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गाजियाबाद में मरीजों की जान से खिलवाड़, बिना फिटनेस दौड़ रही हैं 32% एंबुलेंस

गाजियाबाद में मरीजों की जान से खिलवाड़, बिना फिटनेस दौड़ रही हैं 32% एंबुलेंस

संक्षेप:

गाजियाबाद जनपद में पंजीकृत 235 में से 75 एंबुलेंस बिना फिटनेस प्रमाण पत्र के सड़कों पर दौड़ रही हैं, जिससे गंभीर मरीजों की जान को खतरा बना हुआ है और परिवहन विभाग केवल नोटिस भेजकर खानापूर्ति कर रहा है।

Jan 14, 2026 09:20 am ISTAnubhav Shakya हिन्दुस्तान, गाजियाबाद
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गाजियाबाद जिले में गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए चल रही एंबुलेंस खुद ही ‘बीमार’ हैं। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनपद में 32 फीसदी एंबुलेंस बिना फिटनेस दौड़ रही हैं। इमरजेंसी सेवा होने की वजह से परिवहन अधिकारी भी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे। ऐसे मेें यह मरीजों की जान के लिए खतरा बने हुए हैं।

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क्या है नियम

जनपद में निजी और सरकारी अस्पतालों के अलावा प्राइवेट संचालकों की 235 एंबुलेंस का पंजीकरण हैं। इनमें एडवांस लाइफ सपोर्ट की एंबुलेंस भी शामिल हैं। नियमानुसार हर दो साल में एंबुलेंस संचालकों को फिटनेस करानी चाहिए। परिवहन विभाग से फिटनेस खत्म होने से 30 दिन पहले ही एंबुलेंस संचालक के मोबाइल पर मैसेज भेजकर रिमाइंडर भेजा जाता है। इसके अलावा फिटनेस खत्म होने के बाद विभाग की ओर से नोटिस जारी होता है। इसके बाद भी बिना फिटनेस 75 एंबुलेंस सड़कों पर दौड़ रही हैं यानी एंबुलेंस खुद ही बीमार है और मरीजों की जान के लिए खतरा बनी हुई है। अनफिट एंबुलेंस में केवल तीन एंबुलेंस सरकारी हैं, बाकी सभी प्राइवेट अस्पतालों और सेवा प्रदाता एजेंसी की हैं। मरीजों को अस्पताल में शिफ्ट करने के नाम पर संचालक कमाई में जुटे हैं और मरीजों की जिंदगी से खेल रहे हैं। परिवहन विभाग भी केवल नोटिस जारी करके खानापूर्ति कर रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले एक साल में किसी अनफिट एंबुलेंस को सीज नहीं किया। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि इन्हीं एम्बुलेंस के जरिए गंभीर मरीजों, गर्भवती महिलाओं और दुर्घटना पीड़ितों को अस्पताल पहुंचाया जाता है।

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सायरन बजाते हुए निकल जाती है ‘बीमार’ एंबुलेंस

एंबुलेंस को कुछ खास अधिकार प्राप्त है। नीली बत्ती लगी एंबुलेंस सायरन बजाते हुए किसी चौराहे और रेड लाइट सिग्नल से निकल सकती हैं और उन्हें रुकने की भी जरूरत नहीं पड़ती। आमतौर पर ट्रेफिक पुलिस जाम में एंबुलेंस को साइड से जगह देकर निकालवा देते हैं। इमरजेंसी सेवा की वजह से ट्रेफिक पुलिस और परिवहन विभाग एंबुलेंस पर कार्रवाई से हिचकते हैं। लेकिन बीमार एंबुलेंस में नियमों को ताक पर रख रहे हैं।

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ये सुविधाएं होनी जरूरी

परिवहन विभाग के निरीक्षक विवेक खरवार ने बताया कि एआईएस- 125 नियम के तहत एंबुलेंस का तीन श्रेणी ए, बी, सी में पंजीकरण होता है। इसलिए तीनों श्रेणियों के फिटनेस नियम अलग-अलग हैं। एंबुलेंस में एसी, अग्निशमन यंत्र, इंमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (ईएमटी), ऑक्सीजन सिलिंडर के अलावा जरूरी दवाएं होनी चाहिए

Anubhav Shakya

लेखक के बारे में

Anubhav Shakya
भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद जी न्यूज से करियर की शुरुआत की। इसके बाद नवभारत टाइम्स में काम किया। फिलहाल लाइव हिंदुस्तान में बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। किताबों की दुनिया में खोए रहने में मजा आता है। जनसरोकार, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में गहरी दिलचस्पी है। एनालिसिस और रिसर्च बेस्ड स्टोरी खूबी है। और पढ़ें
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