अपकमिंग फिल्म के खिलाफ HC पहुंचे सलमान खान; प्रोड्यूसर बोले- अभी तो वो रिलीज हो भी नहीं सकती
याचिका में बताया गया कि फिल्म में लगाए गए आरोपों का मकसद सलमान खान को नफरत, तिरस्कार और मजाक का पात्र बनाना, उनकी निजी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करना और उनकी प्रतिष्ठा को गंभीर और कभी न ठीक होने वाला नुकसान पहुंचाना है।

दिल्ली हाईकोर्ट में गुरुवार को बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की उस याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें उन्होंने अपकमिंग फिल्म 'काला हिरण: बैटल फॉर लिगेसी' की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की है। उनके वकील ने इस फिल्म को सलमान की छवि खराब करने के इरादे से बनाई गई फिल्म बताया और कहा कि अगर यह फिल्म रिलीज होती है तो इससे अभिनेता के निष्पक्ष सुनवाई के मौलिक अधिकार का उल्लंघन होगा। याचिका के अनुसार फिल्म में सलमान को कई ऐसे गंभीर अपराधों में लिप्त होना बताया गया है, जिनके लिए कभी उन पर कोई केस चला ही नहीं। इसी बीच सुनवाई के दौरान फिल्म के निर्माता (प्रोड्यूसर) अमित जानी ने हाई कोर्ट को बताया कि यह फिल्म अभी किसी OTT प्लेटफॉर्म (जैसे नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम, सोनी लिव या डिज्नी हॉटस्टार) पर भी रिलीज नहीं हो सकती, क्योंकि फिलहाल इसे केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से सर्टिफिकेट तक नहीं मिला है।
सुनवाई के दौरान अभिनेता के वकील रवि प्रकाश ने इस फिल्म को सलमान खान के जीवन से जुड़ी घटना पर आधारित होना बताया और कहा कि प्रोड्यूसर ने बार-बार और सबके सामने माना है कि फिल्म मेरे मुवक्किल और अक्टूबर 1998 की ब्लैकबक घटना से जुड़ी कानूनी कार्यवाही पर आधारित है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि फिल्म के प्रमोशन के लिए इस्तेमाल किए गए मटेरियल में भी साफ तौर पर उनके नाम, शक्ल-सूरत, तौर-तरीकों, खास निजी खूबियों, मशहूर फिल्मों और उनसे जुड़ी चर्चित घटनाओं के जरिए उन्हें दिखाया गया है।
‘फिल्म की वजह से हो रहा मौलिक अधिकार का उल्लंघन’
याचिका में यह भी कहा गया कि घटना से जुड़े चार में से तीन मामलों में बरी होने के बावजूद, और राजस्थान हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में उनकी अपील और स्पेशल लीव पिटीशन पेंडिंग होने के बाद भी, एक नाटकीय ट्रायल दिखाना निष्पक्ष सुनवाई के उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। साथ ही याचिका में कहा गया कि फिल्म का टीजर और प्रमोशन मटेरियल देखने से साफ तौर पर पता चल रहा है कि इस फिल्म में इशारों-इशारों में सलमान को उन अपराधों का दोषी बताया गया है, जिन पर अभी कोर्ट में सुनवाई चल रही है।
'फिल्म में सलमान से जुड़े कोर्ट केसों का किया गया मीडिया ट्रायल'
याचिका में फिल्म में दिखाए गए कोर्ट के दृश्यों को सलमान से जुड़े मामलों का मीडिया ट्रायल बताते हुए संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया। याचिका में कहा गया, 'फिल्म में नाटकीय ट्रायल दिखाकर, मनगढ़ंत गवाही और कथित फोरेंसिक नतीजे बड़ी संख्या में दर्शकों के सामने रखकर और वादी (सलमान खान) जैसे दिखने वाले किरदार को दोषी बताकर, प्रतिवादियों ने कोर्ट में चल रहे मामलों का 'मीडिया ट्रायल' किया है। इससे भारत के संविधान के आर्टिकल 21 के तहत मिले वादी के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ है और न्याय प्रक्रिया में दखल दिया गया है।'
'ऐसे मामलों में लिप्त बताया, जिनका आरोप कभी लगा ही नहीं'
इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि फिल्म के दृश्यों में उन पर कई ऐसे गंभीर अपराधों का झूठा आरोप भी लगाया गया है, जिनके लिए उन पर कभी कोई केस चला ही नहीं, जैसे गवाहों को डराना-धमकाना, झूठी गवाही के लिए उकसाना, मेडिकल एक्सपर्ट्स को रिश्वत देना और जांच एजेंसियों व न्यायिक प्रक्रिया पर बाहरी दबाव डालना।
'फिल्म का मकसद उनकी प्रतिष्ठा को बेहद गंभीर नुकसान पहुंचाना'
साथ ही याचिका में यह भी कहा गया कि फिल्म के दृश्यों में उन्हें अंडरवर्ल्ड और अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों से भी गलत तरीके से जोड़ा गया है। याचिका के अनुसार, ऐसे आरोपों का मकसद उन्हें नफरत, तिरस्कार और मजाक का पात्र बनाना, उनकी निजी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करना और उनकी प्रतिष्ठा को गंभीर और कभी न ठीक होने वाला नुकसान पहुंचाना है। इस मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।


