
फरीदाबाद में 50 गज से छोटे घरों को नहीं मिल रहे पानी-सीवर के कनेक्शन, नगर निगम की ये नीति बनी अड़ंगा
फरीदाबाद शहर में 50 गज से छोटे मकानों को पानी-सीवर के कनेक्शन नहीं दिए जा रहे। नगर निगम की नीति इसमें अड़चन बन रही है। इसमें छोटे प्लॉट की प्रॉपर्टी आईडी बनाने पर रोक है और बिना प्रॉपर्टी आईडी के कनेक्शन देना मना है।
फरीदाबाद शहर में 50 गज से छोटे मकानों को पानी-सीवर के कनेक्शन नहीं दिए जा रहे। नगर निगम की नीति इसमें अड़चन बन रही है। इसमें छोटे प्लॉट की प्रॉपर्टी आईडी बनाने पर रोक है और बिना प्रॉपर्टी आईडी के कनेक्शन देना मना है। नतीजतन नगर निगम के शिविरों से लोग खाली हाथ लौट रहे हैं।
अतिरिक्त निगमायुक्त सलोनी शर्मा का कहना है कि मामले की जांच कराकर समाधान निकालेंगे। सूत्रों के मुताबिक, निगम की नीति के अनुसार शहर में 50 गज से कम क्षेत्रफल वाले प्लॉट या मकानों की प्रॉपर्टी आईडी नहीं बनाई जा रही है। इसी वजह से ऐसे लाखों परिवार आधिकारिक रूप से बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। प्रॉपर्टी आईडी न होने पर पानी और सीवर के कनेक्शन नहीं मिल पा रहे।
निगम की ओर से कनेक्शन नियमित करने के लिए शहर में जगह-जगह शिविर लगाए जा रहे हैं। इनमें रजिस्ट्री के साथ प्रॉपर्टी आईडी अनिवार्य रूप से मांगी जा रही है। जिनके पास प्रॉपर्टी आईडी नहीं है, वे शिविरों से निराश होकर लौट रहे हैं। लोगों का कहना है कि नीति के कारण उनकी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं।
निगम ने जीआईएस (ज्योग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम) तैयार करने के लिए एक निजी कंपनी से पूरे शहर का सर्वे करवाया था। ड्रोन से किए गए सर्वे में करीब साढ़े 7 लाख प्रॉपर्टी चिन्हित की गई हैं। इनमें बड़ी संख्या 50 गज से कम क्षेत्रफल वाले प्लॉट और मकानों की बताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि निगम की नीति के तहत 50 गज से कम प्लॉट का विभाजन मान्य नहीं है। ऐसे में छोटे प्लॉटों पर बने मकानों की प्रॉपर्टी आईडी नहीं बनाई जा सकती। निगम का तर्क है कि नीति के विरुद्ध आईडी बनाने से भविष्य में कानूनी अड़चनें आ सकती हैं। क्षेत्रीय कराधान अधिकारी विकास कन्हैया का कहना है कि नगर निगम की नीति है कि 50 गज से छोटे प्लॉट का डिवीजन नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा छोटे प्लॉट की प्रॉपर्टी आईडी नहीं बनाने के आदेश हैं।
कनेक्शन के लिए 191 आवेदन मिले
फरीदाबाद में पानी-सीवर कनेक्शन के लिए विशेष शिविर लगाने का सिलसिला मंगलवार को भी जारी रहा। जिनमें 191 आवेदन मिले। बुधवार को भी शिविर लगाए जाएंगे। अतिरिक्त निगमायुक्त सलोनी शर्मा ने विभिन्न जोनों में पांच स्थानों पर विशेष कैंप लगाए गए। इन आवेदनों से निगम के खाते में करीब छह लाख रुपये से अधिक की राशि जमा हुई है। लोगों को पानी और सीवर कनेक्शन से जुड़े काम एक ही जगह पूरे हो रहे हैं। मंगलवार को ओल्ड जोन-1 में शास्त्री कॉलोनी, ओल्ड जोन-3 में सूर्या विहार, एनआईटी जोन-2 में सेक्टर-49, एनआईटी जोन-3 में सेक्टर-23 और बल्लभगढ़ जोन-2 में जाट भवन में कैंप लगाए गए।
जीपीए वालों की भी आईडी नहीं
जिन लोगों के पास मालिकाना हक साबित करने के लिए रजिस्ट्री नहीं है, उनकी प्रॉपर्टी आईडी भी नहीं बनाई जा रही है। जीपीए यानी जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी को निगम मान्यता नहीं दे रहा। इस श्रेणी में आने वाले लोग लंबे समय से निगम कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। धीरज नगर निवासी आरके वर्मा का कहना है कि उनका मकान करीब 100 वर्ग गज में बना है और जीपीए के आधार पर बनाया गया है।
नीति में बदलाव की मांग की
लोगों का सवाल है कि जब नगर निगम प्रॉपर्टी टैक्स वसूल रहा है, तो प्रॉपर्टी आईडी क्यों नहीं बनाई जा रही। उनका कहना है कि बिना आईडी के पानी-सीवर जैसी मूल सुविधाएं कैसे मिलेंगी। उन्होंने नीति में बदलाव करने की मांग की है। बसेलवा कॉलोनी निवासी राजेंद्र ने बताया कि 50 गज से कम मकान होने के कारण उनकी आईडी नहीं बन रही।





