10 दिन बाद बर्थ डे फिर लंदन की उड़ान, कैसे चली गई रिटायर्ड IAS की जान; बेटे ने बताया
होनी के आगे किसी की एक नहीं चलती और वह होकर ही रहती है। ऐसा ही कुछ हुआ दिल्ली के हौज खास में रहने वाले रिटायर्ड आईएएस अधिकारी धनेंद्र कुमार के साथ। बर्थ डे मनाने और उसके बाद लंदन जाने की उनकी योजना धरी की धरी रह गई। एसी में ब्लास्ट होने के बाद घर में लगी आग ने उनकी जीवनलीला खत्म कर दी।

होनी के आगे किसी की एक नहीं चलती और वह होकर ही रहती है। ऐसा ही कुछ हुआ दिल्ली के हौज खास में रहने वाले रिटायर्ड आईएएस अधिकारी धनेंद्र कुमार के साथ। बर्थ डे मनाने और उसके बाद लंदन जाने की उनकी योजना धरी की धरी रह गई। एसी में ब्लास्ट होने के बाद घर में लगी आग ने उनकी जीवनलीला खत्म कर दी।
रिटायर्ड आईएएस अधिकारी धनेंद्र कुमार 6 जून को अपने 80वें जन्मदिन से पहले शनिवार को जिमखाना क्लब में अपने दोस्तों और परिवार वालों के बीच एक प्री-बर्थडे सेलिब्रेशन होस्ट करने वाले थे। इसके कुछ दिनों बाद उन्हें, उनकी पत्नी और बेटे को लंदन के लिए उड़ान भरनी थी। लेकिन, बुधवार रात को एसी ब्लास्ट होने से घर में आग लग गई। बहुत ज्यादा धुआं और गर्मी के कारण वे अचेत हो गए। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां गुरुवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।
डाइनिंग टेबल पर बैठकर चर्चा कर रहा था परिवार
उनके बेटे गौरव लंदन में रहकर व्यवसाय करते हैं। अपने माता-पिता को लंदन जाने के लिए कुछ ही दिन पहले दिल्ली पहुंचे थे। उनकी बेटी और उसके दो बच्चों के भी वहीं उनसे मिलने वाले थे, ताकि वे अपने माता-पिता के साथ भारत लौट सकें। घटना से कुछ घंटे पहले पूरा परिवार डाइनिंग टेबल पर बैठकर अपनी योजनाओं पर चर्चा कर रहा था। उसके बाद पिता और बेटे अपने-अपने कमरों में चले गए। गौरव लंदन में अपनी पत्नी से फोन पर बात कर रहे थे। तभी उसके कमरे में लगे एसी के इनडोर यूनिट में आग लग गई।
फॉल्स सीलिंग ने आग को तेजी से भड़का दिया
गौरव ने बताया कि फॉल्स सीलिंग ने आग को तेजी से भड़का दिया। आग ने फर्नीचर को अपनी चपेट में लेने लगी। वह अपने पिता और मां को बचाने के लिए तुरंत बाहर भागे। उनकी मां व्हीलचेयर का इस्तेमाल करती हैं। धुआं और आग डाइनिंग रूम को पार करके उसके पिता के बगल वाले कमरे में फैलने लगा। उस समय उनके पिता वॉशरूम में थे।
धुएं के कारण कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था
गौरव ने बताया कि हम उन्हें लगातार आवाज देते रहे। धुएं के कारण कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। एक सिक्योरिटी गार्ड के साथ मिलकर दम घोंटने वाले धुएं से जूझते हुए दोनों ने वॉशरूम में बेहोश पड़े धनेंद्र कुमार को घसीटकर बाहर निकाला। इसी बीच, घर में काम करने वाले एक व्यक्ति ने उनकी पत्नी को डाइनिंग रूम तक पहुंचाया। धुएं और गर्मी ने जल्द ही गौरव को भी अपनी चपेट में ले लिया। वह वहीं गिर पड़े, लेकिन घर के कर्मचारियों ने उन्हें खींचकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया। बाप-बेटे को अस्पताल ले जाया गया, जहां गुरुवार को इलाज के दौरान धनेंद्र कुमार की मौत हो गई। मौत के सही कारण का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
बेहद जोशीले थे धनेंद्र कुमार
उन्हें याद करते हुए स्टाफ ने कहा कि धनेंद्र कुमार हमेशा उनके साथ परिवार जैसा बर्ताव करते थे। 79 साल की उम्र में भी वे बेहद जोशीले और अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित थे। वे एक एडवाइजरी फर्म के चेयरमैन थे। उनका अनुशासन और उत्साह देखकर हम सभी को प्रेरणा मिलती थी। वे सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक काम करते थे। वे एक प्यार करने वाले और समर्पित पति थे, जो अपनी पत्नी का बहुत ख्याल रखते थे।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


