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पहले चालान कटता था, अब केस होगा; फरीदाबाद में कूड़ा जलाया तो खैर नहीं

पहले चालान कटता था, अब केस होगा; फरीदाबाद में कूड़ा जलाया तो खैर नहीं

संक्षेप: प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार फरीदाबाद में प्रदूषण का मुख्य कारण कूड़े के ढेर में आग है। स्मार्ट सिटी में आगरा नहर सड़क किनारे जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं और वहां पर आए दिन कूड़े के ढेर में आग को देखा जा सकता है। 

Thu, 16 Oct 2025 09:18 AMUtkarsh Gaharwar हिन्दुस्तान, फरीदाबाद
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स्मार्ट सिटी फरीदाबाद में कूड़े के ढेर में आग लगाने वालों पर अब मुकदमा दर्ज होगा। शहर में ग्रैप की पाबंदियों के अलावा अन्य दिनों में भी कूड़ा जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसे लेकर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय ने कार्य योजना तैयार की है।

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जिला उपायुक्त विक्रम सिंह की मुहर लगने के बाद उसे लागू कर दिया जाएगा। जिले में इसे सख्ती से लागू करने के लिए जिला प्रशासन के अंतर्गत आने वाले सभी विभागों की जिम्मेदारी तय होगी। बता दें कि अब तक केवल ग्रैप के लागू रहने के दौरान यदि कोई कूड़ा जलाता पाया जाता है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज होती थी। इस नियम में बदलाव किया जा रहा है। इस नए नियम के लागू होने से कूड़ा जलाने की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार फरीदाबाद में प्रदूषण का मुख्य कारण कूड़े के ढेर में आग है। स्मार्ट सिटी में आगरा नहर सड़क किनारे जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं और वहां पर आए दिन कूड़े के ढेर में आग को देखा जा सकता है। कई बार कूड़े के ढेर में आग इनकी भयानक होती है कि उसके आसपास रहने वाले लोगों को धुएं की वजह से सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा बाटा फ्लाईओवर के नीचे, संजय कॉलोनी, पर्वतीय कॉलोनी, सरूरपुर, नंगला, बल्लभगढ़ सहित कई जगहों पर कबाड़ी देर रात कूड़े के ढेर में आग लगाते हैं। इससे निकलने वाले धुएं में कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और बेंजीन होती है। यह सजीवों के लिए बेहतर नुकसान दायक होती है।

बल्लभगढ़ में प्रदूषण फिरसे खराब श्रेणी में पहुंचा

फरीदाबाद में प्रदूषण का स्तर सामान्य है, लेकिन बल्लभगढ़ क्षेत्र का बढ़ता प्रदूषण चिंता बढ़ा रहा है। बुधवार को फरीदाबाद का एक्यूआई 112 और बल्लभगढ़ का 220 दर्ज किया गया। यहां पर प्रदूषण स्तर खराब श्रेणी में पहुंच गया और इस दूषित हवा में सांस लेना लोगों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। वहीं संतोषजनक बात यह है कि दिल्ली की सीमा से लगते जिलों के मुकाबले फरीदाबाद में प्रदूषण का स्तर सबसे कम है। दिल्ली का एक्यूआई 233, गुरुग्राम का 263, गाजियाबाद का 254, ग्रेटर नोएडा का 263 और नोएडा का सबसे अधिक 318 प्रदूषण स्तर है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी एक्यूआई में समीपवर्ती जिले पलवल की हवा साफ है और लोग स्वच्छ हवा में सांस ले रहे हैं।

जिले में अब तक चालान काटे जा रहे थे

स्मार्ट सिटी में अभी तक ग्रैप को छोड़कर सामान्य दिनों में कूड़ा या फिर कोयले वाले तंदूर जलाने पर चालान किया जाता है और यह चालान नगर निगम की टीम करती है, लेकिन अब कोई कभी भी कूड़ जलाते पाया जाता है तो एफआईआर दर्ज होगी। इसमें किसी तरह की कोई रियायत नहीं बरती जाएगी। पिछले वर्ष नगर निगम कूड़ा जलाने और कोयले के तंदूर जलाने पर 20 से अधिक लोगों को चालान किया गया था, जबकि कूड़ा जलाने के करीब आठ मामले दर्ज हुए थे।

Utkarsh Gaharwar

लेखक के बारे में

Utkarsh Gaharwar
एमिटी और बेनेट विश्वविद्यालय से पत्रकारिता के गुर सीखने के बाद अमर उजाला से करियर की शुरुआत हुई। अमर उजाला में बतौर एंकर सेवाएं देने के बाद 3 साल नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर काम किया। वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हूं। एंकरिंग और लेखन के अलावा मिमिक्री और थोड़ा बहुत गायन भी कर लेता हूं। और पढ़ें
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