सोनम वांगचुक पर डॉक्टरों ने बताया 'एक खतरा', 19 दिन अनशन के बाद 9KG घटा वजन

एएनआई, नई दिल्ली
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सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर डॉक्टर ने चेताया है कि अगर उनकी भूख हड़ताल जारी रही तो उन्हें मल्टी ऑर्गन समस्याएं हो सकती हैं। गुरुवार को उनकी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का 19वां दिन है। वांगचुक का वजन अब 9 किलोग्राम से भी ज्यादा कम हो गया है।

sonam wangchuk health check up

शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सेहत बहुत खराब हो गई है। गुरुवार को जंतर-मंतर पर उनकी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का 19वां दिन था। उनके डॉक्टर डॉ. सतीश लांबा ने चेतावनी दी है कि अगर यह उपवास जारी रहा तो उनके शरीर के कई अंगों (मल्टी-ऑर्गन) में गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। वांगचुक ने 28 जून को कॉकरोच जनता पार्टी के चल रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल होकर अपना आंदोलन शुरू किया था। यह प्रदर्शन देश भर में परीक्षाओं में गड़बड़ी और चर्चित नीट पेपर लीक विवाद के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहा है।

9 किलो से ज्यादा कम हो गया वजन

गुरुवार को मेडिकल ब्रीफिंग के दौरान मीडिया से बात करते हुए डॉ. लांबा ने बताया कि लंबे समय तक उपवास करने से उनके शरीर पर बहुत बुरा असर पड़ा है। वांगचुक का वजन अब 9 किलोग्राम से ज्यादा कम हो गया है। उनका मौजूदा वजन घटकर 56.9 किलोग्राम रह गया है। मेडिकल टीम उनके जरूरी हेल्थ पैरामीटर्स पर चौबीसों घंटे नजर रख रही है।

मौजूदा हालत की पूरी जानकारी दी

डॉ. लांबा ने वांगचुक की मौजूदा हालत के बारे में पूरी जानकारी दी। डॉ. लांबा ने बताया कि आज भूख हड़ताल का 19वां दिन है और उनका कुल वजन 9 किलोग्राम से ज्यादा कम हो गया है। आज उनका ब्लड शुगर 80 mg/dL है और पल्स रेट 72 बीट्स प्रति मिनट है। लेटने पर उनका ब्लड प्रेशर 105/61 mmHg और बैठने पर 101/65 mmHg है।

अंदरूनी बायोकेमिस्ट्री में चिंताजनक बदलाव

मेडिकल टीम ने पाया कि वांगचुक के शरीर में पानी का स्तर ठीक है और वे मानसिक रूप से सतर्क हैं। लेकिन, उनके शरीर की अंदरूनी बायोकेमिस्ट्री में चिंताजनक बदलाव दिख रहे हैं। डॉ. लांबा के अनुसार वह लंबे समय तक भूखे रहने की दूसरी स्टेज में पहुंच गए हैं। उन्होंने समझाया कि दूसरी स्टेज में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ जाता है, जो मांसपेशियों के टूटने का संकेत है, जिससे खून में यूरिक एसिड बढ़ गया है।

इंतजार करो और देखो का तरीका अपना रहे डॉक्टर

डॉक्टर लांबा ने बताया कि खतरे का सबसे अहम दौर अब आने वाला है। मेडिकल टीम ने बताया कि यह उपवास अब फैट और मांसपेशियों के इस्तेमाल से आगे बढ़कर शरीर के जरूरी अंदरूनी सिस्टम पर सीधे दबाव डालने की स्थिति में पहुंच रहा है। डॉ. लांबा ने चेतावनी दी कि अब हम एक संभावित तीसरे चरण का सामना कर रहे हैं, जो चिंताजनक हो सकता है। इसमें शरीर के अंगों पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसके लिए हमें इंतजार करो और देखो का तरीका अपनाना होगा। हम चौबीसों घंटे अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं।

आज अरविंद केजरीवाल मिलेंगे

इस बीच, आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल आज जंतर-मंतर जाकर सोनम वांगचुक से मिलेंगे, ताकि वे अपना समर्थन जता सकें। इस बीच, वांगचुक के बढ़ते मेडिकल संकट के कारण तुरंत कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है। बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार से एक जनहित याचिका जवाब मांगा। इस याचिका में हड़ताल कर रहे एक्टिविस्ट के लिए तुरंत मेडिकल मदद की मांग की गई थी।

कोर्ट की कार्यवाही के दौरान याचिकाकर्ता राकेश कुमार सैनी ने तुरंत न्यायिक निगरानी की अपील की। ​​उन्होंने कहा कि लंबे समय तक उपवास के कारण वांगचुक की सेहत काफी खराब हो गई है और उनकी जान बचाने के लिए तुरंत न्यायिक दखल की जरूरत है।

20 जुलाई को संसद मार्च

जैसे-जैसे वांगचुक के अनशन को मशहूर हस्तियों और विपक्षी नेताओं का समर्थन मिल रहा है, यह व्यापक विरोध प्रदर्शन धीमा पड़ता नहीं दिख रहा है। 20 जून से जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रही सीजेपी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) और शिक्षा मंत्रालय से जवाबदेही की मांग कर रहा है। सीजेपी ने 20 जुलाई को संसद तक एक बड़े मार्च की घोषणा की है।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

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