अरविंद केजरीवाल चाह कर भी जो नहीं कर सके, अब रेखा गुप्ता सरकार में पूरा होगा उनका वादा
अरविंद केजरीवाल ने पहली बार दिल्ली की सत्ता में आने से पहले बिजली कंपनियों का कैग ऑडिट कराने का वादा किया था लेकिन कानूनी-अदालती अड़चनों की वजह से वह ऐसा नहीं कर पाए।

दिल्ली में अपनी पहली सरकार बनाने से पहले अरविंद केजरीवाल ने जिन कुछ मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था उनमें बिजली कंपनियों का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से ऑडिट कराना भी शामिल था। हालांकि, वह ऐसा करने में कामयाब नहीं हो पाए। अब करीब 13 साल बाद रेखा गुप्ता के राज में इसका रास्ता साफ हो गया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड और बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड का कैग को ऑडिट सौंपने के दिल्ली सरकार के प्रस्ताव में दखल देने से इनकार कर दिया।
जस्टिस तेजस करिया की अवकाशकालीन पीठ ने बिजली वितरण कंपनियों की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि इस स्तर पर उनकी चुनौती समयपूर्व है। पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार के 6 जून के नोटिस (जिसमें याचिकाकर्ताओं का ऑडिट कैग को सौंपने का प्रस्ताव है) में कोई ऐसी गलत बात नहीं है। यदि फिर भी बिजली कंपनी अपनी बात रखना चाहती हैं तो इन्हें संबंधित प्राधिकारी के सामने सुनवाई के लिए पेश होने का मौका दिया जा रहा है।
याचिकाकर्ता बिजली कंपनियों ने तर्क दिया कि 6 जून का नोटिस शुरू से ही अमान्य, गैरकानूनी व न्यायिक फैसलों के विपरीत था, जिसमें उच्चतम न्यायालय का एक फैसला भी शामिल है, जो ऐसे ऑडिट को रोकता है। हालांकि पीठ ने यह नतीजा निकाला कि नोटिस को याचिकाकर्ता बिजली कंपनियों के लिए उलझा हुआ नहीं माना जा सकता। पीठ ने कहा कि यह नोटिस दिल्ली के उपराज्यपाल द्वारा कैग को ऑडिट सौपने से पहले सुनवाई का मौका देने की कानूनी जरूरत को आगे बढ़ाने के लिए था। इस मामले में दिल्ली बिजली नियामक आयोग या सरकार को कैग ऑडिट शुरू करने से रोकने वाली कोई कानूनी रुकावट नहीं है।
कंपिनयों और आप की मिलीभगत उजागर हुई : सूद
दिल्ली के ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद बिजली कंपनियों के ऑडिट का रास्ता साफ हो गया है। अब सीएजी ऑडिट से संबंधित सुनवाई उपराज्यपाल कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि बिजली कंपनियों द्वारा सीएजी ऑडिट का विरोध करने के लिए जाने से पूर्ववर्ती आप सरकार और बिजली कंपनियों के बीच चल रही मिलीभगत की सच्चाई उजागर हो गई है।
सीएम बनते ही केजरीवाल ने दिया था आदेश, कानूनी अड़जनें आईं
अरविंद केजरीवाल ने पहली बार दिल्ली का सीएम बनने के बाद बिजली कंपनियों के कैग ऑडिट का आदेश दिया था। उन्होंने एक जुलाई 2002 से इन कंपनियों के खातों की जांच का आदेश दिया था। मुख्यमंत्री की सिफारिश पर एलजी ने भी आदेश जारी कर दिया था। हालांकि, कंपनियां अदालत गईं और उन्हें तब वहां राहत मिल गई थी।
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Sudhir Jhaसुधीर झा | वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम लीड
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