
फरीदाबाद के आतंकी डॉक्टरों से जुड़े 20 और जिहादियों की तलाश, 7 ग्रुप से चल रहा था नेटवर्क
जम्मू-कश्मीर पुलिस के हत्थे चढ़े फरीदाबाद मॉड्यूल के संदिग्ध दो टेलीग्राम ग्रुप, एक सिग्नल ऐप ग्रुप और चार व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिये ऑपरेट हो रहा था। जब मॉड्यल के खिलाफ धर-पकड़ की कार्रवाई शुरू हुई तो इन ग्रुपों से जुड़े करीब 20 सदस्य एग्जिट हो गए।
जम्मू-कश्मीर पुलिस के हत्थे चढ़े फरीदाबाद मॉड्यूल के संदिग्ध दो टेलीग्राम ग्रुप, एक सिग्नल ऐप ग्रुप और चार व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिये ऑपरेट हो रहा था। जब मॉड्यल के खिलाफ धर-पकड़ की कार्रवाई शुरू हुई तो इन ग्रुपों से जुड़े करीब 20 सदस्य एग्जिट हो गए। पुलिस अब ग्रुप छोड़कर जाने वालों के बारे में जानकारी जुटा रही है। पुलिस को शक है कि ये संदिग्ध भी मॉड्यूल का हिस्सा थे, तभी इन्होंने आनन-फानन में एजेंसियों से बचने के लिए खुद को ग्रुप से अलग कर दिया।
यह खुलासा फरीदाबाद मॉड्यूल के दबोचे गए संदिग्धों की डिवाइस की जांच में हुआ है। जांच एजेंसियों ने कुछ अन्य डिवाइस को भी जब्त किया है, जिनकी जांच जारी है। माना जा रहा है कि इन डिवाइस की जांच में भी कुछ सनसनीखेज खुलासे हो सकते हैं। मॉड्यूल को लेकर अबतक हुई तकनीकी जांच में यह पता चला है कि किसी ग्रुप को डॉ. मुजम्मिल ऑपरेट कर रहा था तो किसी ग्रुप को डॉ. अदील, डॉ. शहीन, जबकि एक ग्रुप को वसीम नाम कोई शख्स ऑपरेट कर रहा था।
मॉड्यूल के संदिग्ध और कार धमाके के फिदायीन डॉ. उमर द्वारा कुछ महीने पहले ही सिग्नल ऐप पर चार-पांच लोगों को जोड़ने की जानकारी भी मिल रही है। तकनीकी जांच व पूछताछ में मिलने वाली इन जानकारियों के आधार पर जांच एजेंसियां अब जिन भी प्लेटफार्म के जरिये ग्रुप से जुड़ी जानकारी मिल सकती है, उससे संपर्क साध रही है।
जांच एजेंसियों द्वारा बरामद किए गए डिवाइसों की जांच में संदिग्धों द्वारा जिस तरह से अपडेट किए जाने की बात सामने आई है, उसके मुताबिक मॉड्यूल का सरगना करीब दो महीने पहले फरार हुआ डॉ. मुजफ्फर है। संभवत: उसके जरिये ही तुर्कीये में जैश-ए-मोहम्मद के हैंडलर से मॉड्यूल के संदिग्धों डॉ. मुजम्मिल व डॉ. उमर की मुलाकात हुई थी।
ग्रुप छोड़ने वालों की तलाश में कई स्थानों पर छापेमारी
एजेंसियां अब ग्रुप छोड़ने वालों की तलाश में दिल्ली, यूपी, हरियाणा व कश्मीर में कई स्थानों पर छापेमारी कर रही है। शक के आधार पर लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी कर रही हैं। रिक्रूटमेंट चीफ अदील-शहीन की निशानदेही पर संदिग्धों के संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। इस दौरान यह बात भी सामने आई है कि जैश-ए-मोहम्मद का कमांडर व मॉड्यूल के बीच कड़ी के तौर फरार संदिग्ध डॉ. मुजफ्फर ही काम कर रहा था।





