धर्मेंद्र प्रधान चले गए, क्या गारंटी है कि पेपर लीक नहीं होगा? अवध ओझा ने बताया असली समाधान
मशहूर शिक्षक अवध ओझा ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी पेपर लीक की समस्या खत्म होने की गारंटी पर सवाल उठाया है। उन्होंने राजनीति में फैली समस्या का जिक्र करते हुए इसका समाधान भी बताया है।

कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के बाद केद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था। इस घटना के बाद से देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्रों द्वारा अन्य तरह की मांगे भी उठाई जाने लगी हैं। मशहूर शिक्षक अवध ओझा से जब पूछा गया- क्या वाकई में शिक्षा मंत्री के बदल जाने से या फिर सरकार में एक मंत्री के बदल देने से भारत का सिस्टम बदल जाएगा? अपनी बात रखते हुए अवध ओझा ने इस पूरी समस्या का समाधान भी सुझाया। जानिए अवध ओझा ने क्या जवाब दिया।
धर्मेंद्र प्रधान चले गए, क्या गारंटी है कि पेपर लीक नहीं होगा?
यूट्यूब पर दिए एक इंटरव्यू में इस सवाल का जवाब देते हुए अवध ओझा ने साफ शब्दों में कहा- 'इस देश को व्यवस्था परिवर्तन की जरूरत है, व्यक्ति परिवर्तन की नहीं।' धर्मेंद्र प्रधान का उदाहरण देते हुए कहा- 'आप हटा दीजिए। धर्मेंद्र प्रधान जी तो चले गए।' इसके बाद सवाल उठाते हुए कहा- 'क्या अब इस बात की गारंटी है कि कहीं पेपर लीक नहीं होगा।' अवध ओझा ने असली समस्या को गिनाने से पहले पीएम मोदी का जिक्र करते हुए कहा- 'आप मोदी जी को भी हटा दीजिए।' इसके बाद उसी व्यवस्था परिवर्तन की जरूरत को समझाते हुए पूछा- ‘क्या जो दूसरी पार्टियां हैं, सब जगह साधु-संत भरे पड़े हैं।’
अवध ओझा ने बताई भारतीय राजनीति की मूल समस्या
इसके बाद अवध ओझा ने वर्तमान राजनीति को ब्रिटिश काल से तुलना करते हुए समझाया कि आज की राजनीति को कौन चला रहा है। उन्होंने कहा- 'आज भारत की राजनीति ठेकेदार, बाहुबली और बिजनेसमैन के हाथों में है। जैसे ब्रिटिशकाल में राजनीति जमीदार, महाजन और बाबुओं के हाथ में थी।' ओझा ने आगे समझाया- ‘इन तीनों ने मिलकर भारत में जबरदस्त खेल खेला है। जातिगत संगठन बनाए। जातिगत पार्टियां बनाईं। धर्मगत पार्टियां और संगठन बनाए। ये सारे इन्हीं बाहुबली, ठेकेदार और बिजनेसमैन से पैसा पाते हैं। फिर ये अपने वर्ग को भड़काते हैं।’
अवध ओझा ने बताया असली समाधान
पूरी व्यवस्था पर आरोप लगाते हुए अवध ओझा ने कहा- 'किसी को भारत की चिंता नहीं है। सबको अपनी-अपनी चिंता है। तो भले आज भाजपा चली जाए, मोदी जी चले जाएं या धर्मेंद्र प्रधान जी चले गए, लेकिन इनसे समस्या का कोई समाधान नहीं होगा।' इसके बाद ओझा ने समाधान का रास्ता बताते हुए कहा- 'जब तक भारत में व्यवस्थागत परिवर्तन नहीं होगा। जब तक अटल बिहारी बाजपेयी, राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण जैसे लोग संसद में नहीं बैठेंगे, तब तक देश का भला नहीं होगा।'


