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं और उन्होंने खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी में गेम्स में बठिंडा की तरफ से भाग लिया था। मुकेश कुमार ने बताया कि अंशुल का चयन ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी बॉक्सिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन के आधार पर हुआ था।

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उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया था। अंशुल ने अपनी बॉक्सिंग यात्रा की शुरुआत दिनेश महाजन के मार्गदर्शन में की। इसके बाद बॉक्सिंग कोच राजीव गोदारा से प्रशिक्षण लिया और अब पंजाब में पढ़ाई के दौरान यूनिवर्सिटी कोच अनिल बिश्नोई और राजकुमार के मार्गदर्शन में अपनी मुक्केबाजी को निखार रहे हैं। दोनों बेटों को डाला था बॉक्सिंग मुकेश कुमार ने बताया कि शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने के उद्देश्य से बड़े बेटे प्रिंस और अंशुल दोनों को बॉक्सिंग में डाला था। प्रिंस ने कुछ समय बाद ही बॉक्सिंग छोड़ दी। अब वह नासिक में सिंबोसिस से एमबीए की पढ़ाई कर रहा है। वहीं अंशुल लगातार बॉक्सिंग में मेहनत करते रहे और अब मेहनत रंग लाने लगी है। अपने बेटी की जीत पर मां अनिल भी काफी प्रसन्न हैं। वह अंशुल के स्वागत की तैयारियां कर रही हैं। वहीं अंशुल ने अपनी जीत का श्रेय अपने पिता मुकेश कुमार और प्रशिक्षकों को दिया है। कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए चयन है लक्ष्य अंशुल ने बताया कि हर खिलाड़ी का सपना ओलंपिक होता है। इससे पूर्व अगले वर्ष होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स पर हैं। इनका प्रयास है कि कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारतीय मुक्केबाजों की टीम की जगह पाए। इसके लिए प्रतिदिन सात से आठ घंटे मेहनत कर रहे हैं। इसके अलावा वह एशियन गेम्स व ओलंपिक में भी देश का गौरव बढ़ाना चाहते हैं।