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महिलाओं को छेड़ना अच्छी बात नहीं, मैंने बस इतना ही कहा और…; ट्रामा सेंटर में भर्ती युवक की आपबीती

महिलाओं को छेड़ना अच्छी बात नहीं, मैंने बस इतना ही कहा और…; ट्रामा सेंटर में भर्ती युवक की आपबीती

संक्षेप:

दिल्ली में महिलाओं को परेशान कर रहे कुछ लोगों को रोकने की कोशिश करना एक आदमी को भारी पड़ गया। सबने मिलकर उसे बुरी तरह से पीटा। उसके सिर में गंभीर चोटें आई हैं। एम्स के ट्रामा सेंटर में उसका इलाज चल रहा है। पुलिस ने इस मामले में 4 लोगों को गिरफ्तार किया है।

Feb 05, 2026 06:14 pm ISTSubodh Kumar Mishra पीटीआई, नई दिल्ली
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दिल्ली में महिलाओं को परेशान कर रहे कुछ लोगों को रोकने की कोशिश करना एक आदमी को भारी पड़ गया। सबने मिलकर उसे बुरी तरह से पीटा। उसके सिर में गंभीर चोटें आई हैं। एम्स के ट्रामा सेंटर में उसका इलाज चल रहा है। पुलिस ने इस मामले में 4 लोगों को गिरफ्तार किया है।

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दक्षिण दिल्ली के महरौली इलाके में महिलाओं को परेशान कर रहे कुछ लोगों को रोकने की कोशिश में 26 साल का एक युवक बुरी तरह जख्मी हो गया। युवक की मां सर्वेश ने दुख जताते हुए कहा कि आजकल किसी की मदद करना भी गुनाह है। उनके बेटे मुकेश का एम्स के ट्रॉमा सेंटर में इलाज चल रहा है। सर्वेश ने बताया कि 3 फरवरी की सुबह हुए इस हमले से उनका परिवार सदमे में है। उनका बेटा एक शादी से लौट रहा था। इस दौरान उसने एक चाय की दुकान पर महिलाओं के एक ग्रुप को बचाने के लिए बीच-बचाव किया। इसके बाद चार लोगों ने उसे बुरी तरह पीटा।

सर्वेश ने गुरुवार को पीटीआई को बताया कि आज के जमाने में किसी की मदद करना भी गुनाह है, क्योंकि मेरे बेटे ने मदद करने की कोशिश की और वह बुरी तरह घायल हो गया। अगर किसी ने उन लोगों को नहीं रोका होता तो वे उसे मार डालते। उसके पूरे शरीर पर चोटें हैं। उन महिलाओं और उस आदमी ने उसे बचाया और अस्पताल ले गए।

संगम विहार का रहने वाला मुकेश सुबह 5 बजे अपने मामा की शादी से लौट रहा था। जब वह चाय पीने के लिए रुका तो देखा कि पास में कुछ आदमी कथित तौर पर दो-तीन महिलाओं को परेशान कर रहे थे। उन्होंने बताया कि मैंने उन लोगों से ऐसा न करने को कहा। उनसे कहा कि महिलाओं को छेड़ना अच्छी बात नहीं है। मैंने बस इतना ही कहा था। इसके बाद उन लोगों ने हमला कर दिया। मुकेश के मुताबिक, एक आदमी ने पत्थर जैसी चीज से उनके सिर पर मारा, जिससे वह जमीन पर गिर पड़े। जब ​​वह जमीन पर पड़े थे, तब भी हमला जारी रहा।

उन्होंने कहा कि एक मुस्लिम आदमी ने मुझे और हमले से बचाया। मैं उनका बहुत शुक्रगुजार हूं। अगर वह बीच में नहीं आते तो मेरी जान चली जाती। जिन महिलाओं का उन्होंने बचाव किया था वे भी वहीं रुकी रहीं। उन्हों पुलिस कंट्रोल रूम को फोन किया और यह सुनिश्चित किया कि वह अस्पताल पहुंच जाएं।

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महरौली थाने में गैर इरादतन हत्या की कोशिश, महिला की इज्जत पर हमला, गलत तरीके से रोकना और कॉमन इंटेंशन से जुड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह जांच एक महिला के बयान और ऑनलाइन सामने आए हमले के एक वीडियो के आधार पर शुरू की गई थी।

वीडियो में चार लोग एक लैंप पोस्ट के पास पीड़ित पर हमला करते दिख रहे हैं। ग्रुप उस आदमी को थप्पड़ मारते, लात मारते और घूंसे मारते हुए दिख रहा है। फिर उसे शर्ट से खींचते हुए गालियां दे रहे हैं। एक हमलावर ने ईंट उठाई और पीड़ित की ओर दौड़ा। हालांकि, एक राहगीर ने बीच-बचाव किया और ईंट छीन ली। इसके बाद आरोपी ने राहगीर को धक्का देकर कहा कि तू जानता है मैं कौन हूं? वीडियो मुकेश के सड़क पर बेहोश पड़े होने के साथ खत्म होता है।

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में चार लोगों विशाल रावत (26), जतिन (20), सोनू (25) और विवेक (20) को गिरफ्तार किया है। एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के एनालिसिस और लोकल वेरिफिकेशन के बाद गिरफ्तारियां की गईं।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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