
नोएडा में एक और फर्जी कॉल सेंटर पकड़ा, कंपनी डायरेक्टर समेत 13 गिरफ्तार, ऐसे फंसाते थे शिकार
नोएडा के साइबर क्राइम थाना और सेक्टर-63 थाना पुलिस ने जॉइंट ऑपरेशन में एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ कर कंपनी डायरेक्टर सहित 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से दो लैपटॉप, टेलीकॉलर उपकरण, 31 मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
नोएडा के साइबर क्राइम थाना और सेक्टर-63 थाना पुलिस ने जॉइंट ऑपरेशन में एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ कर कंपनी डायरेक्टर सहित 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने मंगलवार को इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर सोमवार शाम सेक्टर-63 के एच-ब्लॉक में चल रहे इस कॉल सेंटर पर छापेमारी की गई।
एडिशनल डीसीपी (साइबर क्राइम) शैव्या गोयल ने बताया कि सुमित कुमार, विवेक कुमार, मोहम्मद सोहेल, ईश्वर, राज सलाउद्दीन, समीर अहमद, मोहम्मद आसिफ, मिथिलेश कुमार समेत 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
उन्होंने बताया कि आरोपियों के पास से दो लैपटॉप, टेलीकॉलर उपकरण, 31 मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
शैव्या गोयल ने कहा, ‘‘ये लोग इंश्योरेंस पॉलिसी और हेल्थ इंश्योरेंस कराने तथा पॉलिसी को रिन्यू कराने के नाम पर लोगों से संपर्क करते थे और उनसे धोखाधड़ी कर रकम फर्जी बैंक खातों में जमा करवा लेते थे।’’
उन्होंने बताया, ‘‘आरोपी विभिन्न बीमा कंपनियों का डेटा चोरी कर उनके ग्राहकों से संपर्क करते थे और उन्हें लुभावनी योजनाओं का झांसा देकर अपने जाल में फंसाते थे।’’
पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस मामले में संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है और जांच जारी है।
पिछले महीने फर्जी कॉल सेंटर के जरिए ऑनलाइन सट्टेबाजी का हुआ था खुलासा
गौरतलब है कि इससे पहले बीते 9 दिसंबर को नोएडा पुलिस ने एक फर्जी कॉल सेंटर के जरिये प्रतिबंधित ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी ऐप के माध्यम से लोगों को ठगने के आरोप में दो लोगों सचिन गोस्वामी (33) और कुणाल गोस्वामी (22) को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने आरोपियों के पास से धोखाधड़ी में कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए 7 लैपटॉप और 8 मोबाइल फोन बरामद किए गए थे। पुलिस ने बताया था कि सचिन के पास फाइनेंस में एमबीए की डिग्री है, जबकि कुणाल बीबीए ग्रेजुएट है।
पुलिस उपायुक्त (नोएडा) यमुना प्रसाद ने कहा कि भारत में ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी ऐप पर प्रतिबंध होने के बावजूद, आरोपी विभिन्न वेबसाइटों पर ऐसे मंच का विज्ञापन कर रहे थे और ऑनलाइन सर्च के माध्यम से अनजान यूजर्स का डेटा एकत्र कर रहे थे।





