वैश्विक स्तर पर देश के हस्तशिल्पियों को पहचान मिली : राज्यपाल

Feb 15, 2026 11:24 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, फरीदाबाद
share Share
Follow Us on

फरीदाबाद में 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले का समापन हुआ। हरियाणा के राज्यपाल ने मेले की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत विजन का उदाहरण है। मेले ने स्थानीय शिल्पकारों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई और कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देने का कार्य किया।

वैश्विक स्तर पर देश के हस्तशिल्पियों को पहचान मिली : राज्यपाल

फरीदाबाद। 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले का रविवार को समापन हो गया। अंतिम दिन मेले में हरियाणा के राज्यपाल प्रोफेसर असीम कुमार घोष मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि मेले से वैश्विक स्तर पर देश के हस्तशिल्पियों को पहचान मिली है। यह मेला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत विजन का मजबूत व जीवंत उदाहरण है। यह लोकल से ग्लोबल-आत्मनिर्भर भारत के मंत्र से प्रेरित है। सूरजकुंड मेला एक वाइब्रेंट प्लेटफार्म के तौर पर उभर रहा है। जहां ट्रेडिशन और नवाचार मिलकर काम करते हैं। राज्यपाल प्रोफेसर असीम कुमार घोष ने कहा कि मेले से ही लोकल शिल्पकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ग्लोबल पहचान मिली है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में राज्य सरकार कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में सजग है। इससे पहले राज्यपाल प्रोफेसर असीम कुमार घोष व उनकी धर्मपत्नी मित्रा घोष ने सहकारिता, पर्यटन एवं विरासत मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल, मेयर प्रवीण बत्रा जोशी के साथ मेले का अवलोकन किया। इस दौरान सभी मेहमानों का अपना घर पर हरियाणवी पगड़ी से स्वागत किया गया। इस बीच राज्यपाल ने कला और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए शिल्पकारों को विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया। सूरजकुंड शिल्प मेला को भारतीय सभ्यता और संस्कृति विरासत और आत्मनिर्भरता की सामूहिक इच्छा को खूबसूरती से प्रदर्शित हुआ है। उन्होंने कहा कि यह मेला विविधता में एकता की भावना को बल दे रहा है। उन्होंने कहा कि देश और दुनिया भर के कारीगरों, बुनकरों और लोक कलाकारों के कौशल, दृढ़ निश्चय की झलक मेले में दिखाई दी है। ‘मेला देश की सांस्कृतिक चेतना का उत्सव’ मेले के समापन पर पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि सूरजकुंड मेला केवल एक प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक चेतना का उत्सव है। यह वह मंच है जहां परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम दिखाई देता है। यहां हर कलाकृति एक वस्तु नहीं होती, बल्कि इसके पीछे किसी कारीगर की पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा, उसकी मेहनत,सपना और पहचान जुड़ी होती है। यह मेला आत्मनिर्भरता को मजबूत करने, एक्सपोर्ट की संभावना को बढ़ाने और लोकल प्रोडक्ट्स को सही मायने में ग्लोबल प्लेटफॉर्म देने में अहम रहा।

Hindustan

लेखक के बारे में

Hindustan
हिन्दुस्तान भारत का प्रतिष्ठित समाचार पत्र है। इस पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग अखबार के रिपोर्टरों ने की है। और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।