दिल्ली में राशन कार्ड बनाने के लिए नई शर्तें, किन परिवारों को नहीं मिलेगा फायदा; कौन होगा मुखिया

Feb 12, 2026 09:10 pm ISTSubodh Kumar Mishra पीटीआई, नई दिल्ली
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दिल्ली सरकार के खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा अधिसूचित नियमों के तहत राशन कार्ड के लिए नए नियम बनाए गए हैं। राशन कार्ड जारी करने के लिए आय मानदंड को पहले के 1 लाख रुपए से बढ़ाकर 1.2 लाख रुपए प्रति वर्ष कर दिया गया है।

दिल्ली में राशन कार्ड बनाने के लिए नई शर्तें, किन परिवारों को नहीं मिलेगा फायदा; कौन होगा मुखिया

दिल्ली सरकार के खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा अधिसूचित नियमों के तहत राशन कार्ड के लिए नए नियम बनाए गए हैं। राशन कार्ड जारी करने के लिए आय मानदंड को पहले के 1 लाख रुपए से बढ़ाकर 1.2 लाख रुपए प्रति वर्ष कर दिया गया है।

हाल ही में अधिसूचित दिल्ली खाद्य सुरक्षा नियम 2026 के तहत राशन कार्ड जारी करने के लिए परिवार की सबसे बड़ी महिला सदस्य को परिवार का मुखिया माना जाएगा। यदि परिवार की एकमात्र महिला सदस्य की आयु 18 साल से कम है तो परिवार के सबसे बड़े पुरुष सदस्य को मुखिया माना जाएगा।

राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, दिल्ली के लिए आवंटित राशन कार्डों का कोटा जिलेवार उस क्षेत्र के कुल मतदाताओं की संख्या के अनुपात में निर्धारित किया जाएगा। जनसंख्या गणना के परिणाम औपचारिक उपयोग के लिए जारी होते ही मतदाता-आधारित मानदंड को जनगणना-आधारित मानदंड में परिवर्तित कर दिया जाएगा।

आय मानदंड को बढ़ाया गया

दिल्ली सरकार के खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा अधिसूचित नियमों के तहत राशन कार्ड जारी करने के लिए आय मानदंड को पहले के 1 लाख रुपए से बढ़ाकर 1.2 लाख रुपए प्रति वर्ष कर दिया गया है। इसके अलावा, जिला, वार्ड और उचित मूल्य की दुकानों के स्तर पर कई समितियों के माध्यम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में शिकायत निवारण और निगरानी तंत्र को संस्थागत रूप दिया गया है।

आवेदनों पर समिति विचार करेगी

अधिसूचना में कहा गया है कि परिवार की घोषित महिला मुखिया की मृत्यु होने की स्थिति में राशन कार्ड में सबसे बड़ी महिला नए मुखिया के रूप में घोषित होने के लिए आवेदन कर सकती है। राशन कार्ड के आवेदनों पर जिला स्तर पर गठित एक समिति द्वारा विचार किया जाएगा। संबंधित जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) या एडिशनल डीएम इस समिति के प्रमुख होंगे। इसमें दो स्थानीय विधायक सदस्य होंगे। अधिसूचना में कहा गया है कि मौजूदा आवेदनों के अलावा समिति अन्य अत्यंत गरीब वर्गों से भी नए आवेदन आमंत्रित कर सकती है।

इन परिवारों को लाभ नहीं

दिल्ली में ए-ई श्रेणी की कॉलोनियों में घर या जमीन के मालिक परिवारों, आयकर भुगतान करने वाले परिवारों, चार पहिया वाहन के मालिक परिवारों, यदि कोई सदस्य सरकारी कर्मचारी है या 2 किलोवाट से अधिक का बिजली कनेक्शन रखने वाले परिवारों को राशन कार्ड जारी नहीं किए जाएंगे।

शिकायतों का समाधान

आंतरिक शिकायत निवारण तंत्र में सर्कल, जिला और राज्य स्तर पर तीन समितियां शामिल होंगी, जिनकी अध्यक्षता खाद्य आपूर्ति अधिकारी करेंगे। अधिसूचना में कहा गया है कि बाह्य शिकायत निवारण तंत्र के तहत संबंधित एडीएम जिला शिकायत निवारण अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे और सार्वजनिक वितरण कार्यक्रम (पीडीएस) लाभार्थियों की शिकायतों का समाधान करेंगे।

राशन कार्ड धारक समूहों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे

जिला शिकायत निवारण अधिकारी द्वारा पारित किसी भी आदेश से संबंधित किसी भी शिकायत पर राज्य खाद्य आयोग द्वारा कार्रवाई की जाएगी। संबंधित मामलों के सांसद और विधायक क्रमशः जिला और ब्लॉक स्तर की सतर्कता समितियों के सदस्य होंगे। अधिसूचना में आगे कहा गया है कि इनमें राशन कार्ड धारक समूहों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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