मजलिस पार्क-मौजपुर बदरपुर और दीपाली चौक-मजलिस पार्क रूट पर मेट्रो शुरू, इन इलाकों को फायदा
दिल्ली मेट्रो रेल निगम ने रविवार को दोपहर 3 बजे दो नए कॉरिडोर पर रेल सेवाएं शुरू कीं। इनका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। ये सेवाएं मजलिस पार्क-मौजपुर बदरपुर और दीपाली चौक-मजलिस पार्क खंडों पर शुरू हुईं।

दिल्ली मेट्रो रेल निगम ने रविवार को दोपहर 3 बजे दो नए कॉरिडोर पर रेल सेवाएं शुरू कीं। इनका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। ये सेवाएं मजलिस पार्क-मौजपुर बदरपुर और दीपाली चौक-मजलिस पार्क खंडों पर शुरू हुईं।
इससे पहले दिन में प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय राजधानी में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के उद्देश्य से तीन अतिरिक्त मेट्रो लाइनों की आधारशिला भी रखी। इन दो नए खंडों में मजलिस पार्क और मौजपुर बदरपुर के बीच पिंक लाइन का 12.3 किमी का खंड और दीपाली चौक को मजलिस पार्क से जोड़ने वाली मैजेंटा लाइन का 9.9 किमी का खंड शामिल है।
डीएमआरसी के अनुसार, इन गलियारों से बुराड़ी, जगतपुर-वजीराबाद, खजूरी खास, भजनपुरा, यमुना विहार, मधुबन चौक, हैदरपुर बादली मोड़, भलस्वा और मजलिस पार्क सहित कई क्षेत्रों के निवासियों को लाभ होने की उम्मीद है।
एक यात्री विनिका ने कहा कि मैं मधुबन चौक रहती हूं। हमारे घर से मेट्रो स्टेशन की दूरी मात्र 100 मीटर है। मेट्रो शुरू होने से सफर बहुत आसान हो जाएगा और समय व पैसों की भी बचत होगी। वहीं, रजत ने कहा कि मैं हर रोज गुरुग्राम स्थित ऑफिस जाता हूं। पहले मुझे गुरुग्राम जाने के लिए कश्मीरी गेट जाना पड़ता था। अब हैदरपुर/बादली से ही आसानी से सीट भी मिल जाएगी और सफर करने में दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा। कश्मीरी गेट पर पीक आवर्स में भीड़ होने की वजह से कई मेट्रो छोड़नी पड़ती थी।
प्रधानमंत्री ने दिल्ली मेट्रो परियोजना के चरण V-A के तहत तीन नए कॉरिडोर की आधारशिला भी रखी। इन लाइनों की कुल लंबाई 16.1 किलोमीटर है। प्रस्तावित मार्गों में आर के आश्रम मार्ग से इंद्रप्रस्थ, एयरोसिटी से इंदिरा गांधी हवाई अड्डे के टर्मिनल-1 और तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज तक शामिल हैं। इन खंडों से नोएडा, दक्षिण दिल्ली और हवाई अड्डे जैसे प्रमुख स्थानों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित होने की उम्मीद है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


