
ऊपर दौड़ती रही मेट्रो और नीचे बनाई सुरंग, कैसे किया यह काम? DMRC ने बताया
DMRC ने अंडरग्राउंड टनल निर्माण के मामले में एक बड़ा कीर्तिमान बनाया है। डीएमआरसी ने दिल्ली के पुलबंगश में मेट्रो सेवाएं जारी रहने के बीच रेड लाइन के नीचे अंडरग्राउंड टनल बनाकर इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना पेश किया है।
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन यानी DMRC ने अंडरग्राउंड टनल निर्माण के मामले में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। डीएमआरसी ने दिल्ली के पुलबंगश में व्यस्ततम रेड लाइन के नीचे एक अंडरग्राउंड टनल बनाकर इंजीनियरिंग का एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। गौर करने वाली बात यह कि इस पूरे निर्माण कार्य के दौरान एक दिन के लिए भी ट्रेन सेवाओं को नहीं रोका गया।
डीएमआरसी की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, यह टनल फेज़ चौथे एक्सपेंशन के तहत मजेंटा लाइन के जनकपुरी वेस्ट-आरके आश्रम मार्ग एक्सटेंशन का हिस्सा है। DMRC ने एक्स पर लिखा- पुलबंगश और सदर बाजार स्टेशनों के बीच यह टनलिंग का काम खास तौर पर मुश्किल था। इसके लिए निर्माणाधीन टनल के ऊपर बेहद व्यस्त रहने वाली रेड लाइन पर ट्रेनें एक दिन के लिए भी नहीं रोकी गईं।
डीएमआरसी ने आगे बताया कि टनल बोरिंग मशीन यानी टीबीएम ने उस एलिवेटेड वायडक्ट के नीचे बेहद सावधानी से निर्माण का काम किया और टनल बनाई जिस पर लगातार ट्रेनें दौड़ रही थीं। चूंकि रेड लाइन वायडक्ट खुली नींव पर बना है। ऐसे में इस निर्माण के नीचे टनलिंग के लिए बहुत ज्यादा इंजीनियरिंग सतर्कता की जरूरत थी। इंजीनियरों ने बेहद सावधानी से सभी बारीकियों पर गौर करते हुए अंडरग्राउंड टनल का निर्माण किया।
डीएमआरसी ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा कि रेड लाइन के पियर के आस-पास के एरिया को मजबूत करने के लिए एक खास रणनीति और तरीके अपनाए गए। टीएएम (ट्यूब-ए-मैनचेट) नाम का एक ग्राउटिंग प्रोग्राम लागू किया गया। पियर के आस-पास 180 टैम बोरहोल लगाए गए। फिर मिट्टी को स्थिर करने और खाली जगहों को भरने के साथ ही पूरी प्रक्रिया के दौरा भार को सहने की क्षमता को बढ़ाने के लिए बेहद मजबूत सीमेंट ग्राउटिंग की गई।
पूरे निर्माण कार्य के दौरान इस बात की तस्दीक कर ली गई कि टनलिंग के दौरान मिट्टी के बैठने की संभावना न के बराबर रहे। टनलिंग के काम के दौरान जमीन की हलचल, पियर के बिहेवियर और बिल्डिंग सेफ्टी को रियल-टाइम बेसिस पर मॉनिटर करने के लिए खास यंत्र लगाए गए। इन यंत्रों में सरफेस सेटलमेंट मार्कर, डीप इनक्लिनोमीटर, बिल्डिंग सेटलमेंट पॉइंट, पियर टिल्ट मीटर, लोड सेल और ऑटोमैटिक टोटल स्टेशन शामिल थे।





