दिल्ली के सरकारी स्कूलों में कब तक मिलेंगी किताबें, शिक्षामंत्री ने बताया; निजी स्कूलों के लिए जारी हुए सख्त निर्देश
DoE ने कहा कि स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि निर्धारित किताबें आधिकारिक पाठ्यक्रम और परीक्षा के दिशानिर्देशों के अनुरूप हों। साथ ही, उन्हें CBSE, ICSE और राज्य के शिक्षा अधिकारियों जैसे बोर्डों द्वारा जारी निर्देशों का भी पालन करना होगा।

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के बाद किताबों के वितरण में हो रही देरी को लेकर जताई जा रही चिंताओं के बीच शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बड़ी घोषणा की है। शुक्रवार को उन्होंने स्पष्ट किया कि 20 अप्रैल तक सभी सरकारी स्कूलों में पाठ्यपुस्तकों की आपूर्ति सुनिश्चित कर दी जाएगी। साथ ही उन्होंने बताया कि इस बार किताबों की गुणवत्ता में सुधार करने के साथ ही लागत में 20 से 30 प्रतिशत की कमी की गई है।
PTI से बातचीत में सूद ने बताया कि किताबों की छपाई के लिए अपनाई गई टेंडर प्रक्रिया के कारण किताबों की आपूर्ति में थोड़ी देरी हुई है, वहीं इस प्रक्रिया को अपनाने की वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया की वजह से शिक्षा निदेशालय (DoE) के लिए किताबों की लागत में 20 से 30 प्रतिशत कम आई है और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो रहा है।
किताबों की गुणवत्ता में किया गया सुधार
मंत्री ने आगे कहा कि इस बार किताबों की गुणवत्ता में भी सुधार किया गया है। साथ ही बताया कि MCD स्कूलों में प्राइमरी कक्षाओं के लिए किताबों का वितरण पहले ही शुरू हो चुका है, और उम्मीद है कि 20 अप्रैल तक सभी स्कूलों को किताबें मिल जाएंगी।
निजी स्कूलों के लिए सरकार ने जारी किए निर्देश
इस बीच, दिल्ली सरकार ने बुधवार को निजी, बिना सरकारी सहायता वाले और मान्यता प्राप्त स्कूलों को निर्देश दिया कि वे छात्रों या उनके माता-पिता को किताबें, लिखने का सामान या यूनिफॉर्म किसी खास विक्रेता से खरीदने के लिए मजबूर न करें। सरकार ने दोहराया कि परिवारों को यह चुनने की पूरी आजादी होनी चाहिए कि वे ये सामान कहां से खरीदें।
शिकायतें मिलने के बाद जारी किए गए सख्त निर्देश
DoE ने बताया कि यह निर्देश उन शिकायतों के बाद जारी किया गया है, जिनमें कहा गया था कि कुछ स्कूल माता-पिता को किसी खास दुकान से ही शैक्षणिक सामग्री खरीदने के लिए मजबूर कर रहे थे। विभाग ने बताया कि ऐसा करना 'दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम और नियम (DSEAR), 1973' और 'शिक्षा का अधिकार नियम, 2011' के प्रावधानों का उल्लंघन है। निदेशालय ने स्कूलों से कहा है कि वे हर कक्षा के लिए जरूरी चीजों की साफ-साफ सूची उपलब्ध कराएं और यह सुनिश्चित करें कि ये चीजें खुले बाजार में कई जगहों पर खरीदने के लिए उपलब्ध हों।
निश्चित दुकानों से सामान खरीदने को मजबूर कर रहे स्कूल
अपने आदेश में निदेशालय ने कहा कि शिकायतों से पता चला है कि कुछ स्कूलों में छात्रों को कथित तौर पर किताबें, कॉपियां, यूनिफॉर्म, बैग और बेल्ट-टाई जैसी अन्य चीजें किसी खास विक्रेता से ही खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है, और ये चीजें अक्सर ज्यादा दाम पर बेची जाती हैं। DoE ने कहा कि इस कदम का मकसद व्यावसायिक शोषण को रोकना, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और छात्रों तथा उनके परिवारों के हितों की रक्षा करना है।
वेबसाइट पर डालना होगी किताबों व अन्य सामग्री की विस्तृत सूची
निदेशालय ने आगे कहा कि स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि निर्धारित किताबें आधिकारिक पाठ्यक्रम और परीक्षा के दिशानिर्देशों के अनुरूप हों। साथ ही, उन्हें CBSE, ICSE और राज्य के शिक्षा अधिकारियों जैसे बोर्डों द्वारा जारी निर्देशों का भी पालन करने के अलावा यह भी कहा गया है कि वे किताबों और अन्य सामग्री की विस्तृत सूची अपनी वेबसाइट पर पूरी पारदर्शिता के साथ अपलोड करें।
लेखक के बारे में
Sourabh Jainसौरभ जैन पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में कार्यरत हैं। वह दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और गुजरात से जुड़े घटनाक्रम पर खबरें और विश्लेषण लिखते हैं।
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सौरभ ने बैचलर ऑफ कॉमर्स की डिग्री लेने के बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पोस्ट ग्रेजुएशन का कोर्स किया। इस क्षेत्र में साल 2009 से सक्रिय होने के बाद सौरभ ने पहले टीवी के क्षेत्र में अलग-अलग डेस्क पर कार्य अनुभव लिया, इस दौरान उन्होंने टिकर डेस्क से शुरुआत करने के बाद न्यूज डेस्क में कॉपी राइटिंग का अनुभव हासिल किया, इस दौरान क्षेत्रीय विषयों से लेकर राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय विषयों पर खबरें लिखीं। इसके बाद उन्हें बॉलीवुड और हेल्प-लाइन डेस्क में भी काम करने का मौका मिला। हेल्प लाइन डेस्क में काम करने के दौरान उन्हें स्वास्थ्य, करियर और आम लोगों से जुड़े कई विषयों को जानने व समझने का मौका मिला।
इसके बाद साल 2016 में उन्होंने डिजिटल मीडिया की दुनिया में कदम रखा और स्पोर्ट्स डेस्क के साथ शुरुआत की। सौरभ ने अपने करियर की शुरुआत ZEE24 छत्तीसगढ़ न्यूज चैनल से की थी। इसके बाद वे IBC24 और दैनिक भास्कर जैसी संस्थाओं में भी सेवाएं दे चुके हैं। सौरभ साल 2023 से लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हुए हैं और यहां पर स्टेट डेस्क में कार्यरत हैं। सौरभ मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के रहने वाले हैं और उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई और ग्रेजुएशन दोनों यहीं से किया है। इसके बाद उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर्स की डिग्री ली है।
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