दिल्ली में बड़े फर्जी डिग्री रैकेट का खुलासा, 7 आरोपी गिरफ्तार; देशभर में सप्लाई कर रहे थे नकली मार्कशीट

लाइव हिन्दुस्तान, रजनीश पांडे, नई दिल्ली
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पुलिस अब इस नेटवर्क की गहराई तक जाने की कोशिश कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और इस सिंडिकेट के तार कितने राज्यों से जुड़े हैं।

दिल्ली में बड़े फर्जी डिग्री रैकेट का खुलासा, 7 आरोपी गिरफ्तार; देशभर में सप्लाई कर रहे थे नकली मार्कशीट

दिल्ली पुलिस ने अवैध कॉल सेंटर की आड़ में शहर में चल रहे एक बड़े और संगठित फर्जी डिग्री रैकेट का पर्दाफाश किया है। गिरोह के सदस्य देशभर में लोगों को पिछली तारीख की बनी हुई फर्जी डिग्रियां और मार्कशीट बेचकर पैसा वसूल रहे थे। यह गिरोह लोगों को 'महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट साइंस एंड टेक्नोलॉजी' के नाम से बनी डिग्रियां और माइग्रेशन सर्टिफिकेट उपलब्ध करा रहा था। गोविंदपुरी पुलिस ने इस गिरोह का खुलासा एक खुफिया सूचना के आधार पर किया। इस दौरान पुलिस एक अवैध कॉल सेंटर पर छापेमारी करते हुए सात मुख्य आरोपियों धर दबोचा, जबकि 28 अन्य कर्मचारियों को बाउंड डाउन किया गया है।

कार्रवाई की जानकारी देते हुए पुलिस ने बताया कि 6 अप्रैल को हमें गुप्त सूचना मिली थी कि गोविंदपुरी इलाके में गुरू रविदास मार्ग पर स्थित मकान नंबर TA-205 की दूसरी मंजिल पर अवैध कॉल सेंटर की आड़ में फर्जी डिग्रियां बनाने का एक बड़ा रैकेट चल रहा है। इस सूचना पर जब पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की तो वहां धड़ल्ले से फर्जी डिग्रियां बनाने का काम चल रहा था।

7 आरोपी गिरफ्तार, 28 को किया बाउंड डाउन

पुलिस ने बताया कि इस मामले में गिरफ्तार सात आरोपियों की पहचान संजीव कुमार मौर्य, जनक नेउपाने, किशन कुमार, विक्की कुमार झा, आशीष थपलियाल, आकाश कुमार और संजय आर्य के रूप में हुई है। वहीं छापेमारी के दौरान उनके ठिकाने से पुलिस ने 2.79 लाख नकद, 31 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, दो प्रिंटर, एक वाई-फाई राउटर, भारी मात्रा में छपी हुई फर्जी डिग्रियां, कोरे पेपर व ग्राहकों का डेटा वाला रजिस्टर बरामद किया है।

दे रहे थे MGIMSAT के नाम से बनी फर्जी डिग्रियां

जांच के दौरान जब आरोपियों से पूछताछ की गई तो पता चला कि यह सिंडिकेट गांधीजी के नाम पर बने फर्जी 'महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट साइंस एंड टेक्नोलॉजी' के नाम पर डिग्रियां दे रहा था, जो कि पूरी तरह से फर्जी संस्थान है। इनके टेलीकॉलर खुद को इस संस्थान की आधिकारिक फैकल्टी बताकर लोगों को झांसे में लेते थे। फिर आरोपी पिछली तारीख की डिग्रियां और माइग्रेशन सर्टिफिकेट तैयार करते थे।

ऐप की मदद से किया था स्टाफ भर्ती

जालसाजों ने 'वर्कइंडिया' जैसे ऐप्स के जरिए अपना स्टाफ (टेलीकॉलर्स) भर्ती किया था। ये लोग थर्ड-पार्टी से विभिन्न कंपनियों के कर्मचारियों का डेटा खरीदकर उन्हें अपना शिकार बनाते थे। पूरी ठगी का हिसाब-किताब गूगल एक्सेल शीट पर रखा जाता था और वॉट्सएप के जरिए पीड़ितों को फर्जी ट्रांसक्रिप्ट भी भेजी जाती थी।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। साथ ही पुलिस अब इस नेटवर्क की गहराई तक जाने की कोशिश कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और इस सिंडिकेट के तार कितने राज्यों से जुड़े हैं।

Sourabh Jain

लेखक के बारे में

Sourabh Jain

सौरभ जैन पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में कार्यरत हैं। वह दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और गुजरात से जुड़े घटनाक्रम पर खबरें और विश्लेषण लिखते हैं।


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परिचय और अनुभव: सौरभ जैन भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक हिस्सा हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 16 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है। वर्तमान में, वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्टेट सेक्शन में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वे पिछले लगभग तीन सालों से यहां कार्यरत हैं। सौरभ का करियर टीवी मीडिया से शुरू होकर डिजिटल मीडिया की गतिशीलता तक फैला हुआ है, जो उन्हें खबरों को गहराई और सटीकता के साथ प्रस्तुत करने में सक्षम बनाता है।


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सौरभ ने बैचलर ऑफ कॉमर्स की डिग्री लेने के बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पोस्ट ग्रेजुएशन का कोर्स किया। इस क्षेत्र में साल 2009 से सक्रिय होने के बाद सौरभ ने पहले टीवी के क्षेत्र में अलग-अलग डेस्क पर कार्य अनुभव लिया, इस दौरान उन्होंने टिकर डेस्क से शुरुआत करने के बाद न्यूज डेस्क में कॉपी राइटिंग का अनुभव हासिल किया, इस दौरान क्षेत्रीय विषयों से लेकर राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय विषयों पर खबरें लिखीं। इसके बाद उन्हें बॉलीवुड और हेल्प-लाइन डेस्क में भी काम करने का मौका मिला। हेल्प लाइन डेस्क में काम करने के दौरान उन्हें स्वास्थ्य, करियर और आम लोगों से जुड़े कई विषयों को जानने व समझने का मौका मिला।

इसके बाद साल 2016 में उन्होंने डिजिटल मीडिया की दुनिया में कदम रखा और स्पोर्ट्स डेस्क के साथ शुरुआत की। सौरभ ने अपने करियर की शुरुआत ZEE24 छत्तीसगढ़ न्यूज चैनल से की थी। इसके बाद वे IBC24 और दैनिक भास्कर जैसी संस्थाओं में भी सेवाएं दे चुके हैं। सौरभ साल 2023 से लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हुए हैं और यहां पर स्टेट डेस्क में कार्यरत हैं। सौरभ मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के रहने वाले हैं और उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई और ग्रेजुएशन दोनों यहीं से किया है। इसके बाद उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर्स की डिग्री ली है।

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