आवास पोर्टल की गड़बड़ी से छोड़ना पड़ा फ्लैट, DDA को ब्याज सहित लौटाना होगा पैसा
आवास पोर्टल की गड़बड़ी के कारण आवंटित फ्लैट छोड़ने वाले को डीडीए को ब्याज सहित पैसा लौटाना होगा। जिला उपभोक्ता फोरम ने एक महिला के पक्ष में फैसला सुनाते हुए डीडीए को पैसे लौटाने का आदेश दिया है। यदि दो महीने के भीतर भुगतान नहीं किया गया तो ब्याज की दर बढ़ा दी जाएगी।

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के आवास पोर्टल की तकनीकी गड़बड़ी से परेशान एक महिला डॉक्टर के लिए राहत भरा फैसला आया है। पोर्टल में खामी के चलते उन्हें न सिर्फ अपना आवंटित फ्लैट छोड़ना पड़ा, बल्कि अपनी ही जमा राशि वापस पाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई भी लड़नी पड़ी। अब उपभोक्ता फोरम ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए डीडीए को पैसे लौटाने का आदेश दिया है।
दक्षिण (II) जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की अध्यक्ष मोनिका अग्रवाल श्रीवास्तव और सदस्य डॉ. राजेंद्र धर की पीठ ने डीडीए को फटकार लगाते हुए पीड़िता के पक्ष में फैसला सुनाया है। साथ ही स्पष्ट किया कि तकनीकी खामियों का खामियाजा उपभोक्ता को नहीं भुगतना पड़ेगा। मामले के अनुसार, अलकनंदा निवासी डॉ. आकांक्षा मौर्या ने डीडीए हाउसिंग स्कीम 2021 के तहत फ्लैट के लिए आवेदन किया था। उन्होंने बुकिंग राशि के तौर पर दो लाख रुपए जमा किए थे।
फ्लैट सरेंडर कर जमा राशि वापस मांगी
10 मार्च 2021 को हुए ड्रॉ में उन्हें द्वारका सेक्टर-19बी में पांचवें तल पर एमआईजी फ्लैट नंबर 169 आवंटित हो गया, लेकिन इसके बाद पूरी प्रक्रिया तकनीकी खामी में उलझ गई। आवंटन के बाद डिमांड लेटर पोर्टल पर उपलब्ध होना चाहिए था, ताकि आवेदक आगे का भुगतान कर सके, लेकिन डॉ. आकांक्षा के पोर्टल पर यह विकल्प दिखाई ही नहीं दिया। उन्होंने कई बार डीडीए की हेल्पलाइन से संपर्क किया, लेकिन हर बार उन्हें इंतजार करने को कहा गया। आठ जुलाई 2021 को उन्हें ई-मेल के जरिए बताया गया कि तकनीकी समस्या दूर कर दी गई है और अब डिमांड लेटर देखा जा सकता है। लंबे इंतजार और मानसिक तनाव से परेशान होकर शिकायतकर्ता ने उसी दिन फ्लैट सरेंडर कर दिया और अपनी जमा राशि वापस मांगी।
रिफंड देने से इनकार कर दिया
डीडीए ने यह कहते हुए रिफंड करने से इनकार कर दिया कि उन्होंने निर्धारित 90 दिनों की अवधि के भीतर फ्लैट रद्द नहीं कराया, इसलिए कटौती लागू होगी। डीडीए का दावा था कि डिमांड लेटर मार्च में ही जारी कर दिया गया था। मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचा। आयोग ने पाया कि डीडीए ने कोई ठोस प्रमाण नहीं दे पाया। आयोग ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अपनी तकनीकी खामियों का ठीकरा सॉफ्टवेयर वेंडर या उपभोक्ता पर फोड़ना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार है।
छह फीसदी ब्याज के साथ लौटाएं राशि
आयोग ने डीडीए को आदेश दिया कि वह शिकायतकर्ता को उनकी दो लाख रुपये की बुकिंग राशि छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाए। यदि दो महीने के भीतर भुगतान नहीं किया गया तो ब्याज दर बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दी जाएगी। इसके अलावा, मानसिक प्रताड़ना के लिए 25 हजार और मुकदमे के खर्च के रूप में पांच हजार रुपए देने का भी आदेश दिया है। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि सरकारी संस्थाओं को जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए और तकनीकी खामियों के पीछे छिपकर उपभोक्ताओं को परेशान नहीं करना चाहिए।
रिपोर्टः निखिल पाठक
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
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