अल फलाह यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष पर और कसा शिकंजा, ED ने एक अन्य मामले में फिर किया गिरफ्तार
ED (प्रवर्तन निदेशालय) ने एक अलग मामले में अल-फलाह विश्वविद्यालय समूह के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी को एक बार फिर गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले सात मार्च को पत्नी के खराब स्वास्थ्य के आधार पर निचली अदालत ने सिद्दीकी को धनशोधन के मामले में दो सप्ताह की अंतरिम जमानत दे दी थी।

ED (प्रवर्तन निदेशालय) ने एक अलग मामले में हरियाणा के फरीदाबाद में स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय समूह के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी को एक बार फिर गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले निचली अदालत ने सात मार्च को सिद्दीकी को धनशोधन के मामले में पत्नी के खराब स्वास्थ्य के आधार पर दो सप्ताह की अंतरिम जमानत दे दी थी।
निचली अदालत ने सात मार्च को सिद्दीकी को धनशोधन (मनीलॉन्ड्रिंग) मामले में दो सप्ताह की अंतरिम जमानत दी थी। यह मामला फरीदाबाद स्थित उनके शिक्षण संस्थान के विद्यार्थियों द्वारा दी गई फीस से कथित तौर पर अवैध धन जुटाने से जुड़ा था।
बीमार पत्नी की देखभाल करने के लिए दी थी जमानत
अदालत ने सिद्दीकी को कैंसर का इलाज करा रही अपनी पत्नी की देखभाल के लिए अंतरिम जमानत दी थी। सिद्दीकी को राहत प्रदान करते समय निचली अदालत ने इस बात पर विचार किया कि दंपति के तीन बच्चे संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में पढ़ रहे हैं और पश्चिम एशिया में अशांति के कारण भारत की यात्रा करने में असमर्थ हैं, जिससे महिला को तत्काल पारिवारिक सहायता नहीं मिल पा रही थी। हालांकि ईडी के वकील ने सिद्दीकी को जमानत देने का विरोध करते हुए कहा था कि अगर 52 हजार भारतीय यूएई से लौट सकते हैं, तो उनके बच्चे भी लौट सकते हैं।
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दर्ज केस को लेकर हुई थी गिरफ्तारी
ईडी ने 16 जनवरी को हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय की 140 करोड़ रुपए की जमीन और इमारतों को जब्त कर लिया था। एजेंसी ने सिद्दीकी और उनके धर्मार्थ न्यास के खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल किया था। सिद्दीकी को ईडी ने 18 नवंबर, 2025 को PMLA के तहत दर्ज मामले में गिरफ्तार किया गया था। यह मामला अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित संस्थानों में नामांकित विद्यार्थियों के साथ कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है।
ईडी की धनशोधन जांच दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज दो FIR पर आधारित है, जिनमें आरोप लगाया गया था कि अल फलाह विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों और अभिभावकों को गुमराह करने के लिए NAAC और UGC की मान्यता का झूठा दावा किया था।
व्हाइट कॉलर आतंकी मॉड्यूल की जांच में आया था नाम
एक 'सफेदपोश आतंकी' मॉड्यूल की जांच के दौरान विश्वविद्यालय की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई थी। इस मामले में विश्वविद्यालय से जुड़े दो डॉक्टरों मुजम्मिल अहमद गनाई और शाहीन सईद को NIA और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
इस विश्वविद्यालय के अस्पताल से जुड़े एक अन्य डॉक्टर उमर-उन-नबी की पहचान उस आत्मघाती हमलावर के रूप में हुई थी, जिसने 10 नवंबर को लाल किले के नजदीक विस्फोटकों से भरी कार में धमाका किया था, जिसमें 15 लोग मारे गए थे। (भाषा इनपुट के साथ)
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